Hardoi : 42 साल बाद खुला खौफनाक दोहरा हत्याकांड- बाहुबली कुलदीप कटियार को हाईकोर्ट ने तलब किया, 28 नवंबर को होना होगा हाजिर
यह मामला 1983-84 का है जब गंज जलालाबाद (हरदोई) के मजरा खेतहरा निवासी कुलदीप कटियार ने दिन-दहाड़े सड़क पर अध्यापक रज्जू कुशवाहा और उनके एक साथी की घे
हरदोई/उन्नाव। योगी राज में अपराधियों पर कसे जा रहे शिकंजे के बीच कुख्यात बाहुबली कुलदीप कटियार को करारा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल पुराने सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का मुकदमा दोबारा खोलते हुए कुलदीप कटियार को 28 नवंबर 2025 को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का सख्त आदेश दिया है। साथ ही उसके खिलाफ 1984 से लंबित जमानत वारंट को तुरंत तामीला (अमल) कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह मामला 1983-84 का है जब गंज जलालाबाद (हरदोई) के मजरा खेतहरा निवासी कुलदीप कटियार ने दिन-दहाड़े सड़क पर अध्यापक रज्जू कुशवाहा और उनके एक साथी की घेराबंदी कर निर्मम हत्या कर दी थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कुलदीप ने रज्जू कुशवाहा का सिर धड़ से अलग कर लिया था और वह सिर आज तक बरामद नहीं हो सका।
इस जघन्य हत्याकांड के बाद कुलदीप पर हरदोई और उन्नाव में कुल चार हत्याओं के मुकदमे चले। इनमें उन्नाव का मखलू कटियार हत्याकांड और गंज जलालाबाद में बद्री हरिजन की हत्या भी शामिल है। हरदोई की जिला अदालत ने उसे सजा भी सुनाई थी, लेकिन 1984 में हाईकोर्ट से जमानत मिलते ही वह पिछले चार दशक से बाहर घूम रहा था और रिट नंबर 564/1984 के जरिए केस को दबाए रखा था।
अब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए पुराना मुकदमा पुनर्जीवित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जमानत वारंट का तुरंत निष्पादन किया जाए और आरोपी को निर्धारित तारीख पर हाजिर किया जाए।
इस फैसले से उन पीड़ित परिवारों में नई उम्मीद जगी है जो 42 साल से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे थे। कई परिवार तो इस हत्याकांड की वजह से बेघर तक हो गए थे। क्षेत्र में चर्चा है कि योगी सरकार के सख्त रुख के चलते अब पुराने बाहुबलियों के दिन लद रहे हैं।
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