Hardoi : आम की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए जानें जरूरी उपाय

आम के बागों में तना भेदक (स्टेम बोरर) नामक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, जो पेड़ के तनों में सुरंग बनाकर नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की पहचान तने से बुरादा निकलने से

By INA News Desk
Sep 8, 2025 - 21:55
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Hardoi : आम की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए जानें जरूरी उपाय
आम की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए जानें जरूरी उपाय
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हरदोई : जिले में आम की खेती करने वाले बागवानों को फसल को कीटों और रोगों से बचाने के लिए समय पर सही प्रबंधन करने की सलाह दी गई है। जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चन्द्र ने बताया कि आम के पेड़ों में बौर निकलने से लेकर फल तैयार होने तक की अवस्था बहुत संवेदनशील होती है। इस दौरान कीट और रोगों से बचाव के लिए विशेष ध्यान देना जरूरी है ताकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बना रहे।

आम के बागों में तना भेदक (स्टेम बोरर) नामक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है, जो पेड़ के तनों में सुरंग बनाकर नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की पहचान तने से बुरादा निकलने से होती है। इसके उपचार के लिए प्रभावित तने की छाल हटाकर छेद में डाइक्लोरोवास, नुवान या मैलाथियान (50 ईसी) का 5 मिली प्रति लीटर पानी का घोल डालना चाहिए। घोल में रुई भिगोकर छेद में तीली की मदद से डालकर छेद को गीली मिट्टी या ग्रीस से बंद कर देना चाहिए। साथ ही, खेत की मिट्टी में फ्यूराडान ग्रेन्यूल्स 2.5 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से मिलाने की सलाह दी गई है। अगर पूरे बाग में यह समस्या अधिक हो, तो सितंबर के अंत में जुताई करके बिवेरिया बैसियाना का कल्चर मिट्टी में मिलाएं। यह जैविक फंगस कीटों के प्यूपा, दीमक और गिडार पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देती है, जो एक पर्यावरण-अनुकूल उपाय है।

आम के बागों में भुनगा कीट भी नुकसान पहुंचाता है। यह कीट कोमल पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसता है, जिससे प्रभावित हिस्से सूखकर गिर जाते हैं। यह कीट एक मधु जैसा पदार्थ भी छोड़ता है, जिससे पत्तियों पर काली फफूंद जम जाती है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। इसी तरह, मिज कीट मंजरियों, नए फलों और कोमल कोपलों में अंडे देता है, जिसकी सूंडी अंदर ही अंदर खाकर नुकसान पहुंचाती है। प्रभावित हिस्से काले पड़कर सूख जाते हैं। भुनगा और मिज कीटों के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.1% (2 मिली प्रति लीटर पानी) या क्लोरोपाइरीफास 1.5% (2 मिली प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

खर्रा रोग भी आम की फसल को प्रभावित करता है। इस रोग में फल और डंठलों पर सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देती है, जिससे मंजरियां सूखने लगती हैं और प्रभावित हिस्से पीले पड़ जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए ट्राइडोमार्फ या डायनोकेप (1 मिली प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर भुनगा कीट के नियंत्रण के लिए उपयोग किए जा रहे घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

बागवानों को यह भी सलाह दी गई है कि जब बौर पूरी तरह खिले हों, तो रासायनिक दवाओं का छिड़काव कम से कम करें, ताकि परागण की प्रक्रिया प्रभावित न हो। इससे फसल की गुणवत्ता और उपज पर सकारात्मक असर पड़ता है।

कीटनाशकों के उपयोग में सावधानी बरतना भी जरूरी है। कीटनाशकों को बच्चों और जानवरों की पहुंच से दूर रखें। छिड़काव के दौरान दस्ताने, मास्क और चश्मा पहनें ताकि दवा त्वचा या आंखों में न जाए। छिड़काव शाम के समय करें, जब हवा का वेग कम हो, और हवा की दिशा के विपरीत खड़े होकर छिड़काव करें। उपयोग के बाद कीटनाशकों के खाली डिब्बों या पाउच को मिट्टी में दबा देना चाहिए।

इन उपायों को अपनाकर बागवान अपनी आम की फसल को कीटों और रोगों से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। जिला उद्यान विभाग ने किसानों से इन सुझावों को गंभीरता से लागू करने की अपील की है ताकि उनकी मेहनत का पूरा फल मिल सके।

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