Hardoi : अभिभावक से अभद्रता व 'जूतों पर नाक रगड़ने' के बयान पर भड़का आक्रोश, एबीवीपी ने घेरा कैंपस, वायरल वीडियो ने पकड़ा तूल
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अब स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल अपनी गलतियों को छिपाने के लिए खुद को पीड़ित और निर्दोष दिखाने का प्रपंच रच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद प्रिंसिपल
हरदोई शहर के पॉश इलाके एसपी तिराहा स्थित सनबीम पब्लिक स्कूल में एक अभिभावक के साथ प्रिंसिपल द्वारा की गई कथित अभद्रता का मामला अब प्रशासनिक और सामाजिक गलियारों में पूरी तरह गरमा चुका है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब नीलम वर्मा नामक एक महिला अभिभावक स्कूल से जुड़े किसी कार्यवश कार्यालय पहुंची थीं, जहां उनकी प्रिंसिपल ममता मिश्रा के साथ तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते इस विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया, जिसमें प्रिंसिपल द्वारा कथित तौर पर "ब्लडी फूल", "गंवार" और बार-बार "शट अप" जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए सुना गया। इस व्यवहार को लेकर अभिभावक के परिवार में रोष है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए शहर की सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अर्पण कुशवाहा के नेतृत्व में भारी संख्या में कार्यकर्ता एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं का स्पष्ट तर्क है कि यदि कोई अभिभावक आर्थिक तंगी या किसी अन्य समस्या के कारण स्कूल की मांगों को पूरा करने में असमर्थ है, तो इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि स्कूल प्रबंधन को उनके साथ दुर्व्यवहार करने का लाइसेंस मिल गया है। कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की है कि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना आचरण वाली प्रिंसिपल के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षण संस्थान किसी अभिभावक के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचा सके।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद एबीवीपी का जत्था सीधे सनबीम स्कूल के मुख्य गेट पर जा पहुंचा, जहां स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। स्कूल परिसर के भीतर जब प्रिंसिपल और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद शुरू हुआ, तो प्रिंसिपल ममता मिश्रा के एक विवादित बयान ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों और किताबों की बिक्री से जुड़े सवालों के जवाब में आवेश में आकर कहा कि यदि उनके स्कूल की कोई भी किताब या कॉपी बाहर किसी दुकान पर मिल जाए, तो वह सभी के जूतों पर अपनी नाक रगड़ने को तैयार हैं। इस तरह की भाषा और तल्ख तेवर देखकर कार्यकर्ता और अधिक उग्र हो गए, जिसके बाद स्कूल के बाहर भारी हंगामा शुरू हो गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि एक शिक्षाविद् से इस तरह की सड़क छाप भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और उपनिरीक्षक केके यादव के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस ने जब कार्यकर्ताओं को शांत कराने और स्कूल परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक धक्कामुक्की और तीखी बहस होती रही। प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े थे कि जब तक प्रिंसिपल अपने अभद्र व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगतीं और प्रशासन उन पर कार्रवाई का भरोसा नहीं देता, वे पीछे नहीं हटेंगे। पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद किसी तरह प्रदर्शनकारियों को शांत कराकर वहां से हटाया गया।
क्या कहता है वायरल वीडियो?
सोशल मीडिया पर वायरल लगभग एक मिनट के वीडियो क्लिप में प्रिंसिपल और महिला अभिभावक के बीच संवाद स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड है। वीडियो में प्रिंसिपल काफी गुस्से में नजर आ रही हैं और वह महिला को बार-बार चुप रहने की हिदायत देते हुए उनके लिए अपमानजनक विशेषणों का प्रयोग कर रही हैं। इस वीडियो ने ही इस पूरे आंदोलन की नींव रखी है, जिसे अब महिला अस्मिता और अभिभावकों के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अब स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल अपनी गलतियों को छिपाने के लिए खुद को पीड़ित और निर्दोष दिखाने का प्रपंच रच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद प्रिंसिपल का यह दावा करना कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया, उनकी हठधर्मिता को दर्शाता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी उठाया कि निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों का शोषण अब आम बात हो गई है, लेकिन जब अभिभावक अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो उनके साथ इसी तरह का "गंवार" और "मूर्ख" जैसा बर्ताव किया जाता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग ने इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रिंसिपल पर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
फिलहाल, जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और जिला विद्यालय निरीक्षक से इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस भी वायरल वीडियो की सत्यता और मौके पर हुए हंगामे के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक लिखित स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे स्थिति और भी संदेहास्पद बनी हुई है।
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