KGMU धर्मांतरण केस: 7 दिन से फरार आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक, तीन राज्यों में पुलिस की तलाश जारी, अब तक खाली हाथ
पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग को शिकायत की। 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (धोखाध
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोपों से जुड़ा मामला चर्चा में है। आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक, जिन्हें रमीज उद्दीन नायक के नाम से भी जाना जाता है, अब 7 दिनों से फरार हैं। वे आखिरी बार 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ में देखे गए थे, उसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला है। मामला पैथोलॉजी विभाग से जुड़ा है, जहां आरोपी ने एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली हैं और 2024 बैच की एमडी पैथोलॉजी छात्रा हैं। आरोप है कि आरोपी ने खुद को अविवाहित बताया और शादी का वादा किया। जब पीड़िता ने रिश्ते को औपचारिक बनाने की बात की तो आरोपी ने शर्त रखी कि शादी के लिए इस्लाम कबूल करना होगा।
सितंबर 2025 में पीड़िता को गर्भावस्था का पता चला। इसी दौरान उनकी मुलाकात आरोपी की पत्नी से हुई, जिसने बताया कि उसने फरवरी 2025 में धर्म परिवर्तन कर आरोपी से शादी की थी। आरोपी पहले से शादीशुदा थे और उनकी पत्नी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में रहती हैं। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी, जिससे पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना हुई। धमकियों और दबाव से पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को दवा की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया।
पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग को शिकायत की। 23 दिसंबर 2025 को चौक थाने में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (धोखाधड़ी से शारीरिक संबंध), धारा 89 (बिना सहमति गर्भपात), धारा 351(1) (आपराधिक धमकी) तथा उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) शामिल हैं। KGMU प्रशासन ने मामले की जांच के लिए विशाखा समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को तत्काल निलंबित कर दिया गया और कैंपस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। कुलपति ने 5 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमिटी बनाई, जिसने 27 दिसंबर 2025 से जांच शुरू की और 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी। विश्वविद्यालय ने पीड़िता को कैंपस में रहने की सुविधा और महिला पुलिसकर्मी की तैनाती सुनिश्चित की।
लखनऊ पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए तीन विशेष टीमें गठित कीं। ये टीमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में छापेमारी कर रही हैं। आरोपी की आखिरी लोकेशन उत्तराखंड के खटीमा क्षेत्र में ट्रेस हुई, जहां उनका पैतृक घर है। लखनऊ से एक टीम खटीमा गई, परिजनों से पूछताछ की, लेकिन आरोपी वहां से पहले ही चले गए थे। नोएडा में आरोपी की पत्नी से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया। आरोपी ने सभी मोबाइल फोन बंद कर रखे हैं, जिससे लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो गया है। पुलिस ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। जांच में आरोपी के खिलाफ और सबूत जुटाए जा रहे हैं। यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए नजर रखने की बात कही है।
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