Lucknow : खरीफ फसलों का कीट और रोगों से ऐसे करें बचाव, जानें कीट एवं रोगों के प्रकोप फसल को बचाने के तरीके
धान के झोंका (ब्लास्ट) रोग के नियंत्रण हेतु एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 + डाईफेनकोनाजोल 11.4 एस. सी. का 200 मिलीं या पाथिराक्लोस्ट्रोबिन 10 सी. एस. 400 मि
लखनऊ : प्रदेश के किसानों के हित में कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसलों के बचाव के लिए विशेष परामर्श जारी किए गए हैं। इन दिनों खरीफ फसलों की बढ़वार का समय चल रहा है, इसी समय में मौसम में आर्द्रता एवं तापमान अधिक होने के कारण कीट एवं रोगों का प्रकोप भी किसानों की फसलों पर अधिक होता है l इस समय की मुख्य फसलें धान, मक्का, उर्द,मूंग, तिल, मूँगफली, अरहर आदि हैं, जिनमें कीट एवं रोगों का प्रकोप खेतों में देखने को मिलता है। इन दोनों धान में लगने वाले भूरा फुदका कीट के प्रबंधन लिए खेत में रुके हुए पानी को निकाल दें। प्रारंभिक रोकथाम हेतु नीम का तेल 600 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बना के छिड़काव करें।
यदि फुदकों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर (15-20 फुदका प्रति पुंज) से उपर पहुँच जाये तो निम्न में से किसी एक कीटनाशी का प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही इथिप्रोल 40 + इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत डब्लू. जी. 37.5 ग्राम, क्लोथियानीडीन 50 डब्लू. जी.12 ग्राम, नोफ्यूरान 20 एस. जी. 80 ग्राम, फ्लोनिकामिड 50 डब्लू. जी. 60 ग्राम, पाईमेट्रोजिन 50 डब्लू.जी. - 120 ग्राम तथा ट्राईफ्लूमेजोपाईरिम 10 एस.सी. 100 मिली का छिड़काव करें। कीटनाशक का छिड़काव करते समय नोज़ल की दिशा पौधों के आधार की ओर रखें। कीटनाशकों का मिश्रण बनाकर छिड़काव न करें एवं लगातार एक ही कीटनाशक का एक से अधिक बार उपयोग न करें। यदि आवश्यक हो तो 7-10 दिन बाद रसायन का बदलाव करके छिड़काव की पुनरावृत्ति की जा सकती है।
धान के झोंका (ब्लास्ट) रोग के नियंत्रण हेतु एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 + डाईफेनकोनाजोल 11.4 एस. सी. का 200 मिलीं या पाथिराक्लोस्ट्रोबिन 10 सी. एस. 400 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव प्रयोग करना चाहिए। धान की फसल में पर्णछेद झुलसा (शीथ ब्लाइट) रोग के नियंत्रण हेतु एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 118 + टेबूकोनाजोल 18.3 प्रतिशत का 300 मिली या थाईफ्लूज़ामाईड 24 ई. सी. 150 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही जीवाणु झुलसा रोग के नियंत्रण हेतु स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट + टेट्रासाइक्लिन 120 ग्राम + कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 400 ग्राम का प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
आवश्यकता अनुभव होने पर इस छिड़काव की 15 दिन बाद पुनरावृत्ति की जा सकती है। मक्का और ज्वार की फसल में कीट सैनिक सुंडी (फॉल आर्मी वर्म) रोग के नियंत्रण हेतु एमामेक्टिन बेंजोएट एस. जी. 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। मूँग, उर्दू आदि फसल में फली छेदक कीट के रोकथाम हेतु निम्बोलियों के चूर्ण का सत या क्यूनालफास 25 ई.सी. 400 मिली या एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एस.जी. 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करेंl
मूंगफली में टिक्का रोग के नियंत्रण हेतु कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 400 ग्राम या पायिराक्लोस्ट्रोबिन 5 प्रतिशत +मेटीराम 55 प्रतिशत डब्लू. जी. 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। तोरिया में बुवाई से पूर्व कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन अवश्य करें।
What's Your Reaction?











