Lucknow : पुरातत्व अभिरूचि पाठयक्रम के तीसरे दिन 'भारतीय इतिहास में राम' पर व्याख्यान सम्पन्न
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि रामानुभूति किसी भक्ति-भावना या कर्मकांड तक सीमित न होकर एक तात्त्विक एवं भावनात्मक श्रेणी है, जो श्रीराम को आध्यात्मिक और
लखनऊ : पुरातत्त्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के तृतीय दिवस पर दो सत्रों में विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। दोनों सत्रों में अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय, अयोध्या के निदेशक एवं प्रबंधन सलाहकार डॉ0 संजीव कुमार सिंह ने क्रमशः “भारतीय इतिहास में राम” और “रामानुभूति भारतीय कला में राम” विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
डॉ0 सिंह ने अपने व्याख्यान में न केवल श्रीराम की ऐतिहासिकता को स्पष्ट किया, बल्कि भारतीय कला में उनके अंकन एवं कथानकों के माध्यम से उनके स्वरूप एवं चरित्र का भी चित्रण किया। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में प्रदर्शित अनेक पुरातात्विक प्रमाणों को दर्शाते हुए राम को अवतारी पुरुष सिद्ध किया।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि रामानुभूति किसी भक्ति-भावना या कर्मकांड तक सीमित न होकर एक तात्त्विक एवं भावनात्मक श्रेणी है, जो श्रीराम को आध्यात्मिक और अस्तित्वगत स्तर पर जोड़ती है। डॉ0 सिंह ने उल्लेख किया कि बी0बी0 लाल जी ने सर्वप्रथम साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर रामायण में वर्णित स्थलों की प्रमाणिकता की खोज कर राम की ऐतिहासिकता पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ0 सिंह के अनुसार - इतिहास में राम हमें आदर्श जीवन का मार्ग दिखाते हैं, जबकि कला में राम हमारे भाव-जगत को आलोकित करते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में श्रीराम आज भी जीवंत हैं और सदैव रहेंगे।
कार्यक्रम में रेनू द्विवेदी, निदेशक, उ0प्र0 राज्य पुरातत्त्व विभाग ने पौधा एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर डॉ0 सिंह का अभिनंदन किया तथा सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन बलिहारी सेठ, प्रकाशन सहायक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभाग के उत्खनन एवं अन्वेषण अधिकारी राम विनय, अभयराज सिंह, संतोष कुमार सिंह, अकील खान, आशीष कुमार, विभा, हिमांशु, मयंक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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