Lucknow : पहाड़पुर अब सांस लेने की जगह भी नहीं बची, जहरीली हवा में नर्क भरी जिंदगी की सांसे गिन रहे हजारों लोग

ग्रामीण बताते हैं कि ग्लूकोज फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआँ और केमिकल युक्त पानी ने पूरे इलाके को नर्क बना दिया है। दिन हो या रात, हवा में हर वक्त जलन और बद

Nov 26, 2025 - 22:57
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Lucknow : पहाड़पुर अब सांस लेने की जगह भी नहीं बची, जहरीली हवा में नर्क भरी जिंदगी की सांसे गिन रहे हजारों लोग
Lucknow : पहाड़पुर अब सांस लेने की जगह भी नहीं बची, जहरीली हवा में नर्क भरी जिंदगी की सांसे गिन रहे हजारों लोग

बीकेटी (लखनऊ)। पहाड़पुर, मोहम्मदपुर, सहपुरवा और आसपास के आधा दर्जन से अधिक गाँव पिछले दस साल से खुले गैस चैंबर में तब्दील हो चुके हैं। यहाँ की हवा इतनी जहरीली हो चुकी है कि हर साँस के साथ जहर अंदर जा रहा है। इस बार की ठंड में प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बच्चे बाहर खेल नहीं सकते, बुजुर्ग घर से निकलने में डरते हैं, और युवा भी साँस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि ग्लूकोज फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआँ और केमिकल युक्त पानी ने पूरे इलाके को नर्क बना दिया है। दिन हो या रात, हवा में हर वक्त जलन और बदबू रहती है। आँखें, गला, फेफड़े, सब जलते हैं। डॉक्टर बच्चों को खुले में खेलने से साफ मना कर रहे हैं। अस्पतालों में साँस, अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोगियों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

हवा की गुणवत्ता की बात करें तो कुछ दिन पहले पहाड़पुर दुनिया का एकमात्र ऐसा गाँव था जहाँ AQI “गंभीर प्लस” श्रेणी में पहुँच गया था। अभी भी ज्यादातर इलाकों में AQI 400 से ऊपर बना हुआ है। पीएम 2.5 का औसत 79.81 माइक्रोग्राम तक पहुँच चुका है, जबकि भारत का अपना मानक 40 और WHO का 5 है। यानी यहाँ की हवा मानक से सोलह गुना ज्यादा जहरीली है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण फेफड़ों से लेकर दिमाग तक हर अंग को नुकसान पहुँचा रहा है। डायबिटीज, हाई बीपी और हृदय रोगियों के लिए यह जानलेवा साबित हो रहा है।लोग बार-बार शिकायत कर चुके हैं, धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकला। ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार ने सारी सरकारी योजनाओं को कागजों तक सीमित कर दिया है। हर साल नई घोषणाएँ होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जे.पी. मौर्य का कहना है: “पुरुषोत्तम राम ग्लूकोज फैक्ट्री के खिलाफ शिकायत मिली थी। निरीक्षण में लैगून, बाईपास पाइप और टैंकरों से निकलने वाला दूषित पानी के नमूने लिए गए। रिपोर्ट में मानकों से कई गुना ज्यादा प्रदूषण मिला। फैक्ट्री को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और रोजाना 15,625 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति भी लगाई गई है। यदि अब भी शून्य डिस्चार्ज नहीं किया गया तो फैक्ट्री बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।”

ग्रामीणों ने कहा, “कागजी कार्रवाई सालों से चल रही है, लेकिन जहरीली हवा और पानी अब भी वही है। साफ हवा और पानी अब हमारे लिए सिर्फ एक मुहावरा बनकर रह गया है।” जब तक फैक्ट्री पर स्थायी रोक नहीं लगेगी और कड़े नियमों का ईमानदारी से पालन नहीं होगा, तब तक पहाड़पुर और आसपास के हजारों लोग इसी जहर में साँसें गिनते रहेंगे।

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