Lucknow : युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता

उन्होंने बताया कि मिशन के तहत प्रशिक्षण भागीदारों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार की संभावनाओं को बेहतर बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त एक डि

Mar 12, 2026 - 23:08
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Lucknow : युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता
Lucknow : युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता

  • कौशल केंद्रों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी: मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी
  • शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ना समय की आवश्यकता
  • समाज में श्रम और कौशल को सम्मान देने की संस्कृति विकसित करनी होगी: प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम
  • युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देना मिशन की प्राथमिकता: पुलकित खरे
  • डिजिटल लर्निंग पोर्टल से युवाओं को मिल रहे मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम: मिशन निदेशक पुलकित खरे

लखनऊ : लखनऊ में आयोजित नेशनल स्किल एंड एजुकेशन समिट – उत्तर प्रदेश का शुभारंभ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी,  मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम सहित सरकार, उद्योग, बैंकिंग, शिक्षण संस्थानों तथा कौशल विकास से जुड़े अनेक विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। होटल सेंट्रम में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश में कौशल विकास, शिक्षा और नवाचार के माध्यम से भविष्य के कार्यबल को तैयार करने पर व्यापक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को आधुनिक कौशल प्रदान कर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास केंद्रों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक मंडल में सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, पीसीएस अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और बैंकरों की एक समिति गठित की जाए जो कौशल केंद्रों का निरीक्षण कर प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करे।

अवनीश अवस्थी ने कहा कि कौशल केंद्रों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी निगरानी सार्वजनिक डोमेन के माध्यम से भी संभव हो। साथ ही सभी कौशल केंद्रों से संबंधित जानकारी जैसे पाठ्यक्रम, छात्रों की संख्या, प्रमाणपत्र और रोजगार की संभावनाएं वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि व्यवस्था अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बन सके।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में कौशल विकास के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो रहा है और लगभग 750 प्रशिक्षण भागीदार इस मिशन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जो भी नए प्रशिक्षण भागीदार मिशन से जुड़ें हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एक भव्य प्रमाणपत्र वितरण समारोह आयोजित किया जाए।

मुख्यमंत्री सलाहकार ने कहा कि प्रदेश की बड़ी युवा आबादी को कौशलयुक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने हालिया सिंगापुर और जापान दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति और उसके कौशल विकास की संभावनाओं को प्रमुखता से रखा है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में महाराणा प्रताप प्रौद्योगिकी संस्थान में लगभग 48 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जहां एआई, साइबर सुरक्षा, 3डी प्रौद्योगिकी और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केंद्र का उद्घाटन 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।

प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्रदान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहारिक रूप से लागू करने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में विकास के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है और इसके लिए उद्योग, सरकार तथा शिक्षा संस्थानों को मिलकर कार्य करना होगा।

डॉ. हरिओम ने कहा कि समाज में श्रम और कौशल को सम्मान देने की संस्कृति विकसित करनी होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई तकनीकों का उपयोग करते समय डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल कृषि क्षमता है और कृषि, उद्योग तथा सेवा क्षेत्र के बीच संतुलन बनाकर ही समग्र विकास संभव है।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि मिशन के माध्यम से 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत राज्य कौशल योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना और प्रोजेक्ट प्रवीण जैसे कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मिशन के तहत प्रशिक्षण भागीदारों के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार की संभावनाओं को बेहतर बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त एक डिजिटल लर्निंग पोर्टल भी विकसित किया गया है, जहां युवाओं को मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 30 से अधिक क्षेत्रों और लगभग 500 जॉब रोल में प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध है।

समिट के दौरान उद्योग, शिक्षा और बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीकों के क्षेत्र में नए अवसर तेजी से विकसित हो रहे हैं और युवाओं को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान डिजिटल लर्निंग पत्रिका के नवीन संस्करण का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों, उद्योगों, बैंकिंग संस्थानों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग और साझेदारी को मजबूत बनाने पर चर्चा की। समिट में सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और कौशल विकास से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और प्रदेश में कौशल विकास के सशक्त इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में विचार-विमर्श किया।

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