Lucknow : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के आसार, अब विधानसभा चुनाव के बाद ही शुरू होगी प्रक्रिया
ऐसी स्थिति में सरकार के पास प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने का ही विकल्प बचा है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा में से किसी भी दल ने अभी तक चुनाव कराने की
उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब अपने तय समय पर नहीं हो पाएंगे। माना जा रहा है कि ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों के चुनाव अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही संपन्न होंगे। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का पूरा ध्यान आने वाले विधानसभा चुनाव पर होना है। फिलहाल कोई भी राजनीतिक दल स्थानीय चुनावों की जटिलता में नहीं फंसना चाहता। प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल मई और जुलाई के मध्य समाप्त हो रहा है, जबकि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अप्रैल के मध्य में होना है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और आरक्षण की लंबी प्रक्रिया अभी बाकी है, जिससे साफ है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले नई पंचायतों का गठन संभव नहीं है।
ऐसी स्थिति में सरकार के पास प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने का ही विकल्प बचा है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा में से किसी भी दल ने अभी तक चुनाव कराने की मांग नहीं उठाई है। हालांकि, यह मामला अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां एक याचिका दायर कर समय की कमी का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची और आरक्षण प्रक्रिया में लगने वाले समय को देखते हुए चुनाव कराना मुश्किल है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी स्वीकार किया है कि मामला अदालत में है और राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि चुनाव समय पर होंगे या प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी।
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