Maha Kumbh 2025: जल साक्षरता का संदेश, गंगा की अविरलता-निर्मलता पर जागरूकता अभियान
फाउंडेशन के अध्यक्ष रामबाबू तिवारी ने कहा कि इस बार महाकुम्भ (Maha Kumbh) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत ‘एक थाली-थैला अभियान’ चलाया ...
सार-
- महाकुम्भ (Maha Kumbh) में मंगल भूमि फाउंडेशन ने जल संरक्षण और गंगा की निर्मलता को लेकर विशेष अभियान चलाया
- कुम्भ क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को जल संचयन के प्रति जागरूक किया गया
- नुक्कड़ नाटक, प्लास्टिक की बोतलें एकत्रित करना, प्रभात फेरी निकालना और छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित कर दिया जल संरक्षण का संदेश
By INA News Maha Kumbh Nagar.
महाकुम्भ (Maha Kumbh) 2025 के पावन अवसर पर जहां करोड़ों श्रद्धालु संगम में पुण्य स्नान कर रहे हैं, वहीं मंगल भूमि फाउंडेशन ने जल संरक्षण और गंगा की निर्मलता को लेकर विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत कुम्भ क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को जल संचयन के प्रति जागरूक किया गया।
- नुक्कड़ नाटक और प्रभात फेरी से दिया संदेश
मंगल भूमि फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने महाकुम्भ (Maha Kumbh) नगरी में पर्चा वितरण, नुक्कड़ नाटक, प्लास्टिक की बोतलें एकत्रित करना, प्रभात फेरी निकालना और छोटे-छोटे मंचों पर कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण का संदेश दिया।
- संस्थाओं का हरित महाकुंभ में योगदान
फाउंडेशन के अध्यक्ष रामबाबू तिवारी ने कहा कि इस बार महाकुम्भ (Maha Kumbh) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के तहत ‘एक थाली-थैला अभियान’ चलाया गया, जिससे हरित महाकुम्भ (Maha Kumbh) को सफल बनाने में बड़ी मदद मिली।
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इसी प्रकार, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने दो दिवसीय हरित महाकुम्भ (Maha Kumbh) के आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
- देशभर से 30 इंटर्न बना रहे हैं रिपोर्ट
मंगल भूमि फाउंडेशन के 30 इंटर्न अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पर्यावरण गतिविधियों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। साथ ही, वे पर्यावरण चेतना अभियान, स्वच्छता अभियान और यात्रा के माध्यम से हरित महाकुम्भ (Maha Kumbh) में अपना योगदान दे रहे हैं।
- गंगा की सहायक नदियों के संरक्षण पर बल
फाउंडेशन की इंटर्न यशी राजपूत ने कहा, "गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए हमें इसकी सहायक नदियों के संरक्षण और संवर्धन की बात करनी होगी। हर संस्था को अपने क्षेत्र की नदियों को निर्मल बनाने का संकल्प लेना चाहिए।"
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