दिल्ली पुलिस और महाराष्ट्र एटीएस का बड़ा एक्शन, मुंबई से पकड़े गए दो खतरनाक संदिग्ध आतंकी, दिल्ली पर बड़े हमले की थी तैयारी।
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ कट्टरपंथी तत्व मुंबई के विभिन्न इलाकों में छिपकर दिल्ली के खिलाफ किसी घातक
- मोसाब आदम और मोहम्मद हमद की गिरफ्तारी से टला बड़ा खतरा, राजधानी को दहलाने की थी तैयारी
- आतंकवादी समूहों के 'ऑनलाइन नेटवर्क' से जुड़े थे संदिग्ध, पूछताछ के लिए दिल्ली लाए गए दोनों आरोपी
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ कट्टरपंथी तत्व मुंबई के विभिन्न इलाकों में छिपकर दिल्ली के खिलाफ किसी घातक हमले की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महाराष्ट्र एटीएस के साथ तालमेल बिठाया और रविवार (5 अप्रैल, 2026) को मुंबई के उपनगरीय इलाकों में छापेमारी की। इस ऑपरेशन के दौरान मोसाब आदम और मोहम्मद हमद कोल्लारा को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये दोनों संदिग्ध न केवल दिल्ली की रेकी (निगरानी) कर रहे थे, बल्कि वे विस्फोटक जुटाने और स्थानीय स्तर पर स्लीपर सेल को सक्रिय करने की कोशिशों में भी शामिल थे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, ये दोनों व्यक्ति सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स के जरिए सीमा पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे। ये संदिग्ध कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे प्रतिबंधित संगठनों की विचारधारा से प्रेरित थे। पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि मोसाब और मोहम्मद 'मिशन खिलाफत' और 'सोल्जर्स ऑफ प्रॉफेट' जैसे ऑनलाइन चरमपंथी नेटवर्क का हिस्सा थे, जहाँ उन्हें कट्टरपंथी बनाने और हमले के लिए उकसाने का काम किया जा रहा था। उनके डिजिटल उपकरणों से कई ऐसे वीडियो और दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर आतंकवादी गतिविधियों और आईईडी बनाने की तकनीक से जुड़े हुए हैं।
पकड़े गए संदिग्धों की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। ये दोनों संदिग्ध 'लोन वुल्फ अटैक' या 'टॉय कार बम' (खिलौना कार में विस्फोटक) जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। उनके पास से बरामद नक्शों और डायरियों से संकेत मिलता है कि उनके निशाने पर दिल्ली के कुछ प्रमुख सरकारी कार्यालय और व्यस्त बाजार थे। गिरफ्तारी के बाद, दोनों को मुंबई की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से सुरक्षा एजेंसियों को उनकी ट्रांजिट रिमांड मिल गई है। अब उन्हें विस्तार से पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है, जहाँ स्पेशल सेल उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश करेगी।
'मिशन खिलाफत' का डिजिटल जाल
जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध 'मिशन खिलाफत' नाम के एक टेलीग्राम चैनल के जरिए विदेशों में बैठे हैंडलर्स से निर्देश प्राप्त कर रहे थे। इस चैनल का उपयोग युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें 'अदृश्य हमलावर' बनने के लिए प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस चैनल के एडमिन और अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं ताकि भविष्य के खतरों को टाला जा सके।
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पृष्ठभूमि की भी गहन जांच की जा रही है। मोहम्मद हमद कोल्लारा के बारे में जानकारी मिली है कि वह तकनीक का जानकार है और वह डार्क वेब के माध्यम से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन कर रहा था। वहीं, मोसाब आदम युवाओं को इस मॉड्यूल से जोड़ने के लिए भर्ती (Recruitment) एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मुंबई में रहने के दौरान उन्हें स्थानीय स्तर पर किसी ने रसद या वित्तीय मदद तो नहीं पहुंचाई थी। इसके अलावा, उनके बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन की जांच से यह सुराग मिलने की उम्मीद है कि वे पिछले कुछ महीनों में दिल्ली या किसी अन्य संवेदनशील शहर में कितनी बार गए थे। राजधानी दिल्ली में इस समय सुरक्षा व्यवस्था को 'हाइब्रिड मोड' पर रखा गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कार्यक्रम होने वाले हैं, जिसे देखते हुए सुरक्षा चक्र को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और हवाई अड्डों पर संदिग्धों की पहचान के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यह संयुक्त ऑपरेशन न केवल दो संदिग्धों की गिरफ्तारी है, बल्कि यह विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने की सफलता का भी प्रमाण है।
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