Mussoorie : लंढौर गुरुद्वारा का 108वां सालाना दीवान संपन्न, अंग्रेज अफसरों की श्रद्धा वाली ऐतिहासिक परंपरा

इस वर्ष का दीवान नगर कीर्तन से शुरू हुआ। कीर्तन लंढौर चौक से गांधी चौक तक निकला। पंज प्यारे की अगुवाई में शबद कीर्तन जत्थों ने प्रस्तुति दी। गुरु नानक फिफ्थ

By INA News Desk
Sep 28, 2025 - 17:29
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Mussoorie : लंढौर गुरुद्वारा का 108वां सालाना दीवान संपन्न, अंग्रेज अफसरों की श्रद्धा वाली ऐतिहासिक परंपरा
Mussoorie : लंढौर गुरुद्वारा का 108वां सालाना दीवान संपन्न, अंग्रेज अफसरों की श्रद्धा वाली ऐतिहासिक परंपरा

मसूरी के लंढौर स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा में 108वां सालाना दीवान धार्मिक भक्ति और ऐतिहासिक महत्व के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन साधारण नहीं, बल्कि स्वतंत्रता पूर्व की विरासत का हिस्सा है।1917 में स्थापित यह गुरुद्वारा सिख समुदाय का केंद्र रहा है। ब्रिटिश काल में यहां सालाना दीवान आयोजित होता था। स्थानीय लोग बताते हैं कि अंग्रेज अधिकारी विशेष निमंत्रण पर आते और गुरबाणी सुनकर सिर झुकाते थे।इस वर्ष का दीवान नगर कीर्तन से शुरू हुआ। कीर्तन लंढौर चौक से गांधी चौक तक निकला। पंज प्यारे की अगुवाई में शबद कीर्तन जत्थों ने प्रस्तुति दी। गुरु नानक फिफ्थ सेंटेनरी स्कूल के छात्रों ने बैंड बजाकर आकर्षण बढ़ाया। पूरा क्षेत्र "जो बोले सो निहाल... सत श्री अकाल" के नारों से गूंजा।जसबीर सिंह सदस्य श्री गुरु सिंह सभा मसूरी

गुरुद्वारा परिसर में विशाल लंगर लगा। सिख समुदाय के अलावा विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोग एक साथ बैठे। सभा सदस्य जगजीत कुकरेजा और जसबीर सिंह ने कहा कि यह दीवान इतिहास है।जगजीत कुकरेजा सदस्य श्री गुरु सिंह सभा मसूरी

ब्रिटिश राज से आधुनिक भारत तक यह श्रद्धा, सेवा और एकता का प्रतीक रहा है। आज भी "जो बोले सो निहाल... सत श्री अकाल" की गूंज 108 साल पुरानी परंपरा की याद दिलाती है।

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