नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 'कॉम्प्रोमाइज्ड': प्रकाश राज ने ममूटी को न मिलने पर सिस्टम पर साधा निशाना, कहा- 'फाइल्स और पाइल्स को मिल जाते हैं अवॉर्ड्स'। 

साउथ इंडियन सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनीतिक टिप्पणीकार प्रकाश राज ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ये अवॉर्ड्स

Nov 4, 2025 - 13:13
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नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 'कॉम्प्रोमाइज्ड': प्रकाश राज ने ममूटी को न मिलने पर सिस्टम पर साधा निशाना, कहा- 'फाइल्स और पाइल्स को मिल जाते हैं अवॉर्ड्स'। 
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स 'कॉम्प्रोमाइज्ड': प्रकाश राज ने ममूटी को न मिलने पर सिस्टम पर साधा निशाना, कहा- 'फाइल्स और पाइल्स को मिल जाते हैं अवॉर्ड्स'। 

साउथ इंडियन सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनीतिक टिप्पणीकार प्रकाश राज ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ये अवॉर्ड्स अब पूरी तरह से समझौता कर चुके हैं और असली कला को सम्मान देने के बजाय फाइलों और पाइलों को अवॉर्ड्स मिल जाते हैं। यह बयान केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स 2025 के ऐलान के दौरान आया, जहां मलयालम सुपरस्टार ममूटी को ब्रह्मयुगम फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। प्रकाश राज, जो इस साल केरल अवॉर्ड्स की जूरी के चेयरमैन थे, ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममूटी के नेशनल अवॉर्ड्स से बार-बार इग्नोर होने पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नेशनल अवॉर्ड्स को ममूटी जैसे कलाकार का हकदार होना ही नहीं। यह बयान सिनेमा जगत में बहस छेड़ रहा है, जहां कई लोग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

घटना 3 नवंबर 2025 को त्रिशूर में हुई। 55वें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड्स के विजेताओं का ऐलान संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने किया। जूरी चेयरमैन प्रकाश राज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममूटी को बेस्ट एक्टर अवॉर्ड देने की बात पर चर्चा की। जब पत्रकारों ने ममूटी के नेशनल अवॉर्ड्स में लगातार नजरअंदाज होने पर सवाल किया, तो प्रकाश राज ने कहा, "मैं बिना हिचक कहता हूं कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स पूरी तरह से कॉम्प्रोमाइज्ड हो चुके हैं।" उन्होंने केरल अवॉर्ड्स की तारीफ करते हुए कहा कि यहां बाहरी जूरी चेयरमैन को बुलाया गया और फैसला लेने की पूरी आजादी दी गई। कोई दखलंदाजी नहीं हुई। लेकिन नेशनल अवॉर्ड्स में ऐसा नहीं होता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "जब फाइल्स और पाइल्स को अवॉर्ड्स मिल जाते हैं, तो ऐसी जूरी और ऐसी नेशनल सरकार ममूक्का (ममूटी) को डिजर्व नहीं करती।"

प्रकाश राज का यह बयान ममूटी के लंबे करियर पर आधारित है। ममूटी ने 40 साल से ज्यादा समय से मलयालम सिनेमा को समृद्ध किया है। उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन नेशनल अवॉर्ड्स में केवल दो बार बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। पहला 1990 में मथिलुकल के लिए और दूसरा 1994 में विदेहम के लिए। हाल के सालों में उनकी फिल्में जैसे नानपकल नेराथु मायवत्तू, कानथलम और ब्रह्मयुगम जैसी कृतियों के बावजूद उन्हें इग्नोर किया गया। प्रकाश राज ने कहा कि ममूटी अब युवा कलाकारों के साथ मुकाबला कर रहे हैं। युवाओं को उनसे सीखना चाहिए, न कि अवॉर्ड्स की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ममूटी का टैलेंट अवॉर्ड्स से ऊपर है।

केरल स्टेट अवॉर्ड्स में इस साल ममूटी के अलावा शमला हमजा को बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। फिल्म मंजुमेल बॉयज ने कई अवॉर्ड्स झटके, जबकि ब्रह्मयुगम भी प्रमुख श्रेणियों में विजेता रही। जूरी में प्रकाश राज के अलावा अन्य सदस्यों ने फैसले की निष्पक्षता पर जोर दिया। प्रकाश राज ने बच्चों की फिल्मों की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस साल कोई भी फिल्म बच्चों के लिए नहीं मिली, इसलिए बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट या चाइल्ड फिल्म का अवॉर्ड नहीं दिया गया। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से अपील की कि बच्चों के लिए कंटेंट बनाएं। यह कमी समाज के लिए चिंताजनक है।

प्रकाश राज का सिनेमा के प्रति समर्पण लंबा रहा है। वे तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। सलमान खान की सुल्तान, आमिर खान की PK और रजनीकांत की कबाली जैसी बॉलीवुड फिल्मों से लेकर साउथ की ब्लॉकबस्टर्स तक उनका योगदान है। लेकिन वे सामाजिक मुद्दों पर भी मुखर रहते हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। नेशनल अवॉर्ड्स पर उनका यह हमला पहली बार नहीं। पहले भी वे सिलेक्शन प्रक्रिया की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जूरी को स्वतंत्र होना चाहिए, न कि सरकारी दबाव में काम करना। केरल अवॉर्ड्स को उन्होंने आदर्श बताया, जहां बाहरी नजर से चयन होता है।

यह बयान सिनेमा जगत में तहलका मचा रहा है। सोशल मीडिया पर FilesAndPiles ट्रेंड कर रहा है। कई यूजर्स प्रकाश राज की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि सिस्टम में सुधार की जरूरत है। ममूटी के फैंस ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अवॉर्ड्स नहीं, बल्कि ममूटी की कला ही अमर है। लेकिन कुछ ने प्रकाश राज पर राजनीतिक एंगल जोड़ दिया। चूंकि वे विपक्षी विचारधारा के हैं, तो कुछ ने इसे सरकार के खिलाफ साजिश बताया। बीजेपी समर्थक ने कहा कि नेशनल अवॉर्ड्स पारदर्शी हैं, लेकिन विपक्ष हमेशा सवाल उठाता है।

नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की प्रक्रिया पर बहस पुरानी है। 71वें नेशनल अवॉर्ड्स हाल ही में घोषित हुए थे, जहां कई विवाद हुए। सिलेक्शन में क्षेत्रीय पूर्वाग्रह के आरोप लगे। मलयालम सिनेमा को कम प्रतिनिधित्व मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जूरी में विविधता होनी चाहिए। साउथ इंडियन फिल्म आर्टिस्ट्स एसोसिएशन ने भी कई बार शिकायत की है। प्रकाश राज ने कहा कि जब फाइलें अवॉर्ड जीतती हैं, तो कलाकारों का मनोबल टूटता है। उन्होंने अपील की कि सिस्टम को साफ-सुथरा बनाएं।

ममूटी का करियर प्रेरणादायक है। वे 1953 में जन्मे और 1980 के दशक से सक्रिय हैं। मोहनलाल के साथ उनकी जोड़ी लेजेंडरी है। दोनों ने मिलकर 300 से ज्यादा फिल्में कीं। ममूटी ने कहा कि अवॉर्ड्स महत्वपूर्ण नहीं, दर्शकों का प्यार ही सब कुछ है। ब्रह्मयुगम में उनका रोल कोडुमोन पोट्टी का था, जो एक फोक हॉरर फिल्म है। निर्देशक राहुल सादसिवन ने कहा कि ममूटी का परफॉर्मेंस बेजोड़ था। जूरी ने इसे सर्वसम्मति से चुना।

प्रकाश राज ने अवॉर्ड्स के बाद अपनी आने वाली फिल्मों का जिक्र किया। वे पवन कल्याण की द वे कॉल हिम ओजी में नजर आए। जनवरी में थलपति विजय की जाना नायगन और मार्च में डकैत में काम करेंगे। लेकिन उनका फोकस सामाजिक मुद्दों पर है। उन्होंने कहा कि सिनेमा समाज का आईना है। अगर अवॉर्ड्स भ्रष्ट हैं, तो इंडस्ट्री का भविष्य खतरे में है।

यह विवाद नेशनल अवॉर्ड्स की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। सरकार ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इंडस्ट्री के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सुधार होंगे। केरल अवॉर्ड्स की सफलता से प्रेरणा लें। ममूटी जैसे कलाकारों को सम्मान मिले। प्रकाश राज का बयान एक आवाज है, जो कई कलाकारों की पीड़ा बयान करता है। सिनेमा की दुनिया में बदलाव की हवा बहेगी।

केरल स्टेट अवॉर्ड्स ने इस साल मलयालम सिनेमा को मजबूत किया। मंजुमेल बॉयज को बेस्ट पॉपुलर फिल्म मिली। ब्रह्मयुगम को बेस्ट डायलॉग्स का अवॉर्ड। प्रकाश राज ने कहा कि जूरी ने कड़ी मेहनत की। 100 से ज्यादा फिल्में देखीं। फैसला निष्पक्ष था। उन्होंने युवा निर्देशकों की तारीफ की। कहा कि नई पीढ़ी सिनेमा को नई दिशा दे रही है। लेकिन बच्चों की फिल्मों की कमी पर दुख जताया।

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