बॉर्डर 2 ने रिलीज के 12 दिनों में रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया।
फिल्म की रिलीज के बाद पहले सप्ताह में कमाई की रफ्तार काफी तेज रही जिससे यह जल्द ही बड़े आंकड़ों को पार कर गई। बारह दिनों के अंदर फिल्म ने अच्छी कुल
अनुराग सिंह के निर्देशन में बनी यह इमोशंस से भरी वॉर फिल्म भारत-पाकिस्तान के 1971 युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है जिसमें भारतीय सेना के पराक्रम को दर्शाया गया है। फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दिनों में अच्छी कमाई की जबकि अब कमाई की गति धीमी पड़ती दिख रही है फिर भी इसने कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स तोड़े हैं।
फिल्म की रिलीज के बाद पहले सप्ताह में कमाई की रफ्तार काफी तेज रही जिससे यह जल्द ही बड़े आंकड़ों को पार कर गई। बारह दिनों के अंदर फिल्म ने अच्छी कुल कमाई दर्ज की है हालांकि दूसरे सप्ताह में कमाई की गति अब कम होती दिखाई दे रही है। शुरुआती दिनों की मजबूत परफॉर्मेंस के कारण फिल्म ने कई पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया है और युद्ध फिल्मों की श्रेणी में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। कमाई में धीमापन आने के बावजूद कुल संग्रह ने फिल्म को मजबूत स्थिति प्रदान की है जहां यह पहले सप्ताह की मजबूत ओपनिंग और उसके बाद सस्टेन करने वाली कमाई के लिए जानी जा रही है। बारहवें दिन तक फिल्म की कुल घरेलू कमाई अच्छे स्तर पर पहुंच चुकी है जो शुरुआती हाइप और दर्शकों के रिस्पॉन्स को दर्शाती है। (इनसेट: फिल्म ने पहले सप्ताह में मजबूत ओपनिंग के साथ कुल कमाई में तेजी दिखाई जिससे कई रिकॉर्ड्स धराशायी हुए।) फिल्म की कमाई की गति में बदलाव दूसरे सप्ताह के वर्कडे पर स्पष्ट दिख रहा है जहां पहले दिनों की तुलना में आंकड़े कम हुए हैं लेकिन कुल मिलाकर बारह दिनों का संग्रह फिल्म को सफलता की ओर ले जा रहा है। रिलीज के समय गणतंत्र दिवस वीकेंड के साथ आने से शुरुआती फायदा मिला जिसने कमाई को बूस्ट दिया। अब धीमी रफ्तार के बावजूद फिल्म ने युद्ध फिल्मों के इतिहास में अपनी जगह बना ली है जहां बारह दिनों का प्रदर्शन उल्लेखनीय माना जा रहा है। कुल कमाई ने फिल्म को कई पुरानी रिलीज से आगे रखा है। (इनसेट: बारह दिनों बाद भी फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों को आकर्षित कर रही है।) कमाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव के बावजूद फिल्म ने रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला जारी रखा है। शुरुआती दिनों की तेज रफ्तार ने फिल्म को बड़े क्लब में शामिल किया जबकि अब स्थिरता बनाए रखते हुए आगे बढ़ रही है। यह प्रदर्शन युद्ध विधा की फिल्मों के लिए एक नया बेंचमार्क साबित हुआ है। बारह दिनों की कमाई ने दर्शकों की रुचि को साबित किया है जहां इमोशनल कंटेंट और एक्शन सिक्वेंस ने योगदान दिया। कुल मिलाकर फिल्म ने मजबूत ओपनिंग के बाद सस्टेनेबल रन दिखाया है।
वरुण धवन दिलजीत दोसांझ अहान शेट्टी और सनी देओल ने निभाए तीनों सेनाओं के प्रमुख किरदार
फिल्म में वरुण धवन ने होशियार सिंह का किरदार निभाया है जो भारतीय थल सेना में सेवारत हैं। दिलजीत दोसांझ ने निर्मलजीत सिंह की भूमिका में हैं जो भारतीय वायु सेना के पायलट हैं। अहान शेट्टी ने महेंद्र रावत का किरदार निभाया है जो भारतीय नौसेना की कमान संभालते हैं। सनी देओल ने फतेह सिंह की भूमिका में हैं जो इन तीनों के मेंटॉर हैं। ये तीनों मुख्य किरदार दोस्त हैं जिन्होंने एक ही अकैडमी से ट्रेनिंग प्राप्त की है। फिल्म में इनकी दोस्ती और अलग-अलग सेनाओं में उनकी सेवाएं दिखाई गई हैं जहां वे 1971 के युद्ध में एक साथ लड़ते हैं। होशियार सिंह थल सेना का हिस्सा हैं जबकि निर्मलजीत सिंह वायु सेना में पायलट के रूप में कार्यरत हैं और महेंद्र रावत नौसेना में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। फतेह सिंह इन युवा अधिकारियों के मार्गदर्शक हैं जो उनकी ट्रेनिंग और युद्ध की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तीनों दोस्तों की कहानी एक ही अकैडमी की ट्रेनिंग से शुरू होती है जहां उनकी दोस्ती पनपी और बाद में युद्ध में वे अलग-अलग मोर्चों पर तैनात होते हैं। सनी देओल के किरदार फतेह सिंह ने इन तीनों को मेंटॉरशिप प्रदान की है जो फिल्म की कहानी को जोड़ती है। (इनसेट: तीनों दोस्त एक ही अकैडमी से प्रशिक्षित हैं और फतेह सिंह उनके मेंटॉर हैं।) वरुण धवन का किरदार थल सेना का अधिकारी है जो युद्ध में सैनिकों का नेतृत्व करता है। दिलजीत दोसांझ का किरदार वायु सेना का पायलट है जो हवाई लड़ाई में शामिल होता है। अहान शेट्टी का किरदार नौसेना का अधिकारी है जो समुद्री मोर्चे पर तैनात है। सनी देओल का किरदार इन सभी का मार्गदर्शक है जो अनुभवी अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। फिल्म इन चारों किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है जहां उनकी दोस्ती और अलग-अलग सेनाओं में योगदान को दर्शाया गया है। तीनों दोस्तों की ट्रेनिंग एक ही जगह से हुई है जिससे उनकी बॉन्डिंग मजबूत है। फतेह सिंह इनकी ट्रेनिंग और युद्ध रणनीति में सहयोग करते हैं। (इनसेट: होशियार सिंह थलसेना में, निर्मलजीत सिंह वायुसेना पायलट, महेंद्र रावत नौसेना अधिकारी।)
1971 भारत पाकिस्तान युद्ध और ऑपरेशन चंगेज खान पर आधारित है बॉर्डर 2 की पूरी कहानी
फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित है जिसमें ऑपरेशन चंगेज खान को प्रमुखता दी गई है। यह ऑपरेशन पाकिस्तान की ओर से शुरू किया गया था जिसने युद्ध की शुरुआत की। फिल्म में युद्ध को जल थल और आकाश तीनों मोर्चों पर दिखाया गया है जहां भारतीय सेना ने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन चंगेज खान के तहत पाकिस्तान ने भारतीय ठिकानों पर हमला किया जिसका भारतीय सेना ने मुकाबला किया। फिल्म तीनों मोर्चों की लड़ाई को कवर करती है जिसमें थल सेना जमीन पर नौसेना समुद्र पर और वायु सेना हवा में लड़ती है। भारतीय सेना ने इन मोर्चों पर अपना पराक्रम दिखाया। 1971 युद्ध की कहानी में ऑपरेशन चंगेज खान एक महत्वपूर्ण घटना थी जो युद्ध की शुरुआत का संकेत थी। फिल्म इस ऑपरेशन के बाद की घटनाओं और भारतीय सेना की प्रतिक्रिया को दर्शाती है। जल मोर्चे पर नौसेना की भूमिका थल मोर्चे पर थल सेना की लड़ाई और आकाश मोर्चे पर वायु सेना की हवाई कार्रवाई को फिल्म में जगह दी गई है। तीनों दोस्त अलग-अलग मोर्चों पर तैनात हैं जहां वे युद्ध में योगदान देते हैं। फतेह सिंह इनकी अगुवाई करते हैं जो युद्ध की रणनीति में शामिल हैं। फिल्म युद्ध की इन घटनाओं को इमोशनल तरीके से पेश करती है जहां सैनिकों की बहादुरी और बलिदान दिखाया गया है। (इनसेट: फिल्म जल थल और आकाश तीनों मोर्चों की लड़ाई दर्शाती है।) ऑपरेशन चंगेज खान पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया पूर्वनियोजित हमला था जिसने 1971 युद्ध को जन्म दिया। भारतीय सेना ने इस हमले का सामना करते हुए तीनों मोर्चों पर मजबूत प्रतिरोध किया। थल सेना ने जमीन पर टैंकों और सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी वायु सेना ने हवाई हमलों को रोका और नौसेना ने समुद्री क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाई। फिल्म इन तीनों मोर्चों की कार्रवाई को एक साथ जोड़ती है जहां तीनों दोस्त अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। फतेह सिंह इनकी मेंटॉरशिप के माध्यम से युद्ध की तैयारी और लड़ाई में सहयोग करते हैं। युद्ध में भारतीय सेना ने अपनी वीरता से दुश्मन को रोका और कई रणनीतिक सफलताएं हासिल कीं। फिल्म ऑपरेशन चंगेज खान की पृष्ठभूमि में इन घटनाओं को दिखाती है जहां तीनों मोर्चों की लड़ाई एकीकृत रूप से प्रस्तुत की गई है। (इनसेट: ऑपरेशन चंगेज खान ने 1971 युद्ध की शुरुआत की।) फिल्म में युद्ध की कहानी को विस्तार से दिखाया गया है जहां तीनों सेनाओं की भूमिका अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। थल सेना की जमीन पर लड़ाई वायु सेना की हवाई सहायता और नौसेना की समुद्री कार्रवाई युद्ध की जीत में महत्वपूर्ण रही। तीनों दोस्त एक ही अकैडमी से निकले होने के कारण उनकी टीमवर्क मजबूत है जो युद्ध में काम आती है। फतेह सिंह अनुभवी मेंटॉर के रूप में इनकी मदद करते हैं और युद्ध की रणनीति तय करते हैं। ऑपरेशन चंगेज खान के बाद भारतीय सेना ने तीनों मोर्चों पर पराक्रम दिखाया जिसे फिल्म ने इमोशनल अंदाज में कैद किया है। युद्ध की इन घटनाओं ने भारतीय सेना की बहादुरी को उजागर किया। फिल्म तीनों मोर्चों की लड़ाई को एक सूत्र में पिरोती है जहां सैनिकों का बलिदान और वीरता प्रमुख है।
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