उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग की एनएफपी नेटवर्किंग मीटिंग: गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बायोमेडिकल एनर्जी को बढ़ावा। 

Lucknow: उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त जी ने प्रो वीरेन्द्र कुमार विजय, प्रोफेसर, सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी....

Aug 12, 2025 - 19:25
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उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग की एनएफपी नेटवर्किंग मीटिंग: गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बायोमेडिकल एनर्जी को बढ़ावा। 
उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग की एनएफपी नेटवर्किंग मीटिंग: गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बायोमेडिकल एनर्जी को बढ़ावा। 

Lucknow: उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त जी ने प्रो वीरेन्द्र कुमार विजय, प्रोफेसर, सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी, आईआईटी दिल्ली, बायोमेडिकल एनर्जी एवं सॉलिड टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ के साथ सह-अध्यक्षता में आयोजित एनएफपी नेटवर्किंग मीटिंग में ऑनलाइन (गूगल मीट) माध्यम से सहभागिता की। यह बैठक दिल्ली के डीडीटीसी-एआईसीटीई कार्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर से जुड़े विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बायोमेडिकल एनर्जी, सॉलिड टेक्नोलॉजी और ग्रामीण विकास में नवाचारों को प्रोत्साहित करना था। 

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अतुल सिंह, महेश शुक्ला तथा सदस्य रामकान्त उपाध्याय, राजेश सिंह सेंगर एवं दीपक गोयल भी उपस्थित रहे। सदस्यों ने आयोग की गतिविधियों, योजनाओं और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने में अपने अनुभव व सुझाव प्रस्तुत किए, जिससे बैठक के विचार-विमर्श को और अधिक सार्थक व परिणामोन्मुख दिशा मिली।

इस अवसर पर अध्यक्ष जी ने गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बायोगैस एवं पंचगव्य आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने में आयोग के प्रयासों और योजनाओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि आयोग का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ऐसा गो-आधारित टिकाऊ मॉडल स्थापित हो, जो ग्रामीण आजीविका, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तीनों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए। उन्होंने कहा कि गोपालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य की टिकाऊ अर्थव्यवस्था का आधार है। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग का लक्ष्य है कि प्रत्येक जनपद में ऐसा मॉडल विकसित हो, जो ग्रामीण आजीविका, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तीनों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए। साथ ही बैठक में तकनीकी और प्रशासनिक समन्वय, सहयोगात्मक परियोजनाओं और मिशन बायोगैस परियोजना (राज्य और केंद्र की संयुक्त वित्तीय व्यवस्था, 40-60) पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर पद्मश्री भारत भूषण त्यागी जी ने कहा कि बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित प्राकृतिक किसान, जिन्होंने 2019 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त किया और देशभर में 80,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। डॉ. रविन्द्र, केवीके, कनेरी मैथ, कोल्हापुर, जिन्होंने लखपती खेती (एक एकड़ में 188 से अधिक फसलों का उत्पादन) मॉडल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जो सीमित भूमि पर उच्च आय का मार्ग दर्शाता है। श्री रामतीर्थ श्रेष्ठ श्री लालाजी श्री. तिवारी संजय पहरिया पलिदा (झाँसी) एवं कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश इन सभी माननीय व्यक्तियों ने बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी और आयोग की योजनाओं एवं नवाचारों पर मूल्यवान सुझाव साझा किए। 

भारत भूषण त्यागी ने प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भरता और सतत खेती की दिशा में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है. और उन्होंने किसानों को उत्पादन प्रमाणीकरण-विपणन चक्र में समर्थ बनाने पर जोर दिया है। केवीके, कनेरी मैथ, में लागू लखपती खेती मॉडल ने सीमित भूमि में विविधता और उच्च लाभ की संभावना को दिखाकर ग्रामीण किसानों को प्रेरित किया है।

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