Sambhal: ODOC से नॉनवेज बाहर: AIMIM नेता का दो टूक- फैसला ठीक, लेकिन तहजीब पर चोट, कबाब-बिरयानी की पहचान पर संकट? ODOC फैसले पर उठे सवाल।
मांस महंगा होने का तर्क दिया, साथ ही सरकार पर ‘सोच थोपने’ और गंगा-जमुनी संस्कृति कमजोर करने का आरोप
उवैस दानिश, सम्भल
यूपी सरकार द्वारा ODOC (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना से मांसाहारी व्यंजनों को बाहर करने के फैसले पर AIMIM के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव सय्यद असलम का मिला-जुला बयान सामने आया है। उन्होंने एक तरफ इस कदम को “सही” बताया, वहीं दूसरी ओर इसे गंगा-जमुनी तहजीब पर चोट करार दिया।
सय्यद असलम ने कहा कि भारत दुनिया में मांस निर्यात के मामले में दूसरे स्थान पर है, जिसकी वजह से देश में मांस महंगा हो गया है और गरीबों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। इस आधार पर उन्होंने सरकार के फैसले को सही ठहराया। हालांकि, उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “सरकार अपनी सोच लोगों पर थोपना चाहती है, जो पूरी तरह गलत है।” उनका आरोप है कि यह कदम प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब को खत्म करने की कोशिश है, जहां सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते आए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सम्भल के कबाब, लखनऊ का टुंडा कबाब और बिरयानी जैसी चीजें सिर्फ खाना नहीं, बल्कि शहरों की पहचान हैं। दिलीप कुमार से लेकर सलमान खान तक यहां के जायके के दीवाने रहे हैं, जिससे इन शहरों को पहचान मिली। असलम ने यह भी कहा कि सरकार को मांसाहारी व्यंजन हटाने के बजाय मांस निर्यात पर रोक लगाने पर विचार करना चाहिए था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कत्लखानों को बंद करने की बात कही गई थी, लेकिन अब उन्हें बढ़ावा मिल रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि देश में मांस हिंदू और मुसलमान दोनों खाते हैं, किसी एक समुदाय को निशाना बनाना गलत है। आज विकास के बजाय धार्मिक भावनाओं को भड़काकर राजनीति की जा रही है, जिसकी हम निंदा करते हैं।
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