Sambhal : ध्वस्तीकरण के बाद मलबे की लूट का आरोप, कांग्रेस नेता ने CM को भेजा प्रार्थना पत्र; उच्च स्तरीय जांच की मांग

डॉ. उठवाल द्वारा गुरुवार को मुख्यमंत्री को संबोधित यह प्रार्थना पत्र प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश, उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार को डाक द्वारा प्रेषित किया गया। पत्र में कहा ग

Feb 5, 2026 - 21:25
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Sambhal : ध्वस्तीकरण के बाद मलबे की लूट का आरोप, कांग्रेस नेता ने CM को भेजा प्रार्थना पत्र; उच्च स्तरीय जांच की मांग
अमित उठावल

Report : उवैस दानिश, सम्भल

जनपद सम्भल में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई के बाद अब ध्वस्तीकरण से निकले मलबे को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस कमेटी उत्तर प्रदेश के आरटीआई उपाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार उठवाल (एडवोकेट) ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

डॉ. उठवाल द्वारा गुरुवार को मुख्यमंत्री को संबोधित यह प्रार्थना पत्र प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश, उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार को डाक द्वारा प्रेषित किया गया। पत्र में कहा गया है कि सम्भल में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया एवं पुलिस अधीक्षक के.के. विश्नोई के नेतृत्व में संयुक्त टीमों द्वारा सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर बनाए गए निजी मकान, मस्जिद, मजार और मदरसों को हटाकर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया, जो एक सराहनीय और प्रशंसनीय कदम है। हालांकि, पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ध्वस्तीकरण के बाद निकले मलबे जैसे ईंटें, खिड़की-दरवाजे, सरिया, गाटर-पट्टियां आदि की नियमानुसार नीलामी नहीं कराई गई, जबकि नीलामी से प्राप्त धनराशि को सरकारी खजाने में जमा किया जाना चाहिए था।डॉ. उठवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ पुलिस व प्रशासनिक कर्मचारियों ने उक्त मलबे को लूटकर अपने निजी उपयोग में ले लिया, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकार की निष्पक्ष छवि पर भी सवाल खड़े करता है। डॉ. उठवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को कमजोर करने वाले ऐसे कृत्य बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सरकारी संपत्ति की लूट के आरोप में FIR दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मांग का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार की निष्पक्ष नीति और पारदर्शिता को बनाए रखना है, ताकि जनता के बीच उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वसनीयता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

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