Politics News: मोदी-ट्रंप कॉल पर सियासी तूफान: जयराम रमेश का ‘ट्रिपल झटका’ आरोप, अमित मालवीय ने बताया ‘जन्मजात झूठा’।
भारत की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप...
भारत की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। रमेश ने इस बातचीत को भारत की विदेश नीति और कूटनीति में “ट्रिपल झटका” करार दिया, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के संदर्भ में। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने रमेश के आरोपों को “झूठ का पुलिंदा” बताते हुए उन्हें “जन्मजात झूठा” करार दिया। इस सियासी घमासान ने सोशल मीडिया से लेकर संसद तक चर्चा को गर्म कर दिया।
- मोदी-ट्रंप कॉल और विवाद की शुरुआत
17 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 35 मिनट की फोन कॉल पर बात की। इस बातचीत में मोदी ने ट्रंप को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी, जो 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर भारत की सैन्य कार्रवाई थी। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिन्हें उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया था।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस कॉल के बाद बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मोदी ने ट्रंप को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की “मापी गई और सटीक” कार्रवाई थी, और भारत ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ही संघर्षविराम (सीजफायर) लागू किया, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के कारण। मिस्री ने यह भी कहा कि भारत ने ट्रंप के दावों का खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम के लिए मध्यस्थता की और व्यापारिक दबाव का इस्तेमाल किया।
इसके जवाब में, कांग्रेस के संचार प्रभारी और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने 18 जून 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कॉल को “ट्रिपल झटका” करार दिया। रमेश ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर सरकार को घेरा: पहला, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में लंच, जिसे उन्होंने भारतीय कूटनीति के लिए “बड़ा झटका” बताया। दूसरा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला द्वारा पाकिस्तान को “फिनोमिनल पार्टनर” कहना, जबकि भारत इसे “आतंकवाद का गढ़” मानता है। तीसरा, ट्रंप का 14 बार यह दावा करना कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम करवाया। रमेश ने मांग की कि मोदी संसद में इस कॉल का ब्योरा दें और एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं।
- भाजपा का पलटवार: “कांग्रेस का झूठ बेनकाब”
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने रमेश के आरोपों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस “राष्ट्र विरोधी कथानक” को बढ़ावा दे रही है। मालवीय ने रमेश को “जन्मजात झूठा” और “राहुल गांधी की तरह फर्जीवाड़ा करने वाला” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि रमेश ने जनवरी 2025 के एक पुराने अमेरिकी बयान को हाल की कॉल से जोड़कर भ्रामक दावे किए, जबकि इस कॉल पर कोई आधिकारिक अमेरिकी बयान जारी नहीं हुआ था। मालवीय ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को स्पष्ट रूप से बता दिया कि भारत न तो तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार करता है और न ही इसकी जरूरत है।”
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस फर्जी खबरों की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता और फैलाने वाली है।” उन्होंने कांग्रेस को “पाकिस्तानी नेशनल कांग्रेस” कहकर तंज कसा और कहा कि वह भारत की मजबूत विदेश नीति को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
- ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर का नामकरण भी इस विवाद में चर्चा का केंद्र रहा। पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या के बाद, जिसमें आतंकियों ने लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया, भारत ने जवाबी कार्रवाई के लिए इस ऑपरेशन को शुरू किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसका नाम “सिंदूर” रखा, जो हिंदू परंपरा में विवाह और सुहाग का प्रतीक है। इस हमले में कई नवविवाहित महिलाओं ने अपने पतियों को खोया, जिनके चूड़े और मंगलसूत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें 9 आतंकी शिविर और 11 पाकिस्तानी हवाई ठिकाने नष्ट किए गए। भारतीय सेना ने इसे “मापी गई और गैर-उत्तेजक” कार्रवाई बताया। हालांकि, इस ऑपरेशन में भारत के पांच सैनिक भी शहीद हुए।
- जयराम रमेश के आरोप: “ट्रिपल झटका” का आधार
जयराम रमेश ने अपने “ट्रिपल झटका” के दावे को तीन बिंदुओं पर केंद्रित किया। पहला, जनरल असीम मुनीर का ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में लंच, जिसके बारे में रमेश ने सवाल उठाया कि क्या यही कारण था कि ट्रंप ने जी7 शिखर सम्मेलन से जल्दी विदा लिया। रमेश ने कहा कि मुनीर की भड़काऊ टिप्पणियां, जिसमें उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की “जुगुलर वेन” बताया, पहलगाम हमले को प्रेरित करने वाली थीं।
दूसरा, रमेश ने अमेरिकी जनरल माइकल कुरिल्ला के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को “फिनोमिनल पार्टनर” कहा। रमेश ने इसे भारत के लिए अपमानजनक बताया, क्योंकि भारत ने हमेशा पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थक माना है। तीसरा, रमेश ने ट्रंप के बार-बार यह दावा करने पर सवाल उठाया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम करवाया, जबकि भारत ने इसे साफ तौर पर खारिज किया। रमेश ने मांग की कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दे और सर्वदलीय बैठक बुलाए।
इस विवाद ने सोशल मीडिया, खासकर X, पर खूब चर्चा बटोरी। @thefederal_desh ने ट्वीट किया, “मोदी-ट्रंप फोन कॉल से सियासी हलचल: कांग्रेस ने बताया ‘ट्रिपल झटका’, BJP का पलटवार।” @its_Mdhaka ने लिखा, “जयराम रमेश फिर झूठे साबित हुए।” वहीं, @ShyamDatt_C ने रमेश के पुराने बयान का हवाला देते हुए उनकी आलोचना की।
कई यूजर्स ने कांग्रेस के दावों को “राष्ट्र विरोधी” करार दिया, जबकि कुछ ने रमेश की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। @AHindinews ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हवाले से लिखा कि कांग्रेस के झूठ रोज उजागर हो रहे हैं।
यह विवाद भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” की नीति को मजबूत किया। ट्रंप के मध्यस्थता के दावों और मुनीर के साथ उनकी मुलाकात ने भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती पेश की। रमेश ने इसे भारतीय कूटनीति की असफलता बताया, जबकि भाजपा ने इसे भारत की मजबूत स्थिति का सबूत माना।
कांग्रेस की मांग है कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करे और ट्रंप के दावों का खुलकर खंडन करे। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की आलोचना “पाकिस्तान की भाषा” बोलने जैसी है।
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