माफिया अतीक का नाम लेना आखिर क्यों पड़ा विधायक पूजा पाल को इतना भारी, सपा से बाहर होने के बाद अखिलेश यादव पर साधा निशाना। 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 14 अगस्त 2025 को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी (सपा) ने कौशांबी जिले की चायल विधानसभा....

Aug 18, 2025 - 16:07
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माफिया अतीक का नाम लेना आखिर क्यों पड़ा विधायक पूजा पाल को इतना भारी, सपा से बाहर होने के बाद अखिलेश यादव पर साधा निशाना। 
माफिया अतीक का नाम लेना आखिर क्यों पड़ा विधायक पूजा पाल को इतना भारी, सपा से बाहर होने के बाद अखिलेश यादव पर साधा निशाना। 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 14 अगस्त 2025 को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी (सपा) ने कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से अपनी विधायक पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। पूजा पाल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध विरोधी नीतियों और माफिया अतीक अहमद के खिलाफ कार्रवाई की तारीफ की थी। इसके कुछ ही घंटों बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया। पूजा पाल ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि अतीक अहमद का नाम सदन में लेने की वजह से उन्हें निष्कासित किया गया।

पूजा पाल का राजनीतिक और व्यक्तिगत इतिहास इस मामले को और गंभीर बनाता है। उनके पति राजू पाल, जो 2005 में बसपा के विधायक थे, की प्रयागराज में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम सामने आया था। शादी के मात्र नौ दिन बाद हुई इस घटना ने पूजा पाल के जीवन को बदल दिया। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2007 में पहली बार विधायक चुनी गईं। 2012 में उन्होंने अतीक अहमद को चुनाव में हराया, लेकिन 2017 में हार का सामना करना पड़ा। 2022 में सपा के टिकट पर वह फिर से चायल से विधायक बनीं। पूजा ने विधानसभा में कहा कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने अतीक और अशरफ को मिट्टी में मिलाया, जिससे उन्हें और कई पीड़ित परिवारों को न्याय मिला।

सदन में पूजा पाल ने अपने भाषण के दौरान भावुक होकर कहा, “मैंने अपना पति खोया है, सभी जानते हैं कि उनकी हत्या कैसे और किसने की। मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मेरे छिपे आंसुओं को देखा और मुझे न्याय दिलाया।” उनके इस बयान को लेकर सपा नेतृत्व नाराज हो गया। सपा ने अपने पत्र में कहा कि पूजा ने पार्टी विरोधी गतिविधियां कीं और बार-बार चेतावनी के बावजूद अनुशासनहीनता दिखाई, जिसके चलते उन्हें पार्टी से निकाला गया। पूजा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने केवल सच बोला और अपने समाज व पीड़ितों की आवाज उठाई। उन्होंने सपा पर अपराधियों के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया और कहा कि अखिलेश यादव से उन्हें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन योगी सरकार ने यह काम किया।

इस निष्कासन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी ने इसे सपा की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति से जोड़ा और कहा कि अखिलेश यादव अपराधियों के पक्ष में खड़े हैं। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहना हर नेता का धर्म है। उन्होंने पूजा पाल को अपराध की भुक्तभोगी बताते हुए कहा कि योगी सरकार ने उनके पति के हत्यारों को सजा दिलाई, जिसकी तारीफ करना उनका हक था। बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने सपा पर पिछड़े वर्ग की महिला का अपमान करने का आरोप लगाया। वहीं, सपा का कहना है कि पूजा का बयान पार्टी की विचारधारा के खिलाफ था। इस घटना ने सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे को भी निशाने पर ला दिया है।

पूजा पाल के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं, क्योंकि उन्होंने पहले भी 2023 के राज्यसभा उपचुनाव और 2024 के विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी का समर्थन किया था। हालांकि, पूजा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका अभी किसी पार्टी में शामिल होने का इरादा नहीं है। वह अपने पाल समाज और पिछड़े वर्ग के हितों के लिए काम करती रहेंगी। फिलहाल, वह विधायक के रूप में अनटैच्ड श्रेणी में रह सकती हैं, जैसा कि पहले निष्कासित सपा विधायकों के साथ हुआ था।

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