ऑपरेशन सिंदूर पर प्रणीति शिंदे का तीखा हमला, संसद में सरकार की पारदर्शिता पर उठाए सवाल, कहा- यह एक ‘मीडिया तमाशा’ था।
Maharashtra: लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। महाराष्ट्र....
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। महाराष्ट्र के सोलापुर से पहली बार सांसद बनीं प्रणीति, जो पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी हैं, ने ऑपरेशन सिंदूर को सरकार द्वारा “मीडिया में तमाशा” करार दिया। उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई की पारदर्शिता और उपलब्धियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि कितने आतंकवादी पकड़े गए, कितने लड़ाकू विमान खोए गए, और इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी किसकी थी। उनके इस बयान ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर सेना का अपमान करने और पाकिस्तान को “क्लीन चिट” देने का आरोप लगाया। प्रणीति के “तमाशा” शब्द को लोकसभा की आधिकारिक कार्यवाही से हटा दिया गया। यह विवाद संसद के मॉनसून सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर चर्चा को और गर्म करने वाला साबित हुआ।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में बैसरण घाटी में एक भीषण आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे। एक स्थानीय मुस्लिम और एक ईसाई पर्यटक भी इस हमले में शिकार हुए। चार से पांच हमलावरों ने एम4 कार्बाइन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। इस हमले की जिम्मेदारी शुरुआत में द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी संगठन है, ने ली, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया। भारतीय जांच एजेंसियों ने दावा किया कि हमलावर पाकिस्तानी थे और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा इस हमले के पीछे थे।
इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, और यह एक सफल सैन्य कार्रवाई थी। 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम समझौता हुआ, जिसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता का दावा किया, हालांकि भारत ने इसे खारिज कर दिया।
- प्रणीति शिंदे का बयान
लोकसभा में 27 जुलाई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर पर 16 घंटे की चर्चा के दौरान प्रणीति शिंदे ने सरकार की रणनीति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर नाम से देशभक्ति का लगता है, लेकिन यह सरकार द्वारा मीडिया में किया गया एक तमाशा था। कोई नहीं बता रहा कि इस ऑपरेशन में क्या हासिल हुआ। कितने आतंकवादी पकड़े गए? कितने लड़ाकू विमान खोए गए? इसकी जिम्मेदारी किसकी है, और गलती किसकी थी? सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।”
प्रणीति ने ऑपरेशन को प्राचीन रोम के कोलोसियम से जोड़ा, जहां जनता का ध्यान समस्याओं से हटाने के लिए खेल और मनोरंजन का आयोजन किया जाता था। उन्होंने कहा, “यह सरकार भी ऐसा ही कर रही है। चुनाव से पहले आतंकी हमला होता है, और सरकार पड़ोसी देश पर हमला करके वोट हासिल करती है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सवालों से भाग रही है और जवाबदेही से बच रही है। प्रणीति ने विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत की “पड़ोस पहले” नीति कमजोर हो गई है, और युद्धविराम की जानकारी सैनिकों को अपने प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि एक विदेशी नेता से मिली, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया।
प्रणीति के “तमाशा” शब्द ने संसद में हंगामा खड़ा कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने इस शब्द को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया, क्योंकि इसे अनुचित माना गया। बीजेपी नेताओं ने प्रणीति पर सेना का अपमान करने और पाकिस्तान का बचाव करने का आरोप लगाया। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीया ने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर को तमाशा कहकर सेना का अपमान किया। यह उनका असली चेहरा है।” बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “पाकिस्तान का पुराना नारा ‘हजार घावों से भारत को कमजोर करना’ ऑपरेशन सिंदूर में नाकाम रहा। कांग्रेस को यह बात याद रखनी चाहिए।”
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने प्रणीति के बयान का जवाब देते हुए कहा, “यह नया भारत है। हम आतंकी हमले के बाद मोमबत्तियां नहीं जलाते, बल्कि दुश्मनों की चिता जलाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रणीति और पाकिस्तान की संसद में एक नेता (बिलावल भुट्टो) एक ही सवाल उठा रहे हैं, जो हैरान करने वाला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के सवालों को गलत करार देते हुए कहा, “विपक्ष को पूछना चाहिए कि क्या आतंकी ठिकाने नष्ट हुए? जवाब है हां। क्या ऑपरेशन सफल रहा? जवाब है हां। क्या हमारे सैनिक सुरक्षित रहे? जवाब है हां, कोई सैनिक हानि नहीं हुई।”
पहलगाम हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई थी। एनआईए ने दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया, जो हमलावरों की मदद करने के आरोपी हैं। जांच में तीन आतंकवादियों—हाशिम मूसा, अली भाई उर्फ तल्हा भाई, और आदिल हुसैन ठोकर—के नाम सामने आए हैं, जिनमें से दो को पाकिस्तानी बताया गया। हालांकि, एनआईए ने अभी तक हमलावरों की पहचान पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन स्केच जारी किए, जिन्हें बाद में गलत बताया गया। एनआईए ने 2000 से अधिक ओवर ग्राउंड वर्कर्स से पूछताछ की, और 15 पर गहन जांच चल रही है।
विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान पर कहा कि अमेरिका की भूमिका को स्पष्ट नहीं किया गया। एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुळे ने कहा कि जब तक हमलावर पकड़े नहीं जाते, ऑपरेशन को सफल नहीं माना जा सकता। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने हमले से पहले दुश्मन को चेतावनी दी, जिससे भारतीय विमान खोए गए।
सरकार ने इन सवालों को खारिज करते हुए ऑपरेशन को पूरी तरह सफल बताया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने कहा कि नौ आतंकी ठिकाने नष्ट किए गए। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आतंकवादियों को प्रॉक्सी नहीं माना जाएगा, और सीमा पार आतंकवाद का जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन की सराहना करते हुए इसे स्वदेशी हथियारों की ताकत का सबूत बताया।
प्रणीति के बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं बटोरीं। एक एक्स उपयोगकर्ता ने लिखा, “प्रणीति शिंदे ने ऑपरेशन सिंदूर को तमाशा कहकर सेना का अपमान किया।” एक अन्य ने कहा, “प्रणीति और पाकिस्तान के भुट्टो एक ही सवाल उठा रहे हैं। यह संदिग्ध है।” हालांकि, कुछ लोगों ने उनके सवालों को जायज ठहराया, जैसे एक यूजर ने लिखा, “प्रणीति ने पारदर्शिता की मांग की। सरकार को जवाब देना चाहिए।”
प्रणीति शिंदे सोलापुर, महाराष्ट्र से पहली बार लोकसभा सांसद चुनी गई हैं। उनके पिता सुशील कुमार शिंदे 2009-2014 तक केंद्रीय गृह मंत्री रहे। प्रणीति ने सामाजिक कार्यों में रुचि दिखाई है और कांग्रेस की युवा शाखा में सक्रिय रही हैं। उनके इस बयान ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया, लेकिन विवाद के कारण उनकी छवि पर भी असर पड़ा।
प्रणीति का बयान संसद के मॉनसून सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा को और गर्म करने वाला साबित हुआ। विपक्ष ने इसे जवाबदेही की मांग बताया, जबकि बीजेपी ने इसे सेना का अपमान और पाकिस्तान का समर्थन करार दिया। यह विवाद पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर की जांच में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। एनआईए की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, और हमलावरों की पहचान पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
प्रणीति शिंदे ने ऑपरेशन सिंदूर को “मीडिया तमाशा” कहकर सरकार की रणनीति और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। उनके बयान ने संसद में हंगामा मचाया और बीजेपी ने इसे सेना का अपमान बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य नेताओं ने ऑपरेशन को सफल बताते हुए विपक्ष के सवालों को गलत ठहराया। यह विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर सरकार और विपक्ष के बीच गहरे मतभेदों को दर्शाता है। एनआईए की जांच और संसद की चर्चा से इस मामले में और स्पष्टता की उम्मीद है।
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