पहलगाम हमले पर पी. चिदंबरम का विवादास्पद बयान- कैसे पता कि आतंकवादी पाकिस्तान से आये थे? बीजेपी ने लगाया क्लीन चिट देने का आरोप। 

Political News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने 27 जुलाई 2025 को एक साक्षात्कार में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए ....

Jul 29, 2025 - 15:01
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पहलगाम हमले पर पी. चिदंबरम का विवादास्पद बयान- कैसे पता कि आतंकवादी पाकिस्तान से आये थे? बीजेपी ने लगाया क्लीन चिट देने का आरोप। 
पहलगाम हमले पर पी. चिदंबरम का विवादास्पद बयान- कैसे पता कि आतंकवादी पाकिस्तान से आये थे? बीजेपी ने लगाया क्लीन चिट देने का आरोप। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने 27 जुलाई 2025 को एक साक्षात्कार में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हमलावरों की पहचान हुई है या नहीं, और यह मान लेना गलत है कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे, क्योंकि इसके कोई ठोस सबूत नहीं हैं। चिदंबरम ने यह भी सुझाव दिया कि हमलावर देश के अंदर के आतंकवादी हो सकते हैं। इस बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन पर पाकिस्तान को "क्लीन चिट" देने का आरोप लगाया।

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में बैसरण घाटी में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे। एक स्थानीय मुस्लिम और एक ईसाई पर्यटक भी इस हमले में मारे गए। हमलावरों, जिनकी संख्या चार से पांच बताई गई, ने एम4 कार्बाइन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। यह हमला 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे घातक हमला माना जा रहा है। शुरुआत में, द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), जो लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक सहयोगी संगठन है, ने हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन बाद में इसे खारिज कर दिया। भारतीय जांच एजेंसियों ने हमले के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा का हाथ होने का दावा किया, जिसमें हमलावरों को पाकिस्तानी नागरिक बताया गया।

  • चिदंबरम का बयान और विवाद

27 जुलाई 2025 को द क्विंट को दिए एक साक्षात्कार में पी. चिदंबरम ने पहलगाम हमले की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "सरकार यह बताने को तैयार नहीं है कि एनआईए ने इन हफ्तों में क्या किया। क्या उन्होंने आतंकवादियों की पहचान की? वे कहां से आए थे? क्या पता, वे देश के अंदर के आतंकवादी हों। आप यह क्यों मान रहे हैं कि वे पाकिस्तान से आए थे? इसका कोई सबूत नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई रणनीतिक गलतियों और नुकसान को छिपा रही है। चिदंबरम ने पूछा कि हमलावरों को अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया और उनकी पहचान क्यों नहीं की गई।

इस बयान ने बीजेपी को हमला करने का मौका दे दिया। बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीया ने एक्स पर लिखा, "कांग्रेस ने एक बार फिर पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी। जब भी हमारी सेनाएं पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का सामना करती हैं, कांग्रेस नेता इस्लामाबाद के वकील की तरह बात करते हैं।" उन्होंने चिदंबरम को "सैफ्रन टेरर" सिद्धांत का प्रणेता बताते हुए उनकी आलोचना की। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कहा कि कांग्रेस ने 26/11 हमले से लेकर पहलगाम तक हमेशा पाकिस्तान का बचाव किया है।

चिदंबरम ने जवाब में कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "कुछ लोग पूरे साक्षात्कार को दबाकर दो वाक्यों को चुन लेते हैं और वक्ता को गलत रंग में पेश करते हैं।" उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने भी लोगों से पूरा साक्षात्कार देखने की अपील की।

  • एनआईए की जांच

पहलगाम हमले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी। 23 अप्रैल 2025 से एनआईए की टीमें हमले की जगह पर मौजूद थीं और सबूत इकट्ठा कर रही थीं। एजेंसी ने दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया, जो हमलावरों को सहायता देने के आरोपी हैं। एनआईए ने दावा किया कि हमलावर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे, लेकिन अभी तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

जांच में तीन आतंकवादियों—हाशिम मूसा, अली भाई उर्फ तल्हा भाई, और आदिल हुसैन ठोकर—के नाम सामने आए हैं। हाशिम मूसा और तल्हा भाई को पाकिस्तानी बताया गया, जबकि आदिल हुसैन ठोकर स्थानीय आतंकवादी है। हाशिम मूसा, जो लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख कमांडर है, दक्षिण कश्मीर के जंगलों में छिपा हुआ माना जा रहा है। एनआईए ने 2000 से अधिक ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) से पूछताछ की है, जिनमें से 15 पर गहन जांच चल रही है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हमलावरों की पहचान के लिए तीन स्केच जारी किए, लेकिन बाद में एनआईए ने इन्हें गलत बताया। पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा भी की। खुफिया एजेंसियों ने हमले के डिजिटल निशान मुजफ्फराबाद और कराची के सुरक्षित ठिकानों तक ट्रेस किए, जिससे पाकिस्तान की संलिप्तता का दावा किया गया।

  • बीजेपी और विपक्ष की प्रतिक्रिया

बीजेपी नेताओं ने चिदंबरम के बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ बताया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "जब भी पाकिस्तान और आतंकवाद की बात आती है, कांग्रेस पाकिस्तान का बचाव करती है।" बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने इसे "सबसे बड़ा झूठ" करार दिया, जबकि पूर्व महाराष्ट्र मंत्री राज पुरोहित ने मजाक में कहा, "अगर हमलावर पाकिस्तानी नहीं थे, तो शायद वे कांग्रेसी थे।"

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चिदंबरम का समर्थन करते हुए बीजेपी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ही सीजफायर समझौते के जरिए पाकिस्तान को क्लीन चिट दी। दूसरी ओर, राकांपा (एसपी) के नेता अमर शरदराव काले ने चिदंबरम के बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि पाकिस्तान की भूमिका स्पष्ट है।

  • पाकिस्तान का रुख

पाकिस्तान ने पहलगाम हमले की निंदा की थी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को जांच में सहयोग की पेशकश की थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले को स्थानीय विद्रोह बताया और इसे भारत द्वारा आयोजित झूठा ऑपरेशन करार दिया। पाकिस्तानी सीनेटर शेरी रहमान ने भी कहा कि भारत ने हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं दिए।

चिदंबरम का बयान संसद में 28 जुलाई 2025 को शुरू हुई ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर 16 घंटे की चर्चा से ठीक पहले आया, जिसने इसे और विवादास्पद बना दिया। सोशल मीडिया पर भी इस बयान ने हलचल मचाई। एक एक्स उपयोगकर्ता ने लिखा, "चिदंबरम ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी, जबकि एनआईए ने हमलावरों को पाकिस्तानी बताया है।" एक अन्य यूजर ने कहा, "कांग्रेस हमेशा सबूत मांगती है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन नहीं करती।"

कुछ लोगों ने चिदंबरम के बयान को तथ्यों पर आधारित सवाल बताया, जो सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। एक यूजर ने लिखा, "चिदंबरम ने सही सवाल उठाया। बिना सबूत के पाकिस्तान को दोष देना गलत है।" हालांकि, ज्यादातर पोस्ट में बीजेपी समर्थकों ने चिदंबर baterdastian and their families.

यह हमला उस समय हुआ जब कश्मीर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही थी। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाया और कई कदम उठाए, जैसे पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना और यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगाना। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने सैन्य कार्रवाई की, लेकिन चिदंबरम ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

एनआईए की जांच में कुछ प्रगति हुई है, जैसे दो स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी और तीन आतंकवादियों की पहचान, लेकिन ठोस सबूतों का अभाव एक मुद्दा बना हुआ है। चिदंबरम के सवालों ने इस कमी को उजागर किया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने स्थानीय लोगों पर सामूहिक कार्रवाई की आलोचना की, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण बताया।

पी. चिदंबरम के बयान ने पहलगाम हमले और एनआईए की जांच पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां बीजेपी ने इसे पाकिस्तान को क्लीन चिट देने वाला बयान बताया, वहीं चिदंबरम ने इसे पारदर्शिता की मांग करार दिया। एनआईए ने हमलावरों को पाकिस्तानी नागरिक बताया है, लेकिन उनकी पहचान और ठोस सबूत अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

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