Prayagraj : वाल्मीकि ने रामायण गायन से लोक कल्याण का नया विमर्श शुरू किया
प्रयागराज में रामायण मेला के दूसरे दिन कटरा रामलीला कमेटी परिसर में शोध संगोष्ठी आयोजित हुई। विद्वानों ने रामायण के लोक कल्याणकारी महत्व पर विचार रखे। मुख्य अतिथि मुरार जी त्रिपाठी ने कहा कि रामायण विश्व का आदि काव्य है और वाल्मीकि आदिकवि हैं। उन्होंने बताया कि रामराज्य की संकल्पना सबसे पहले वाल्मीकि ने प्रस्तुत की। रामदरबार में लव-कुश द्वारा रामायण का गान सुनाकर सीता के विरुद्ध चल रहे लोकापवाद को समाप्त किया गया, जिससे श्रद्धा के भाव बने और लोक कल्याण का नया विमर्श शुरू हुआ।
मुरार जी त्रिपाठी ने जोर दिया कि रामायण में लोकतंत्र का बीज मौजूद है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उन्होंने आसुरी प्रवृत्तियों पर विजय के लिए समाज की सबसे निचली इकाई में रहने वालों का आत्मविश्वास जगाया और अन्याय-अनीति के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा दी, जिससे रावण जैसे राक्षस का अंत संभव हुआ। उन्होंने कहा कि रामायण राजनीति का विश्व कोष है। वाल्मीकि समग्र राष्ट्र के हित चिंतक कवि हैं। राजा राष्ट्रधर्म और सत्य का उद्गम स्थल है। उसके बिना राष्ट्र का मंगल या कल्याण संभव नहीं। वाल्मीकि ने सबसे पहले राष्ट्रीयता की भावना जगाई और जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी का उद्घोष किया।
अमेठी से आए अर्जुन प्रसाद पांडेय ने अवधी और रामचरितमानस पर व्याख्यान दिया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष सूर्यकांत त्रिपाठी ने माता सीता के आदर्श व्यक्तित्व पर प्रवचन दिया। सुल्तानपुर से आए कृष्णमणि चतुर्वेदी मैत्रेय ने गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान को लेकर फैली भ्रांतियों का खंडन किया। बाराबंकी के ओम मिश्र ने कहा कि तुलसीदास की एक चौपाई से धर्मांतरण रोकने में मदद मिली है। संगोष्ठी के अध्यक्ष अनुज प्रताप सिंह ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की कालजयी रचनाओं से हिंदी साहित्य समृद्ध हुआ और समाज की चिंतन धारा बदली। रामायण मेले से सनातन धर्म और संस्कृति की जड़ें मजबूत हुई हैं।
संगोष्ठी का संचालन रामायण मेला समिति के महामंत्री शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मुरार जी त्रिपाठी और अध्यक्ष अनुज प्रताप सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन तथा श्रीराम की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। आयोजक मंडल की सदस्य रंजना मिश्रा ने सभी विद्वानों को प्रशस्ति पत्र और पुस्तकें देकर सम्मानित किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मेले में रामायण प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के 15 छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। संत समागम में कई संतों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। विराट कवि सम्मेलन में 32 रचनाकारों ने अपनी कविताएं सुनाकर श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी।
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