Sambhal: एमजीएम कॉलेज में प्रो. आबिद हुसैन हैदरी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक का विमोचन। 

एमजीएम कॉलेज के कॉन्फ्रेंस रूम में उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी पर लिखी गई एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक

Dec 18, 2025 - 16:58
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Sambhal: एमजीएम कॉलेज में प्रो. आबिद हुसैन हैदरी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक का विमोचन। 
एमजीएम कॉलेज में प्रो. आबिद हुसैन हैदरी पर लिखी गई आलोचनात्मक पुस्तक का विमोचन। 

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल: गुरुवार को एमजीएम कॉलेज के कॉन्फ्रेंस रूम में उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी पर लिखी गई एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक एवं शोधपरक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक प्रोफेसर अब्बास रज़ा नैय्यर द्वारा लिखी गई है, जो उनकी 51वीं कृति है। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और शोध जगत से जुड़े अनेक विद्वान एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए प्रोफेसर अब्बास रज़ा नैय्यर ने कहा कि यह 464 पृष्ठों की एक विस्तृत शोधात्मक और आलोचनात्मक किताब है, जिसमें प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी के उर्दू साहित्य में किए गए योगदान का गहन अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से मरसिये के क्षेत्र में उनके कार्य, उनकी आलोचनात्मक दृष्टि, नज़रिया और थ्योरी को इस पुस्तक में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी साहित्यकार या आलोचक के काम को समझने के लिए उसकी अमली तनक़ीद और नुक्ता-ए-नज़र को जानना बेहद ज़रूरी होता है। प्रोफेसर नैय्यर ने अपने वक्तव्य में मीर तक़ी मीर के एक शेर का उल्लेख करते हुए यह भी बताया कि किस तरह समय के साथ पाठ की गलतियां, कातिब की भूल या छपाई की त्रुटियां पीढ़ियों तक चली आती हैं और अर्थ का अनर्थ कर देती हैं। उन्होंने कहा कि शेर सुने नहीं, पढ़े जाते हैं और साहित्य को सही रूप में समझने के लिए जरूरी है कि किसी विद्वान के जीवनकाल में ही उसके काम को संकलित कर उस पर किताबें लिखी जाएं, ताकि भविष्य में भ्रम और मतभेद की गुंजाइश कम हो सके। उन्होंने कहा कि हमारा समाज अक्सर “मुर्दा-परस्त” कहलाता है, जहां किसी व्यक्ति के जीवित रहते उसके काम को वह महत्व नहीं दिया जाता, जिसका वह हकदार होता है। लेकिन जब किसी विद्वान की सोच, थ्योरी और नुक्ता-ए-नज़र पूरी तरह स्थापित हो जाए, तो उसके जीवनकाल में ही उस पर गंभीर अध्ययन और लेखन होना चाहिए। इसी भावना के तहत उन्होंने प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी पर यह पुस्तक लिखी, क्योंकि मरसिये के क्षेत्र में उन्होंने एक स्पष्ट और सशक्त थ्योरी प्रस्तुत की थी। कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी एमजीएम कॉलेज सम्भल के प्रिंसिपल रह चुके हैं और शिक्षा तथा साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर योगेंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन शफीकुर्रहमान बरकाती ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर असलम (जमशेदपुर) मौजूद रहे और मुख्य अतिथि प्रोफेसर नाशिर नकवी रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. मिस्बाह अहमद सिद्दीकी, डॉ. मोहम्मद आसिफ हुसैन, डॉ. मोहम्मद तारिक, डॉ. नसीमउज्जफ्फर, डॉ. किश्वर जहां जैदी, तनवीर हुसैन अशरफी, डॉ. रियाज अनवर, डॉ. नवेद अहमद खान और डॉ. मोहम्मद इमरान खान शामिल रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में साहित्य प्रेमी, शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे।

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