Sambhal : संभल के भगवंतपुर देवी मंदिर पर 101 दिनों का धरना समाप्त, मंत्री गुलाब देवी की मध्यस्थता से कोर्ट फैसले पर सहमति
भगवंतपुर देवी मंदिर संभल जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना है। यहां हर साल कार्तिक मास में बड़ा मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते
रिपोर्ट : उवैस दानिश, सम्भल
संभल। बहजोई क्षेत्र के प्राचीन सिद्धपीठ भगवंतपुर देवी मंदिर पर मेला स्थल की जमीन पर विवाद को लेकर चल रहा 101 दिनों का धरना समाप्त हो गया। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। विवाद मंदिर कमेटी और नगर पालिका के बीच था, जहां वंदन योजना के दो करोड़ रुपये से मेला की जमीन पर सत्संग भवन बनाए जाने का प्रयास हो रहा था। मंत्री ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बातचीत कराई, जिसमें कोर्ट के फैसले को मानने, मंदिर को दिए गए पैसे को मेला स्थल पर न लगाने और मंदिर तथा मेला की जमीन को अलग-अलग मानने पर सहमति बनी। गुलाब देवी ने सभी पक्षों को अपना बताते हुए विवाद समाप्त करा दिया और नगर पालिका को अपनी जिम्मेदारियों की सीमा भी बता दी।
भगवंतपुर देवी मंदिर संभल जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो सैकड़ों वर्ष पुराना है। यहां हर साल कार्तिक मास में बड़ा मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब नगर पालिका ने वंदन योजना के तहत मेला स्थल की जमीन पर सत्संग भवन बनाने का काम शुरू किया। मंदिर कमेटी का कहना था कि यह जमीन मंदिर की संपत्ति का हिस्सा है और बिना सहमति के निर्माण अवैध है। कमेटी ने विरोध में मंदिर परिसर में धरना शुरू कर दिया, जो 101 दिनों तक चला। इस दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर में पूजा-अर्चना करने में असुविधा हुई और मेला आयोजन प्रभावित रहा। धरने में मंदिर कमेटी के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मंत्री गुलाब देवी के हस्तक्षेप से बातचीत की गई। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी। गुलाब देवी ने कहा कि मंदिर और मेला दोनों संभल की धरोहर हैं और विवाद से इनकी गरिमा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट का फैसला अंतिम होगा और सभी पक्ष इसे मानेंगे। इसके अलावा, मंदिर को वंदन योजना के तहत दिए गए दो करोड़ रुपये को मेला स्थल पर सत्संग भवन के निर्माण में न लगाने पर सहमति बनी। इसके बजाय यह धनराशि मंदिर की मरम्मत या अन्य धार्मिक कार्यों में उपयोग होगी। मंदिर की जमीन और मेला स्थल को स्पष्ट रूप से अलग-अलग मानने का फैसला भी लिया गया, ताकि भविष्य में विवाद न हो।
गुलाब देवी ने नगर पालिका अधिकारियों को उनकी सीमा बता दी। उन्होंने कहा कि पालिका को धार्मिक स्थलों पर बिना स्थानीय कमेटी की सहमति के निर्माण कार्य नहीं करने चाहिए।
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