Sambhal : सम्भल में सौहार्द की मिसाल, पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी राहत सामग्री
कुलवीर सिंह ने कहा कि सम्भल के मुसलमानों ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने सभी दानदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि इस मदद से पंजाब के बाढ़ प्रभावित
Report : उवैस दानिश, सम्भल
पंजाब में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सम्भलवासियों ने सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश की है। ईद मिलादुन्नबी के दिन से ही सम्भल के मुस्लिम समुदाय ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री जुटाने का अभियान शुरू किया था। चंदौसी चौराहे पर एक विशेष स्टॉल लगाकर लोगों से सहयोग की अपील की गई। शहर के विभिन्न इलाकों से लोगों ने उत्साहपूर्वक इसमें हिस्सा लेते हुए जरूरतमंदों के लिए कपड़े, राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान दान किया।
मंगलवार को एकत्रित की गई राहत सामग्री को ट्रक में भरकर पंजाब के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर चंदौसी चौराहे पर एक संक्षिप्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सम्भल गुरुद्वारा प्रबंधक कुलवीर सिंह ने ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि सम्भल के लोगों का यह सेवा भाव हमेशा याद रखा जाएगा। खासकर मुस्लिम समुदाय द्वारा दिखाई गई यह मानवता और भाईचारे की मिसाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
कुलवीर सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक सम्भल
कुलवीर सिंह ने कहा कि सम्भल के मुसलमानों ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने सभी दानदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि इस मदद से पंजाब के बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
आयोजकों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जुटाई गई सामग्री में सूखा राशन, पीने का पानी, कपड़े, बच्चों का दूध, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इस पहल में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता व अभियान के संयोजकों ने बताया कि यह राहत सामग्री सीधे पंजाब के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई जाएगी, जहां लोग अब भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे भी सम्भल से और सहायता सामग्री भेजी जाएगी।
इस कार्यक्रम के माध्यम से सम्भल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में धर्म, जाति या मजहब नहीं, बल्कि इंसानियत ही सर्वोपरि होती है। पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए सम्भलवासियों की यह पहल न सिर्फ मदद का हाथ बढ़ाने का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और सौहार्द का मजबूत संदेश भी देती है।
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