Sambhal : ‘वन्दे मातरम’ अनिवार्यता मुद्दों से भटकाने की कोशिश, सरकार बताए रोज़गार–शिक्षा पर क्या किया- जियाउर्रहमान बर्क
जियाउर्रहमान बर्क ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान हर नागरिक करता है और वह स्वयं भी करता आए हैं। उन्होंने कहा कि देशभक्ति कोई दिखावा नहीं है और न ही इसे जबरदस्ती
Report : उवैस दानिश, सम्भल
केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने संबंधी एडवाइजरी पर समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जब से सत्ता में हैं, तब से मुख्य जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विषयों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जियाउर्रहमान बर्क ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान हर नागरिक करता है और वह स्वयं भी करता आए हैं। उन्होंने कहा कि देशभक्ति कोई दिखावा नहीं है और न ही इसे जबरदस्ती साबित कराने की जरूरत है। “हम अपने देश से प्रेम करते हैं, लेकिन बार-बार वफादारी का प्रमाण देने की बाध्यता क्यों?”—उन्होंने सवाल उठाया। साथ ही कहा कि जिन लोगों को किसी समुदाय के योगदान पर संदेह है, उन्हें इतिहास पढ़ना चाहिए। सांसद ने सरकार से सीधा प्रश्न किया कि ‘वन्दे मातरम’ की अनिवार्यता से किसे रोज़गार मिलेगा, कौन से कॉलेज–यूनिवर्सिटी खुलेंगे या कौन सी फैक्ट्रियां लगेंगी?
उन्होंने कहा कि यह कदम जनहित से नहीं, बल्कि मुद्दों को डाइवर्ट करने की नीति का हिस्सा है। संसद में विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों पर उठाए जा रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी में नए लोगों के शामिल होने पर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले से ही मजबूत है। माननीय अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी का दरवाज़ा उन सभी के लिए खुला है जो शांति, भाईचारा और विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी परिवार लगातार बढ़ रहा है और जो भी जुड़ेगा, उसका स्वागत किया जाएगा।
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