Lucknow : यूपी में अब ओला, उबर को भी कराना होगा पंजीकरण, बिना पुलिस वेरिफिकेशन आदि के नहीं चल सकेगी ओला- उबर टैक्सी
यूपी सरकार ने नगर छेत्र के परिवहन यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए यूपी में अब ओला व उबर को भी परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना होगा। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का उल्ले
- योगी सरकार का बड़ा फैसला- अब प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगी बस, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को कैबिनेट की मंजूरी
- परमिट व टैक्स से मुक्त रहेंगी ग्राम परिवहन योजना में अनुबंधित बसें:-दयाशंकर सिंह, मंत्री यूपी परिवहन
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार की कैबिनेट बैठक के निर्णयों की मीडिया को जानकारी देते हुए वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी, इस अभिनव योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। पत्रकार वार्ता में मौजूद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। 28 सीटर मिनी बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति ग्रामीणों छेत्र के निजी लोगों को मिलेगी।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी, सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी, दिन में दो फेरे अनिवार्य करने होंगे। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं, इसलिए ये ग्रामीण छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी।
इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी। ग्रामीण छेत्र की इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन में हो जाएगी। आवेदक के सफल चयन के बाद वाहन उपलब्ध कराने के लिए 15 दिन होंगे तथा निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारण करेगी, इसका टिकट भी सस्ता रहेगा, इन्हें परमिट व टैक्स की आवश्यक्ता नहीं होगी। इससे बस चलाने वालों को लाभ होगा, राज्य सरकार का उद्देश्य आमजन को बेहतर सुविधा मुहैया कराना है।
यूपी सरकार ने नगर छेत्र के परिवहन यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा को देखते हुए यूपी में अब ओला व उबर को भी परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना होगा। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है। भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा। कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे।
इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराएंगे। केबिनेट निर्णय के प्रति अधिसूचना जारी होने के बाद अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे। अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी। आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा, रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी विकसित करेंगे, जिससे समस्त जानकारी पब्लिक डोमेन में रहे, इसके तहत ड्राइवर आदि की समस्त जानकारी भी प्राप्त होगी।
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