Sambhal : महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं चौकी प्रभारी रेनू राठी

अंबेडकर मूर्ति के पास रहने वाले उमेश मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे अपनी बेटियों का दाखिला स्कूल में नहीं करा पा रहे थे। जब इस बात की जानकारी चौ

By INA News Desk
Sep 29, 2025 - 15:33
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Sambhal : महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं चौकी प्रभारी रेनू राठी
महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं चौकी प्रभारी रेनू राठी
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गरीब मजदूर की दो बेटियों को दिलाया शिक्षा का अधिकार, दोनों बालिकाओं ने पुलिस बनकर समाज सेवा का लिया संकल्प

Report : उवैस दानिश, सम्भल

थाना हयातनगर क्षेत्र में चौकी प्रभारी रेनू राठी ने ऐसा सराहनीय कार्य किया, जिसने न सिर्फ दो नन्हीं बालिकाओं का भविष्य संवार दिया बल्कि समाज को महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल भी दी। अपने अथक प्रयास और संवेदनशील पहल के तहत रेनू राठी ने गरीब मजदूर की दो बेटियों का एडमिशन प्राथमिक विद्यालय हयातनगर में कराया, जिससे बच्चियों के चेहरे पर नई उम्मीद और खुशी की चमक दिखाई दी।

अंबेडकर मूर्ति के पास रहने वाले उमेश मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण वे अपनी बेटियों का दाखिला स्कूल में नहीं करा पा रहे थे। जब इस बात की जानकारी चौकी प्रभारी रेनू राठी को मिली तो उन्होंने तुरंत पहल की। मिशन शक्ति अभियान के तहत उन्होंने उमेश की छह वर्षीय पुत्री दीपांशी और पांच वर्षीय मानसी का दाखिला कक्षा एक में करवाया। एडमिशन होते ही दोनों बच्चियां खुशी से झूम उठीं।इस अवसर पर बच्चियों की मां ने भावुक होकर चौकी प्रभारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि रेनू राठी ने उनके परिवार को नई दिशा दी है। अब उनकी बेटियां पढ़-लिखकर कुछ बड़ा कर पाएंगी। बच्चियों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वे बड़ी होकर चौकी प्रभारी रेनू राठी की तरह पुलिस बनना चाहती हैं और समाज की सेवा करना चाहती हैं। यह बात सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति अभियान फेज-5 के अंतर्गत महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस कड़ी में चौकी प्रभारी रेनू राठी ने साबित किया कि पुलिस केवल कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में बदलाव लाने की शक्ति भी रखती है। इस प्रेरणादायी पहल में चौकी प्रभारी रेनू राठी की सहयोगी रितु गिरी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस नेक कार्य ने न केवल दो बच्चियों का भविष्य संवारा, बल्कि अन्य परिवारों के लिए भी शिक्षा और सशक्तिकरण की प्रेरणा दी है।

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