Sambhal : बाबा बागेश्वर के बयान पर सम्भल के धर्मगुरुओं का पलटवार, बोले – मंदिरों से करें शुरुआत, मुसलमानों की वतनपरस्ती पर न उठाएं सवाल
मौलाना वसी अशरफ ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, “1857 में जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब सबसे पहले मुस्लिम उलमाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा
Report : उवैस दानिश, सम्भल
बाबा बागेश्वर के मंदिर, मस्जिद और गिरजाघरों में राष्ट्रीय गान गाने वाले बयान पर सम्भल के धर्मगुरुओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बाबा बागेश्वर पर आरोप लगाया कि वह समाज में फूट डालने और धार्मिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
धर्मगुरु मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि बाबा बागेश्वर का बयान सिर्फ अपनी कथित देशभक्ति दिखाने के लिए है। उन्होंने कहा कि मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर जैसे धार्मिक स्थलों पर हमेशा धार्मिक ग्रंथों का पाठ होता है। मौलाना वसी अशरफ ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, “1857 में जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब सबसे पहले मुस्लिम उलमाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा दिया था। देश की आजादी की खातिर ढाई हजार उलमाओं की लाशें दिल्ली से लेकर लाहौर तक पेड़ों पर लटकाई गई थीं।” उन्होंने कहा कि मदरसों में हमेशा से वतनपरस्ती यानी देशभक्ति सिखाई जाती है। मौलाना ने बाबा बागेश्वर को चुनौती देते हुए कहा कि पहले वह मंदिरों में राष्ट्रीय गान गाने की शुरुआत करें और बताएँ कि किस मंदिर में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। मौलाना ने कहा, “उनके ही लोग उनकी बात नहीं मानेंगे। यह बयान केवल लोगों का ध्यान भटकाने और अपने किसी केस से बचने के लिए दिया गया है। हुकूमत की आंखों में धूल झोंकने का यह तरीका अब नहीं चलेगा।”
वहीं धर्मगुरु मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि बाबा बागेश्वर इस तरह के मुद्दे उठाकर क्या संदेश देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का हर नागरिक अपने देश से मोहब्बत करता है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और इसाई सबने मिलकर भारत को आजाद कराया है। “भारत का हर नागरिक भारतीय होने पर फख्र करता है। धार्मिक यात्राओं में भी लोग तिरंगा लेकर चलते हैं, जो उनकी वतनपरस्ती का प्रमाण है।” मुफ्ती ने बाबा बागेश्वर पर सवाल उठाते हुए कहा, “वह होते कौन हैं मुसलमानों से वतनपरस्ती का प्रमाणपत्र मांगने वाले। भारत में रहने वाला हर मुसलमान इस देश और इसके नागरिकों से मोहब्बत करता है।” धर्मगुरुओं ने बाबा बागेश्वर से अपील की कि वह ऐसे बयान न दें, जिससे समाज में नफरत फैले। उन्होंने कहा कि देशभक्ति किसी एक धर्म की जागीर नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के दिल में बसती है।
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