झावेरी बाजार में चांदी का भाव 2 लाख पार: त्योहारी मांग से स्टॉक खत्म, नए ऑर्डर बंद।

मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में चांदी की कीमतें एक नया रिकॉर्ड बना चुकी हैं। 15 अक्टूबर 2025 को चांदी का भाव प्रति किलोग्राम 2 लाख रुपये के पार पहुंच गया। यह तेजी त्योहारी

Oct 16, 2025 - 12:27
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झावेरी बाजार में चांदी का भाव 2 लाख पार: त्योहारी मांग से स्टॉक खत्म, नए ऑर्डर बंद।
झावेरी बाजार में चांदी का भाव 2 लाख पार: त्योहारी मांग से स्टॉक खत्म, नए ऑर्डर बंद।

मुंबई के प्रसिद्ध झावेरी बाजार में चांदी की कीमतें एक नया रिकॉर्ड बना चुकी हैं। 15 अक्टूबर 2025 को चांदी का भाव प्रति किलोग्राम 2 लाख रुपये के पार पहुंच गया। यह तेजी त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी के कारण हुई है। बाजार में चांदी का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है, जिसके चलते कारोबारियों ने नए ऑर्डर बंद कर दिए हैं। झावेरी बाजार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हितेश सुभाष जैन ने कहा कि चांदी अब नए सोने के रूप में उभर रही है। वे बताते हैं कि सिर्फ एक हफ्ते पहले चांदी का भाव 1.62 लाख रुपये प्रति किलोग्राम था, लेकिन अब यह 2 लाख से ऊपर कारोबार कर रही है। बाजार में चांदी पर 30,000 रुपये तक का प्रीमियम लग रहा है, जिससे खरीदारों में हड़कंप मच गया है।

झावेरी बाजार मुंबई का सबसे बड़ा आभूषण बाजार है, जहां देशभर से व्यापारी आते हैं। यहां सैकड़ों दुकानें हैं जो सोने-चांदी के गहने, सिक्के और सजावटी सामान बेचती हैं। त्योहारों के मौसम में यहां की रौनक दोगुनी हो जाती है। धनतेरस और दिवाली जैसे पर्वों से पहले लोग चांदी के बर्तन, सिक्के और गहने खरीदते हैं। लेकिन इस बार कीमतों की तेज चढ़ाई ने सबको चौंका दिया है। एक दुकानदार ने बताया कि सात से दस दिनों के लिए तैयार किया गया स्टॉक तीन दिनों में ही बिक गया। अब वे केवल मौजूदा स्टॉक पर प्रीमियम लगाकर बेच रहे हैं। नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया गया है क्योंकि सप्लाई चेन टूट चुकी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अनुसार, 15 अक्टूबर को मुंबई में चांदी का औसत भाव 1,91,500 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, लेकिन झावेरी बाजार में यह प्रीमियम के साथ 2 लाख के ऊपर बिक रही है।

यह तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी चांदी की मांग बढ़ रही है। सिल्वर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चांदी की मांग सप्लाई से 15 प्रतिशत ज्यादा रही है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उपभोक्ता है। वहां सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। 2025 के पहले आठ महीनों में चीन ने 180 गीगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता लगाई, जिसके लिए 90 मिलियन औंस चांदी की जरूरत पड़ी। ऑस्ट्रेलिया में चांदी का उत्पादन सीसा-जिंक खनन से जुड़ा है, लेकिन वहां भी मांग बढ़ने से निर्यात प्रभावित हो रहा है। तुर्की में आभूषण उद्योग और निवेश की मांग ने स्टॉक को कम कर दिया है। इन देशों में डिलीवरी में देरी हो रही है, जिसका असर भारत पर पड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की सप्लाई चार सालों से मांग से कम है। 70 प्रतिशत चांदी अन्य धातुओं के उपउत्पाद के रूप में निकलती है, इसलिए कीमत बढ़ने पर भी उत्पादन तुरंत नहीं बढ़ता।

भारत में चांदी का आयात 80 प्रतिशत से ज्यादा विदेशों से होता है। लेकिन 2025 के पहले आठ महीनों में आयात 42 प्रतिशत घटकर 3,302 टन रह गया। निवेशकों की मांग, खासकर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सिल्वर ईटीएफ में निवेश तीन गुना बढ़ गया है। त्योहारी सीजन में चांदी के सिक्के, बर्तन और गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मांग औद्योगिक उपयोग से भी जुड़ी है। चांदी का इस्तेमाल सोलर सेल, बैटरी और मेडिकल उपकरणों में होता है। एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की वंदना भारती कहती हैं कि पिछले चार-पांच सालों से चांदी की मांग बढ़ रही है, जबकि सप्लाई टाइट है। रिसाइक्लिंग स्तर सोने जितना नहीं है, और नई खदानें सात-आठ साल लगती हैं। डॉलर की कमजोरी ने भी चांदी को सस्ता बनाया, जिससे वैश्विक खरीदारी बढ़ी।

झावेरी बाजार के कारोबारियों पर इस स्थिति का बुरा असर पड़ रहा है। एक व्यापारी ने कहा कि ग्राहक पूछते हैं कि भाव इतना ऊंचा क्यों है, लेकिन हम बता नहीं पाते। प्रीमियम पर बेचना मजबूरी है, वरना स्टॉक बचेगा ही नहीं। बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है। कुछ दुकानें केवल सोने पर फोकस कर रही हैं, क्योंकि चांदी का स्टॉक खत्म हो चुका है। हितेश जैन ने बताया कि धनतेरस के लिए ऑर्डर पहले ही बंद हो गए। अब दिवाली तक कीमतें और चढ़ सकती हैं। मुंबई के अलावा दिल्ली में चांदी का भाव 1,90,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि चेन्नई में 2,07,000 रुपये तक पहुंच गया। कोलकाता और हैदराबाद में भी 1,89,100 से 2,06,100 रुपये के बीच कारोबार हो रहा है। यह एक ही दिन में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी दर्शाता है।

वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में चांदी की कीमतें 53 प्रतिशत चढ़ चुकी हैं, जो सोने के 49 प्रतिशत से ज्यादा है। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 1,62,000 रुपये के ऊपर है, लेकिन फिजिकल मार्केट में प्रीमियम के कारण यह ज्यादा है। सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, मेक्सिको, चीन, पेरू, बोलीविया और चिली दुनिया के प्रमुख उत्पादक देश हैं। लेकिन तुर्की जैसे देशों में आभूषण मांग बढ़ने से निर्यात कम हो गया। ऑस्ट्रेलिया में बेस मेटल माइनिंग से चांदी निकलती है, लेकिन वहां भी डिमांड हाई है। चीन ने घरेलू खपत पर फोकस किया है, जिससे वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई। भारत में सितंबर 2025 में चांदी का आयात दोगुना हो गया, लेकिन फिर भी कमी बनी रही। डीजीएफटी ने सितंबर में सादे चांदी के आभूषणों के आयात पर पाबंदी लगाई, जो थाईलैंड से 330 प्रतिशत बढ़ गया था।

यह स्थिति निवेशकों के लिए अवसर भी ला रही है। कई लोग चांदी को सोने का विकल्प मान रहे हैं। ईटीएफ में निवेश बढ़ा है, जहां ग्लोबल होल्डिंग्स 1.13 बिलियन औंस पहुंच गई। एक्सिस म्यूचुअल फंड के अनुसार, पहली छमाही में 95 मिलियन औंस का निवेश हुआ। लेकिन सावधानी बरतनी जरूरी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कीमतें ऊंची हैं, इसलिए लंबी अवधि के लिए निवेश करें। त्योहारी खरीदारी में छोटी मात्रा ही लें। बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और डॉलर इंडेक्स असर डालेंगे।

झावेरी बाजार की यह चमक त्योहारों की रौनक बढ़ा रही है, लेकिन कीमतों की मार आम खरीदार पर पड़ रही है। सरकार और एसोसिएशन को आयात बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल, चांदी की चमक बाजार को रोशन कर रही है, लेकिन स्टॉक की कमी सवाल खड़े कर रही है। क्या यह तेजी बनी रहेगी या गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। बाजार के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दिवाली तक सप्लाई सुधरे। यह घटना भारतीय अर्थव्यवस्था की चमक को दर्शाती है, जहां त्योहार निवेश और मांग को जोड़ते हैं।

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