कौशांबी में मुस्लिम परिवार की सनातन धर्म में वापसी: अनुज प्रताप सिंह और सौम्या बन दुर्गा मंदिर में अपनाया हिंदू धर्म।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो धार्मिक सद्भाव और व्यक्तिगत विश्वास की मिसाल पेश कर रही है। चायल तहसील के पुरखास गांव में रहने वाले एक
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो धार्मिक सद्भाव और व्यक्तिगत विश्वास की मिसाल पेश कर रही है। चायल तहसील के पुरखास गांव में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया। परिवार के मुखिया मेहदी अली राजपूत ने अपना नाम अनुज प्रताप सिंह रखा, उनकी पत्नी सायमा राजपूत अब सौम्या कहलाएंगी और तीन साल की बेटी उर्वा का नाम उर्विजा हो गया। यह धर्म परिवर्तन 14 अक्टूबर 2025 को मंझनपुर कस्बे के दुर्गा मंदिर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। हवन-पूजन, मंत्रोच्चारण और दीक्षा संस्कार के बीच परिवार ने सनातन धर्म में प्रवेश की घोषणा की। स्थानीय हिंदू संगठनों और ग्रामीणों ने इसका स्वागत किया, लेकिन यह घटना सोशल मीडिया पर बहस का विषय भी बन गई। परिवार का कहना है कि यह उनकी पूर्वजों की जड़ों से जुड़ने की प्रक्रिया है, जो लव जिहाद जैसे आरोपों से दूर है।
परिवार के मुखिया अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज राजपूत थे, जो कई पीढ़ियों पहले इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे। अनुज ने कहा कि बचपन से ही उन्हें हिंदू रीति-रिवाजों की ओर आकर्षण महसूस होता था। वे कहते हैं कि सनातन धर्म की उदारता और रामायण-महाभारत की कहानियों ने उन्हें प्रभावित किया। सौम्या ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शादी के बाद उन्होंने परिवार के फैसले का समर्थन किया। वे बताती हैं कि बेटी उर्विजा के जन्म के बाद उन्होंने दुर्गा माता से प्रार्थना की थी, जिसके बाद यह कदम उठाया। परिवार का मानना है कि यह परिवर्तन जबरदस्ती नहीं, बल्कि आत्मिक संतुष्टि के लिए है। अनुज एक छोटे व्यवसाय से जुड़े हैं और सौम्या घर संभालती हैं। उन्होंने कहा कि अब वे हिंदू त्योहारों को पूरे उत्साह से मनाएंगे।
धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह वैदिक परंपरा के अनुसार हुई। दुर्गा मंदिर में पंडितों ने हवन यज्ञ कराया, जिसमें अग्नि के माध्यम से परिवार ने पुरानी आस्था को त्यागने का संकल्प लिया। वैदिक मंत्रों का जाप करते हुए उन्हें यज्ञोपवीत धारण कराया गया। स्थानीय विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के सदस्यों ने इस आयोजन में सहयोग किया। वीएचपी जिला सहमंत्री ने बताया कि यह घर वापसी का मामला है, जहां परिवार अपनी मूल जड़ों की ओर लौट रहा है। मंदिर परिसर में ग्रामीणों ने परिवार का स्वागत किया और मिठाई बांटी। अनुज ने कहा कि वे अब गांव में हिंदू रीति से जीवन जिएंगे। यह घटना नवरात्रि के दौरान हुई, जब पूरा इलाका दुर्गा पूजा में डूबा था। मंदिर में भक्तों की भीड़ थी, और इस समारोह ने सद्भाव का संदेश दिया।
कौशांबी जिला प्रयागराज मंडल का हिस्सा है, जो प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय मंझनपुर यमुना नदी के किनारे बसा है। यह इलाका बौद्ध, जैन और हिंदू धर्मों का केंद्र रहा है। प्राचीन कौशांबी नगरी के अवशेष यहां मिलते हैं, जहां भगवान बुद्ध ने कई बार प्रवचन दिए। जैन तीर्थंकरों का भी जन्म और ज्ञान स्थान यहीं रहा। जिले की आबादी में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय बराबर हैं, और सामान्यतः सद्भाव का माहौल रहता है। लेकिन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे अक्सर विवादास्पद हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से ऐसे मामले बढ़े हैं, जिनमें वीएचपी और बजरंग दल जैसे संगठन सक्रिय रहते हैं। सरकार ने 2021 में धर्म स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया, जो जबरन परिवर्तन पर सख्ती करता है। इस मामले में पुलिस ने कोई शिकायत न मिलने पर कोई कार्रवाई नहीं की।
परिवार की पृष्ठभूमि को समझें तो अनुज के दादा-परदादा राजपूत समुदाय से थे। वे बताते हैं कि ब्रिटिश काल में कुछ आर्थिक दबाव के कारण परिवर्तन हुआ था। अनुज ने स्कूल के दिनों में हिंदू मित्रों से प्रभावित होकर रामचरितमानस पढ़ा। सौम्या का जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन वे कहती हैं कि हिंदू संस्कृति की सरलता उन्हें पसंद थी। बेटी उर्विजा के नाम परिवर्तन को उन्होंने विशेष महत्व दिया। परिवार ने कहा कि वे अब गंगा स्नान और काशी यात्रा करेंगे। स्थानीय पंडित ने बताया कि दीक्षा के बाद परिवार को गायत्री मंत्र सिखाया गया। यह प्रक्रिया तीन घंटे चली, जिसमें आरती और प्रसाद वितरण भी हुआ। ग्रामीणों ने इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन कुछ मुस्लिम पड़ोसियों ने चुप्पी साधी।
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन के मामले राजनीतिक रंग ले लेते हैं। विपक्षी दल अक्सर इन्हें लव जिहाद से जोड़ते हैं, जबकि भाजपा सरकार इसे घर वापसी कहती है। कौशांबी में जून 2025 में एक समान घटना हुई थी, जहां मुस्लिम युवती जरीना ने प्रेमी साजन कुमार से शादी के लिए हिंदू धर्म अपनाया। वह सीएम योगी के जन्मदिन पर दुर्गा मंदिर में विवाह रचाने आई। जरीना ने कहा था कि योगी उनके आदर्श हैं। वह प्रतापगढ़ के मानिकपुर से थीं और लोडर चालक साजन से प्यार हो गया। वीएचपी ने उस आयोजन को भी समर्थन दिया। लेकिन अनुज परिवार का मामला अलग है, क्योंकि यह शादी से जुड़ा नहीं। यहां पूरा परिवार लौट रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामले सामाजिक सद्भाव बढ़ाते हैं, लेकिन जबरदस्ती के आरोपों से बचना चाहिए।
कौशांबी का सामाजिक ताना-बाना मजबूत है। जिले में हिंदू-मुस्लिम त्योहार साथ मनाए जाते हैं। ईद पर हिंदू पड़ोसी बिरयानी खाते हैं, तो होली पर मुस्लिम रंग खेलते हैं। लेकिन सांप्रदायिक दंगे भी हुए हैं। 1990 के दशक में बाबरी विध्वंस के बाद तनाव बढ़ा था। अब विकास कार्यों से माहौल सुधरा है। जिले में यमुना पर पुल बन रहा है, जो प्रयागराज से कनेक्टिविटी बढ़ाएगा। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है, जहां गेहूं, चावल और दालें उगाई जाती हैं। अनुज परिवार का गांव पुरखास चायल तहसील में है, जहां आबादी 5000 के आसपास है। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार सामाजिक रूप से सक्रिय था। अनुज मस्जिद समिति में भी थे, लेकिन अब वे मंदिर प्रबंधन से जुड़ेंगे।
यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। एक्स पर #GharWapsi ट्रेंड किया, जहां समर्थक इसे सनातन की विजय बता रहे हैं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाए कि क्या यह स्वैच्छिक था। एनडीटीवी की रिपोर्ट में सौम्या ने कहा कि कोई दबाव नहीं था। वे खुश हैं कि बेटी अब हिंदू संस्कृति में पलेगी। वीएचपी ने इसे प्रचारित किया, लेकिन परिवार ने कहा कि वे राजनीति से दूर रहेंगे। कौशांबी एसपी ने पुष्टि की कि कोई शिकायत नहीं है। जिला प्रशासन सद्भाव बनाए रखने के निर्देश दे चुका है।
उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है। 2024 में 500 से ज्यादा घर वापसी हुईं, ज्यादातर यूपी और बिहार में। सरकार का कहना है कि यह कानूनी है। लेकिन मानवाधिकार संगठन सतर्क हैं। अनुज परिवार का केस सकारात्मक लगता है, क्योंकि यह परिवारिक निर्णय है। सौम्या ने कहा कि सनातन धर्म में स्त्री सम्मान अधिक है। वे अब महिलाओं के सशक्तिकरण पर काम करेंगी। बेटी उर्विजा को संस्कारित संस्कृत सीखने का अवसर मिलेगा। परिवार ने मंदिर में दान दिया और भविष्य में सेवा का वादा किया।
यह घटना बिहार की समान कहानियों से मिलती है। कटिहार में मुस्लिम परिवार ने संतान प्राप्ति पर दुर्गा मंदिर में पूजा की। नालंदा में मुस्लिम सोने की नथिया चढ़ाते हैं। ये उदाहरण धार्मिक एकता दिखाते हैं। कौशांबी में भी संत मलूकदास की परंपरा है, जिन्हें हिंदू-मुस्लिम दोनों मानते हैं। उनकी कुटी कड़ा में है। अनुज परिवार अब इसी धरोहर का हिस्सा बनेगा।
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