नववर्ष विशेष- कुछ दोहे नववर्ष पर।

आओ हे नववर्ष सब ,हेर रहे हैं बाट । बिखरें खुशियाँ द्वार के ,खोलो बन्द कपाट।।

Dec 18, 2024 - 13:38
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नववर्ष  विशेष- कुछ दोहे नववर्ष पर।

डॉ मधु प्रधान, कानपुर 

कुछ दोहे नववर्ष पर

आओ हे नववर्ष सब ,हेर रहे हैं बाट ।
बिखरें खुशियाँ द्वार के ,खोलो बन्द कपाट।।

उम्मीदों की रोशनी ,खुशहाली की धूप।
घर ऑंगन मृदुभाव की ,फैले छटा अनूप।।

नया साल लाये प्रभु ,रंग ,अबीर, गुलाल ।
हरे-भरे हों खेत सब भरे-भरे हों ताल।।

अक्षत ,कुंकुम थाल ले ,द्वारे वन्दनवार।
स्वागत है नववर्ष का ,ले फूलों का हार।

भूली उषा नागरी , तारों भरा दुकूल।
पूरव में उगने लगा स्वर्ण सिंदूरी फूल।

लाया मौसम डाकिया ,फूलों का उपहार।
खत लाया खुशबू भरे ,झोला भर-भर प्यार।।

फि मुँडेर पर आ गई ,गौरैया सी धूप।
चहक उठा घर द्वार सब ,खिला सुनहरा रूप।।

किरणों से घर भर दिया, अरु मन में उत्साह।
हम तो बस नादान हैं ,तुमको है परवाह।।

नया साल दे कर गया ,मीठी सी सौगात।
एक पुरानी डायरी,फिर से आयी हाथ।।

भूख,गरीबी खत्म हो ,फैले सुख समृद्धि।
सरल-सहज अभिव्यक्ति हो ,अपनेपन में वृद्धि।।

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