कहानी- उम्मीद: सूरज दादी मां से वीर विक्रमादित्य की कहानियाँ

समय बीतता गया सूरज की लगन और मेहनत रंग लाई....

Oct 9, 2024 - 12:35
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कहानी- उम्मीद:  सूरज दादी मां से वीर विक्रमादित्य की कहानियाँ

उम्मीद

डॉ. मधु प्रधान ,कानपुर

एक था सूरज दादी मां से वीर विक्रमादित्य की कहानियाँ सुन -सुन कर न्यायाधीश बनने की ठान ली ।गाँव के बड़े बरगद की छाँह में बने पक्के चबूतरे पर बैठ कर जब वहअपने मित्रों के झगड़े सुलझाता तो उसकी समझदारी भरी बातें सुन कर बड़े भी दाँतों तले उँगली दबा लेते।

समय बीतता गया सूरज की लगन और मेहनत रंग लाई।एक दिन उसे बड़ी अदालत में न्यायाधीष का पद मिल गया।उसकी ईमानदारी और न्याय की धूम मच गई।पर वक्त के साथ बहुत कुछ बदल जाता है।विक्रमादित्य के सिंहासन में जड़ी पुतलियों का स्थान ले लिया कानून की मोटी-मोटी किताबें थामे काला कोट पहनें वकीलों ने।अपराधी खुद को निरपराध कह दया की गुहार करते।अपने मुवक्किल को सच्चा सिद्ध करने के लिए वकील एड़ी-चोटी का जोर लगा देते।

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किसी भी तरहः सच्चाई को खोज निकालने की भावना न जाने कहाँ गुम हो गई।कभी - कभी  तो सूरज देखता रह जाता झूठे गवाह और तर्कों के सहारे अपराधी छूट जाते और निरपराध परेशान होते रहते उसे अपनी कलम मुथरी सी लगती।धीरे -धीरे उसने भी खुद को समय के प्रवाह के साथ छोड़ दिया। आज झूठे मुकेदमे में फंसा रमुआ इंतजार कर रहा है एक और विक्रमादित्य का।उसकी उम्मीद जिन्दा है।

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