Special - बुद्धिमत्ता को सम्मान, संबंधों को सशक्त बनाना: भविष्य-सजग समाज के लिए पीढ़ीगत एकजुटता
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रिटिश लिंगुआ के संस्थापक, प्रख्यात लेखक, समाजभाषाविद् और शिक्षाविद् डॉ. बीरबल झा का ओजस्वी वक्तव्य रहा। उन्होंने अपने संबोधन
- ब्रिटिश लिंगुआ, पटना में विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर विशेष आयोजन
पटना : वरिष्ठ नागरिकों की अमूल्य जीवनानुभूति, ज्ञान और सामाजिक योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से आज पटना स्थित संचार कौशल संस्थान ब्रिटिश लिंगुआ में विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम थी: "बुद्धिमत्ता को सम्मान, संबंधों को सशक्त बनाना: भविष्य-सजग समाज के लिए पीढ़ीगत एकजुटता।"
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ब्रिटिश लिंगुआ के संस्थापक, प्रख्यात लेखक, समाजभाषाविद् और शिक्षाविद् डॉ. बीरबल झा का ओजस्वी वक्तव्य रहा। उन्होंने अपने संबोधन में वरिष्ठ नागरिकों को "परंपरा, ज्ञान और नैतिक मूल्यों के जीवंत संवाहक" के रूप में सम्मानित किया।
डॉ. झा ने कहा, "विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों में बुजुर्गों को सदैव समाज का नैतिक दिशा-सूचक और अनुभव का भंडार माना गया है।" उन्होंने एक अफ्रीकी कहावत उद्धृत की— "जब कोई बुजुर्ग मृत्यु को प्राप्त होता है, तो एक पुस्तकालय जलकर नष्ट हो जाता है," और बताया कि जीवनानुभवों की कोई पुनरावृत्ति नहीं होती। "उनकी कहानियाँ, त्याग और दृष्टिकोण उस आधारशिला के समान हैं, जिस पर हम अपना भविष्य निर्मित करते हैं।"
भारतीय, अफ्रीकी, यूनानी, चीनी और नेटिव अमेरिकी परंपराओं का उल्लेख करते हुए डॉ. झा ने कहा, "हर सभ्यता में बुजुर्गों के प्रति गहरा आदर निहित है। चाहे वह भारतीय संस्कृति का ‘मातृ देवो भव, पितृ देवो भव’ हो या जापान का ‘केइरो नो ही’ उत्सव—संदेश स्पष्ट है: बुजुर्ग बोझ नहीं, वरदान हैं।"
यह आयोजन ब्रिटिश लिंगुआ के बोरिंग रोड क्रॉसिंग परिसर में संपन्न हुआ, जिसमें छात्रों, शिक्षकों, पेशेवरों और वरिष्ठ नागरिकों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। पूरा माहौल सम्मान, आत्मीयता और पीढ़ीगत एकता की भावना से परिपूर्ण रहा।
बुजुर्गों के प्रति सोच में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए डॉ. झा ने कहा, "बुजुर्गों की देखभाल केवल सहानुभूति या कर्तव्य नहीं, बल्कि समाज की नैतिक नींव है। यदि हम अपने बुजुर्गों की उपेक्षा करते हैं, तो हम स्वयं को ही कमजोर करते हैं।" उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बुजुर्गों के साथ संवाद करें, उनके अनुभवों से सीखें और उन्हें समाज की मुख्यधारा में यथोचित स्थान दें।
अपने जीवन-मंत्र को दोहराते हुए डॉ. झा ने कहा, "जीविका हेतु भाषा, पहचान हेतु संस्कृति, और समाज हेतु नैतिकता।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक इस मिशन के केंद्र में हैं, क्योंकि वे ही इन मूल्यों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित सभी जनों द्वारा एक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने समाज के वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करने, उन्हें सहयोग देने और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का वचन लिया—एक न्यायपूर्ण और भविष्य-सजग समाज के निर्माण हेतु।
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