अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: संघर्षों से भरा रहा शिक्षिका से जिला पंचायत अध्यक्ष बनने तक का सफ़र, पढ़िए प्रेमावती पी के वर्मा की कहानी
साल 1985 में प्रेमावती (Premavati) हाईस्कूल में थीं तब उनका ब्याह प्रदीप कुमार 'पीके वर्मा' से हुआ था। उस दौर में लड़कियों की शिक्षा को लेकर समाज दकियानूसी हुआ करता था, खासकर म...
Reported By: Vijay Laxmi Singh(Editor-In-Chief)
Edited By: Saurabh Singh
International Women's Day.
तन चंचला, मन निर्मला, व्यवहार कुशला, भाषा कोमला, सदैव समर्पिता..आज का युग तेरा है परिणीता, नारी तुझ पर संसार गर्विता..नारी को समर्पित यह पंक्तियां जिले की उन महिलाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जिन महिलाओं के लिये राजनीति में भाग लेने के लिये उसकी पृष्ठभूमि महत्त्वपूर्ण है। अधिकांश महिलाओं ने यह माना कि महिलाओं के लिये राजनीति में हिस्सा लेना कठिन है, जबकि पुरुषों के लिये यह तुलनात्मक रूप से सरल है।
यह भी माना गया है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली महिला के लिये किसी गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली महिला की तुलना में राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना आसान है। अधिकांश महिलाओं का मानना है कि घरों में राजनीतिक निर्णय लेने में उन्हें कम स्वायत्तता प्राप्त होती है।
इसका मुख्य कारण पितृसत्तात्मक समाज तथा रूढ़िवादी सामाजिक ढाँचा है। हालाँकि विगत कुछ वर्षों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि हुई है लेकिन सर्वेक्षण में लगभग 66% महिलाओं ने कहा कि वे राजनीतिक निर्णय लेने के मामले में अभी भी स्वायत्त नहीं हैं।
प्राचीन काल में घर की महिलाये ही अपने घर के हर एक बात का फैसला करती थी। इसके साथ साथ जरूरत पड़ने पर प्राचीन काल की महिलाये युद्ध में भी पुरुष की सहायता करने के लिए जाती थी। लेकिन समय के साथ साथ सब कुछ बदलता गया। और धीरे धीरे नारी का स्थान हमारे समाज में गिरता गया। भारत सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए कई तरह के सरकारी नियम लागु किये है। इसके साथ साथ नारी के पढाई के लिए कई तरह तरह के नए नए योजनाये भी चलाये है।
हमारे देश में जब नारी के पढाई पर बल देंगे तो उससे हमारे समाज में नारी का स्थान बढ़ता जायेगा लेकिन आज भी बहुत से ऐसे गावं है जहाँ पर लोग लडकियों को पढने के लिए नहीं भेजते है और वह पर लोग महिला को पुरुष से नीच समझते है। अगर हमको महिला को सशक्त करना है तो ऐसे जगह को बदलना होगा और वह के लोगो की सोच को बदलना होगा।
जब ऐसे जगह पर रहने वाले लोगो की सोच बदलेगी तभी हमारे देश में महिलायों का स्थान भी ऊचा होगा। और हमारे समाज में जितना नारी न स्थान ऊचा होगा उतना ही नारी सशक्त होगी।
आज हमारे देश में महिला सशक्तिकरण बहुत जरुरी है। आज हम आपको बताएंगे हरदोई जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती (Premavati) पी के वर्मा के बारे में, जिन्होंने हरदोई की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा है। ज़िला परिषद की तीसरी दलित अध्यक्ष प्रेमावती (Premavati) उच्च शिक्षित हैं, तो इसके पीछे उनकी सास का साहस और प्रोत्साहन रहा। साल 1985 में प्रेमावती (Premavati) हाईस्कूल में थीं तब उनका ब्याह प्रदीप कुमार 'पीके वर्मा' से हुआ था। उस दौर में लड़कियों की शिक्षा को लेकर समाज दकियानूसी हुआ करता था, खासकर महिलाएं लेकिन प्रेमावती (Premavati) की सास ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
नतीजतन प्रेमावती (Premavati) ने राजनीति शास्त्र और समाज शास्त्र में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के साथ बीएड किया। सिविल सर्विस से लेकर तमाम सरकारी सर्विस के इम्तहान में बैठीं। बाद में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका के रूप में अध्यक्ष निर्वाचित होने से पहले तक सेवा दी। इससे पहले उनको काफी संघर्ष के बाद जहां अध्यापक की नौकरी मिली। उससे वीआरएस लेने के बाद उन्होंने राजनैतिक पारी की शुरुआत की है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभालकर जिले की प्रथम नागरिक बनने का सौभाग्य अर्जित करने वाली प्रेमावती (Premavati) महिलाओं से अपील करती हैं कि वह कि सशक्त बनें और समाज, जिला व देश को सशक्त बनाएं।
What's Your Reaction?











