अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: समाजसेवा के क्षेत्र में कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका निरमा देवी का है अहम योगदान, कई सम्मानों से अलंकृत हुईं
समाज की विकृत बंदिशों को तोड़ समाजसेविका के रूप में विभिन्न जनहित कार्यों में अपना योगदान देने वाली अग्रणी महिलाओं में से एक निरमा देवी (Nirma Devi) का कहना है कि हर जरूरतमंद ...
Reported By: Vijay Laxmi Singh(Editor-In-Chief)
Edited By: Saurabh Singh
International Women's Day.
महिला सशक्तिकरण का मतलब महिला की सक्ति से होता है। आज के समय में हर देश यही चाहता है की उसके देश की महिला खुद अपनी रक्षा कर सके। आज हम सब जानते है ती हमारे समाज की महिलाये किसी भी पुरुष से कम नहीं है। आज की महिलाये वह सब काम कर रहे है जो पुरुष करते है। अगर बात शिक्षा की करे तो हमारे भारत में हर एक एग्जाम और कॉम्पटीशन में महिलाये ही टॉप करती है। हमारे देश में नारी का महत्त्व प्राचीन काल से है। प्राचीन काल में हमारे समाज में नारी का बहुत महत्व था। लेकिन आज भी बहुत से ऐसे लोग है जो नारी को एक बोझ समझते है।
अगर हम नारी को एक बोझ ना समझते तो हमारे समाज की नारियां ऐसा ऐसा काम कर सकती है। जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते है। हमारे समाज में महिला सशक्तिकरण के लिए सबसे पहले लोगो की सोच को बदलना होगा। इसी कड़ी अगला नाम आता है कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका व समाजसेविका निरमा देवी (Nirma Devi) का, जिन्हें समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए इंटरनेशनल वूमेंस इंस्पिरेशन अवॉर्ड (Award) सहित कई अन्य सम्मान दिए जा चुके हैं।
समाज की विकृत बंदिशों को तोड़ समाजसेविका के रूप में विभिन्न जनहित कार्यों में अपना योगदान देने वाली अग्रणी महिलाओं में से एक निरमा देवी (Nirma Devi) का कहना है कि हर जरूरतमंद की मदद करना संस्था का प्रमुख लक्ष्य रहता है साथ ही सभी प्रमुख त्योहारों को जरूरतमंदों के साथ मनाने का प्रयास संस्था करती रहती है। वे अपने संस्थान के माध्यम से जरूरतमंद गरीब बच्चों, बुजुर्गो और गरीबों की हर संभव मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है और सामाजिक कार्यों में हमेशा ही बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
जिले में कई तरह के समाजसेवा कार्यों में उनकी अग्रणी भूमिका उनकी सेवा की सोंच को दर्शाती है। उन्हें चिकित्सा,सामाजिक एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सुषमा स्वराज सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। अपने सेवाभावी व्यवहार के कारण वे अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा देती हैं।महिला सशक्तिकरण का सीधा मतलब ये होता है की हमारे समाज की महिलाओं को शक्ति और अधिकार देना होता है। महिलाओं को अधिकार अधिकार देने के लिए हमको अपने समाज में कई तरह के बदलाव लाना पढ़ेगा और महिलाओं और पुरुषो दोनों को एक बराबरी का दर्जा देना होगा।
जिस दिन हमारे समाज में महिलाओं और पुरुषो दोनों को एक बराबरी का दर्जा मिलना शुरु हो जायेगा उस दिन हमारे समाज में एक नए युग की शुरुवात हो जाएगी और वह युग विकास का युग होगा। आज भारत में कई ऐसे जगह पर जहाँ पर महिलाओं और पुरुषो दोनों को एक बराबरी का दर्जा मिलता है लेकिन इसके साथ साथ बहुत से ऐसे जगह भी है जहा पर नारी किसी भी प्रकार की कोई छुट नहीं मिलता है और वहां पर नारी को केवल पति की सेवा और घर की काम करने वाली समझा जाता है।
जब तक हम अपने समाज के सभी नारी को पूरी तरह से सशक्त ना कर ले तब तक हमारे इस सुंदर भारत का विकास होना बहुत मुश्किल है। देश को पूरी तरह से विकसित बनाने तथा विकास के लक्ष्य को पाने के लिये महिला का पूरी तरह से सशक्त होना बहुत जरुरी है। हमारे देश के राष्टपिता महत्मा गाँधी जी ने कहा है की जब तक हमारे देश की सभी महिला और पुरुष साथ मिलकर काम नहीं करेगे तब तक हमारे देश का पूरी तरह से विकास नहीं होगा।
What's Your Reaction?