पटना के चंदन मिश्रा हत्याकांड में तौसीफ ने कबूला जुर्म, 9 आरोपियों के नाम उजागर, शेरू ने दी थी 5-5 लाख की सुपारी।
Chandan Mishra Murder Case: बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। इस...
बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। इस सनसनीखेज मामले में मुख्य आरोपी तौसीफ उर्फ बादशाह ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया और हत्या की साजिश में शामिल सभी 9 आरोपियों के नाम बताए। जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या पश्चिम बंगाल की पुरुलिया जेल में बंद अपराधी ओमकार नाथ सिंह उर्फ शेरू के इशारे पर हुई, जिसने तौसीफ को हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी। साजिश को निशू खान के घर पर अंजाम दिया गया, और बलवंत कुमार सिंह ने शूटरों को इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई। बिहार पुलिस और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, और दो अभी भी फरार हैं।
चंदन मिश्रा, जो बक्सर जिले का एक कुख्यात अपराधी था और 24 से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल था, 15 जुलाई, 2025 को लिवर की सर्जरी के लिए पटना के पारस अस्पताल में भर्ती हुआ। वह उस समय भागलपुर जेल से मेडिकल पैरोल पर था, और उसकी पैरोल 18 जुलाई को खत्म होने वाली थी। 17 जुलाई की सुबह, पांच हथियारबंद हमलावर अस्पताल के कमरा नंबर 209 में घुसे और चंदन मिश्रा पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उसकी हत्या कर दी। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि हमलावरों ने पिस्तौल निकाली, हथियार लोड किए, और कमरे में घुसकर चंदन को गोली मार दी। इसके बाद वे तेजी से भाग निकले।
यह हत्या इतनी साहसी थी कि इसने न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि बिहार में बढ़ते अपराध और गैंगवार की स्थिति को भी उजागर किया। चंदन मिश्रा के पिता, दुर्गेश मिश्रा, की शिकायत पर शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन में तौसीफ उर्फ बादशाह, बलवंत सिंह, और मोनू सिंह समेत दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
- तौसीफ की गिरफ्तारी और कबूलनामा
19 जुलाई, 2025 की रात को बिहार पुलिस और कोलकाता पुलिस के विशेष कार्य बल ने संयुक्त अभियान चलाकर मुख्य आरोपी तौसीफ उर्फ बादशाह को कोलकाता के आनंदपुर में एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया। तौसीफ के साथ उसके चचेरे भाई निशू खान, हर्ष कुमार, और भीम कुमार को भी हिरासत में लिया गया। कोलकाता के अलीपुर कोर्ट ने चारों को 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर बिहार पुलिस को सौंप दिया। 21 जुलाई को इन चारों को पटना लाया गया, और 22 जुलाई को उन्हें अदालत में पेश किया गया। तौसीफ को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया, जबकि बाकी तीन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस पूछताछ में तौसीफ ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया। उसने बताया कि हत्या की योजना निशू खान के समनपुरा, पटना स्थित घर पर बनाई गई थी, जो पारस अस्पताल के पास ही है। तौसीफ ने यह भी कबूल किया कि उसे पुरुलिया जेल में बंद शेरू सिंह ने हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी, जिसमें से 5-5 लाख रुपये दो हिस्सों में बांटे गए। तौसीफ ने सभी नौ आरोपियों के नाम बताए, जिनमें तौसीफ, निशू खान, बलवंत कुमार सिंह, रविरंजन कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, मोनू सिंह, सुरजभान, हर्ष कुमार, और भीम कुमार शामिल हैं।
- शेरू सिंह और गैंगवार का कनेक्शन
जांच में पता चला कि चंदन मिश्रा और शेरू सिंह कभी गहरे दोस्त थे। दोनों ने कम उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा और मिलकर एक खतरनाक गैंग बनाया, जो बिहार में खौफ का पर्याय था। हालांकि, एक महिला को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। शेरू को शक था कि चंदन उसकी हत्या करवा सकता है। इस दुश्मनी के कारण शेरू ने पुरुलिया जेल से ही तौसीफ को चंदन की हत्या का ठेका दिया। बिहार और पश्चिम बंगाल की पुलिस ने शेरू से पुरुलिया जेल में पूछताछ की, जहां उसने साजिश में अपनी भूमिका को स्वीकार किया।
- बलवंत और शूटरों की भूमिका
बलवंत कुमार सिंह ने इस हत्याकांड में शूटरों को इकट्ठा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह सीसीटीवी फुटेज में तीसरा शूटर था, जबकि रविरंजन कुमार सिंह पांचवां शूटर था। 22 जुलाई, 2025 को बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया-कटेया रोड पर बिहार एसटीएफ और भोजपुर पुलिस के साथ मुठभेड़ में बलवंत और रविरंजन घायल हो गए। दोनों ने पुलिस पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, और उनकी पूछताछ में हत्या में उनकी संलिप्तता की पुष्टि हुई। इस मुठभेड़ में अभिषेक कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मौके से दो पिस्तौल, एक देसी हथियार, दो मैगजीन, और चार कारतूस बरामद किए।
- निशू खान के घर पर साजिश
तौसीफ ने बताया कि हत्या की पूरी साजिश निशू खान के समनपुरा स्थित घर पर रची गई थी। निशू, जो शारीरिक रूप से अक्षम है और 2023 में एक गोलीबारी में रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण लकवाग्रस्त है, इस साजिश का एक प्रमुख हिस्सा था। उसने तौसीफ और अन्य आरोपियों को अपने घर पर इकट्ठा होने की जगह दी। हत्या के बाद, तौसीफ, निशू, निशू की प्रेमिका, हर्ष, और भीम निशू की कार में सवार होकर गया, बरही, और रांची होते हुए कोलकाता भाग गए। कोलकाता में होटल पहले से बुक था, जिससे साफ है कि यह हत्या सुनियोजित थी।
तौसीफ उर्फ बादशाह, फुलवारी शरीफ का रहने वाला है और पहले से ही एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, और हत्या के प्रयास जैसे मामलों में शामिल रहा है। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से है, जहां उसकी मां स्कूल शिक्षिका हैं और पिता हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं। तौसीफ ने जल्दी पैसा और शोहरत की चाह में अपराध की दुनिया में कदम रखा और एक सुपारी किलर के रूप में उभरा। उसने सोशल मीडिया पर अपनी अपराधी छवि को बढ़ावा दिया, जहां वह महंगी गाड़ियों और लग्जरी होटलों में वीडियो पोस्ट करता था।
निशू खान भी फुलवारी शरीफ का रहने वाला है और उगाही और आर्म्स एक्ट के मामलों में शामिल रहा है। हर्ष और भीम, जो निशू के सहायक थे, ने हत्या के बाद उनकी भागने में मदद की। बलवंत और रविरंजन बक्सर के रहने वाले हैं, और दोनों पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इस हत्याकांड ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन के एक इंस्पेक्टर, दो सहायक उप-निरीक्षकों, और दो कांस्टेबलों को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा, पारस अस्पताल के दो डॉक्टरों और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि संदेह है कि उनकी मिलीभगत से हमलावरों को अस्पताल की जानकारी मिली।
पटना के पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि तौसीफ की रिमांड अवधि 22 जुलाई से शुरू हुई, और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बक्सर और फुलवारी शरीफ में छापेमारी की और बलवंत, मोनू, और तौसीफ के घरों पर वांछित पोस्टर चस्पा किए। हत्या में इस्तेमाल हथियार और भागने में इस्तेमाल मोटरसाइकिल अभी बरामद नहीं हुई है, लेकिन निशू की कार कोलकाता में जब्त कर ली गई है।
इस हत्याकांड ने बिहार में बढ़ते अपराध और गैंगवार की स्थिति को फिर से उजागर किया। पिछले 26 दिनों में बिहार में 50 हत्याएं हुईं, जिनमें से 14 पटना में हुईं। इस घटना ने विपक्षी दलों को नीतीश कुमार सरकार पर “जंगल राज” का आरोप लगाने का मौका दिया। राहुल गांधी ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए बिहार में अपराध को लेकर सरकार की विफलता पर सवाल उठाए।
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