उल्हासनगर में छेड़छाड़ के आरोपी रोहित झा ने जमानत के बाद पीड़िताओं के घर के सामने जश्न मनाया, पुलिस ने दर्ज की नई FIR।
Maharashtra News: महाराष्ट्र के उल्हासनगर में 21 जुलाई, 2025 को एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा, जब छेड़छाड़ के एक मामले में जमानत पर रिहा ...
महाराष्ट्र के उल्हासनगर में 21 जुलाई, 2025 को एक चौंकाने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा, जब छेड़छाड़ के एक मामले में जमानत पर रिहा हुए आरोपी रोहित बिपिन झा और उनके साथियों ने पीड़िताओं के घर के सामने ढोल-नगाड़े और पटाखों के साथ जश्न मनाया। यह घटना अप्रैल 2025 में हुई छेड़छाड़ की घटना से जुड़ी है, जिसमें रोहित झा और उनके साथियों पर दो बहनों के साथ छेड़छाड़ और उनके भाई पर हमले का आरोप लगा था। जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में गुस्सा भड़क उठा, और उल्हासनगर पुलिस ने रोहित झा और उनके नौ से अधिक साथियों के खिलाफ गैरकानूनी जमावड़ा, बिना अनुमति जुलूस निकालने, और सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध करने के लिए नई FIR दर्ज की।
यह मामला अप्रैल 2025 में उल्हासनगर के कैंप नंबर 2, रमाबाई अंबेडकर नगर इलाके से शुरू हुआ। 27 अप्रैल की रात को रोहित बिपिन झा और उनके साथियों ने कथित तौर पर दो बहनों के साथ छेड़छाड़ की और उनके भाई, यादव, पर हमला किया। स्थानीय लोगों ने इस घटना के बाद रोहित और उनके समूह की पिटाई की थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद रोहित को छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस मामले में रोहित को 17 जुलाई, 2025 को जमानत मिली।
जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद, 21 जुलाई, 2025 को रोहित और उनके साथियों ने उल्हासनगर में पीड़िताओं के घर के सामने मोटरसाइकिल रैली, ढोल-नगाड़े, और पटाखों के साथ जश्न मनाया। वायरल वीडियो में रोहित को पीली शर्ट में देखा गया, जहां उनके समर्थक ढोल-ताशे बजा रहे थे और आतिशबाजी कर रहे थे। इस जश्न ने न केवल पीड़िताओं और उनके परिवार को डराया, बल्कि स्थानीय लोगों में भी भय और गुस्से का माहौल पैदा किया। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता और पीड़िताओं के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया।
वीडियो के वायरल होने के बाद उल्हासनगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उप पुलिस आयुक्त सचिन गोरे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विष्णु तम्हाने ने मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने रोहित बिपिन झा, आशीष उर्फ सोनमणि बिपिन झा, अब्दुल सोहेल, आरिफ मोहम्मद सईद, सुमित आनंद गायकवाड़, परशु सदाशिव सनपाल, रेखा बिपिन झा, सागर सुरदकर, और अन्य के खिलाफ नई FIR दर्ज की। इन पर गैरकानूनी जमावड़ा, बिना अनुमति जुलूस निकालने, सार्वजनिक रास्ता अवरुद्ध करने, और गैरकानूनी रूप से आतिशबाजी करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज की मदद से जुलूस में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस के अनुसार, यह जश्न पीड़िताओं को डराने और अपमानित करने का प्रयास था, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या रोहित और उनके साथियों ने जानबूझकर पीड़िताओं के घर के सामने यह प्रदर्शन किया।
इस जश्न ने पीड़िताओं और उनके परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया। पीड़िताओं के भाई, यादव, ने बताया कि उनकी बहनों को पहले ही अप्रैल की घटना के बाद सामाजिक और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा था। रोहित के जश्न ने उनके परिवार को और डरा दिया, और उन्हें लगा कि उनकी सुरक्षा खतरे में है। स्थानीय लोगों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस घटना को कानून-व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि छेड़छाड़ का आरोपी जेल से छूटने के बाद पीड़िताओं के सामने जश्न मना रहा है।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह घटना दिखाती है कि हमारी न्याय व्यवस्था में अभी भी सुधार की जरूरत है।” कुछ लोगों ने इसे बिहार के बिलकिस बानो मामले से जोड़ा, जहां बलात्कार के दोषियों को रिहा होने के बाद स्वागत किया गया था।
यह घटना महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था और पीड़िताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। छेड़छाड़ जैसे अपराधों में पीड़िताओं को पहले ही सामाजिक और मानसिक आघात का सामना करना पड़ता है, और इस तरह की हरकतें उनकी पीड़ा को और बढ़ाती हैं। रोहित के जश्न ने न केवल पीड़िताओं को डराया, बल्कि यह भी दिखाया कि कुछ लोग कानूनी सजा को गंभीरता से नहीं लेते।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पीड़िताओं के लिए न्याय प्रक्रिया को और जटिल बनाती हैं। वकील प्रीति शर्मा ने कहा, “ऐसे मामलों में पीड़िताओं को डराने की कोशिश अपराधियों की दबंगई को दर्शाती है। पुलिस को न केवल नई FIR पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि मूल छेड़छाड़ मामले में भी सख्ती बरतनी चाहिए।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पीड़िताओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं, जैसे उनकी पहचान को गोपनीय रखना और उनके लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना।
उल्हासनगर, जो ठाणे जिले का एक प्रमुख औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र है, हाल के वर्षों में अपराध की कई घटनाओं के लिए चर्चा में रहा है। मार्च 2025 में, उल्हासनगर में होली के दौरान एक युवती के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी, जिसमें टवट्टखोरों ने रास्ता अड़कर मारपीट की थी। इस मामले में भी सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने कार्रवाई की थी। इसके अलावा, 2022 में उल्हासनगर नगर निगम के एक अधिकारी पर बलात्कार का आरोप लगा था, जिसने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
यह ताजा घटना उल्हासनगर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और उजागर करती है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने में अहम भूमिका निभाई। वीडियो के वायरल होने के बाद, कई यूजर्स ने इसे शेयर करते हुए पुलिस और सरकार से कार्रवाई की मांग की। @ABPNews ने लिखा, “महाराष्ट्र के उल्हासनगर में कानून व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।” @ProfNoorul ने टिप्पणी की, “जब जेल से बाहर आया तो मानो कोई मैडल जीत कर आया हो?” इन पोस्ट ने जनता में गुस्से को और भड़काया।
हालांकि, कुछ यूजर्स ने इस घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने खारिज किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह मामला व्यक्तिगत अपराध से जुड़ा है, और इसका कोई सांप्रदायिक या राजनीतिक पहलू नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब जमानत पर रिहा हुए आरोपी ने पीड़िताओं को डराने की कोशिश की हो। 2022 में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में, छेड़छाड़ के एक आरोपी ने जमानत पर रिहा होने के बाद पीड़िता की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इसी तरह, 2023 में मुंबई में एक महिला ने शिकायत की थी कि छेड़छाड़ का आरोपी जमानत पर छूटने के बाद उसके घर के सामने आया था। इन घटनाओं से साफ है कि पीड़िताओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे में सुधार की जरूरत है।
इस घटना ने पीड़िताओं की सुरक्षा और अपराधियों की जवाबदेही पर कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
सख्त निगरानी: जमानत पर रिहा होने वाले आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था हो।
पीड़िताओं की सुरक्षा: पीड़िताओं और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं, जैसे पुलिस सुरक्षा या स्थानांतरण।
जागरूकता अभियान: जनता और पुलिस के बीच संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
तेज न्याय प्रक्रिया: छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामलों में तेजी से सुनवाई और सजा सुनिश्चित की जाए।
उल्हासनगर में रोहित झा और उनके साथियों द्वारा पीड़िताओं के घर के सामने जश्न मनाने की घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि पीड़िताओं की सुरक्षा और समाज की संवेदनशीलता को भी उजागर किया। इस घटना ने दिखाया कि कुछ लोग कानूनी सजा को गंभीरता से नहीं लेते और पीड़िताओं को डराने की कोशिश करते हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और नई FIR इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
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महाराष्ट्र के उल्हासनगर में कानून व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. विनयभंग और हथियार रखने के आरोप में जेल में बंद रोहित झा को जैसे ही जमानत मिली, उसने न सिर्फ जश्न मनाया बल्कि पीड़िता के घर के सामने ढोल-ताशे बजवाकर पटाखे फोड़े. 27 अप्रैल को दो युवतियों के साथ की गई… pic.twitter.com/8jGJNE1jr8 — ABP News (@ABPNews) July 22, 2025
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