दुनिया का सबसे बुजुर्ग नवजात थैडियस डैनियल पियर्स 30 साल पुराने भ्रूण से जन्मा, विज्ञान की दुनिया का एक अनोखा चमत्कार सामने आया।
Ajab Ghazab News: 26 जुलाई 2025 को अमेरिका के ओहायो में एक अनोखा बच्चा पैदा हुआ, जिसने चिकित्सा विज्ञान और मानव इतिहास में नया कीर्तिमा....
26 जुलाई 2025 को अमेरिका के ओहायो में एक अनोखा बच्चा पैदा हुआ, जिसने चिकित्सा विज्ञान और मानव इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित किया। थैडियस डैनियल पियर्स, जिसे दुनिया का सबसे "बुजुर्ग" नवजात कहा जा रहा है, एक ऐसे भ्रूण से जन्मा जो 1994 में बनाया गया और 30 साल से अधिक समय तक जमे हुए अवस्था में संरक्षित था। यह भ्रूण लिंडसे और टिम पियर्स, ओहायो के लंदन शहर के निवासी, ने एक ईसाई भ्रूण गोद लेने की संस्था के माध्यम से गोद लिया था। नवंबर 2024 में इस भ्रूण को लिंडसे के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया, और नौ महीने बाद थैडियस का जन्म हुआ।
- भ्रूण की कहानी: 30 साल का सफर
थैडियस का भ्रूण 1994 में लिंडा आर्चर्ड और उनके तत्कालीन पति द्वारा बनाया गया था। लिंडा, जो अब 62 वर्ष की हैं, और उनके पति ने छह साल तक गर्भधारण की कोशिशों के बाद इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का सहारा लिया। 1994 में उनके चार भ्रूण बनाए गए। इनमें से एक भ्रूण से उनकी बेटी का जन्म हुआ, जो अब 30 साल की है और उसकी अपनी 10 साल की बेटी भी है। बाकी तीन भ्रूणों को क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक के जरिए तरल नाइट्रोजन में माइनस 190 डिग्री सेल्सियस पर जमाकर रखा गया।
लिंडा ने कई सालों तक इन भ्रूणों को संरक्षित रखने के लिए हर साल सैकड़ों से लेकर 1500 डॉलर तक का खर्च वहन किया। तलाक के बाद, जब लिंडा को लगा कि वह इन भ्रूणों का उपयोग खुद नहीं कर पाएंगी, उन्होंने इन्हें नष्ट करने या वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए देने के बजाय गोद लेने का फैसला किया। लिंडा, जो एक ईसाई हैं, का मानना था कि प्रत्येक भ्रूण में जीवन की संभावना है, और इसे एक मौका मिलना चाहिए।
लिंडा ने अपने भ्रूणों को नाइटलाइट क्रिश्चियन एडॉप्शन्स की स्नोफ्लेक्स भ्रूण गोद लेने की योजना के तहत दान किया। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें भ्रूण दान करने वाले और उसे गोद लेने वाले परिवारों को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है। लिंडा ने अपनी पसंद जाहिर की कि उनके भ्रूण को एक श्वेत, ईसाई, विवाहित दंपति को दिया जाए, जो अमेरिका में रहता हो। इस प्रक्रिया में भ्रूण को संपत्ति के रूप में माना जाता है, और दान करने वाला परिवार अपनी पसंद के आधार पर गोद लेने वाले परिवार का चयन कर सकता है।
लिंडसे और टिम पियर्स, जो 35 और 34 साल के हैं, सात साल तक गर्भधारण की कोशिशों में असफल रहे थे। कई डॉक्टरों से मिलने और पारंपरिक गोद लेने पर विचार करने के बाद, लिंडसे को स्नोफ्लेक्स प्रोग्राम के बारे में पता चला। उन्होंने इस प्रोग्राम के लिए आवेदन किया और लिंडा के भ्रूणों से मेल खा गए। स्नोफ्लेक्स के "ओपन हार्ट्स" प्रोग्राम के तहत, जो पुराने या कम संभावना वाले भ्रूणों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, पियर्स दंपति को ये भ्रूण सौंपे गए।
30 साल पुराने भ्रूण को थॉ करने और प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। 1994 में भ्रूणों को स्लो-फ्रीजिंग तकनीक से जमाया गया था, जिसमें बर्फ के क्रिस्टल बनने का खतरा रहता है, जो भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है। आज की विट्रिफिकेशन तकनीक, जो तेजी से भ्रूण को जमाती है, ज्यादा सुरक्षित है। रीजॉइस फर्टिलिटी क्लिनिक, टेनेसी में डॉ. जॉन गॉर्डन और भ्रूण विशेषज्ञ सारा एटकिंसन ने इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। तीनों भ्रूण थॉ करने में सफल रहे, लेकिन एक भ्रूण का विकास रुक गया। बाकी दो भ्रूणों को 14 नवंबर 2024 को लिंडसे के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया, और एक भ्रूण से थैडियस का जन्म हुआ।
लिंडसे ने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए उन्हें ओहायो से टेनेसी तक पांच बार पांच घंटे की यात्रा करनी पड़ी। जन्म के समय कुछ जटिलताएं आईं, लेकिन मां और बच्चा दोनों अब स्वस्थ हैं। लिंडसे ने कहा, "वह बहुत शांत है। हम इस अनमोल बच्चे को पाकर हैरान और खुश हैं।"
थैडियस की जैविक मां लिंडा ने जब उसकी तस्वीरें देखीं, तो उन्हें अपनी बेटी से गहरी समानता दिखी। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी बेटी की बेबी बुक निकाली और तस्वीरों को देखा। इसमें कोई शक नहीं कि वे भाई-बहन हैं।" लिंडा ने थैडियस से मिलने की इच्छा जताई और कहा कि यह उनके लिए "सपना सच होने जैसा" होगा। हालांकि, दूरी के कारण अभी कोई मुलाकात तय नहीं हुई है।
लिंडा ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया उनके लिए "विज्ञान कथा जैसी" थी। थैडियस की जैविक बहन, जो 30 साल की है, की अपनी 10 साल की बेटी है, जिससे थैडियस का पारिवारिक रिश्ता और भी अनोखा हो जाता है। लिंडसे और टिम, जो उस समय बच्चे थे जब यह भ्रूण बनाया गया था, ने भी इस अनुभव को अविश्वसनीय बताया।
थैडियस का जन्म भ्रूण गोद लेने और आईवीएफ की नैतिकता पर नई बहस छेड़ गया है। स्नोफ्लेक्स जैसे धार्मिक संगठन मानते हैं कि भ्रूण में जीवन की शुरुआत होती है और इसे नष्ट करना अनैतिक है। रीजॉइस फर्टिलिटी क्लिनिक के डॉ. जॉन गॉर्डन, जो एक रिफॉर्म्ड प्रेस्बिटेरियन हैं, ने कहा, "हमारा मानना है कि प्रत्येक भ्रूण को जीवन का मौका मिलना चाहिए। केवल वही भ्रूण स्वस्थ बच्चे में नहीं बदल सकता, जिसे प्रत्यारोपित करने का अवसर न दिया जाए।"
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों, जैसे अमेरिकन सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. ओवेन डेविस, का कहना है कि भ्रूण को "जीवन" कहना वैज्ञानिक रूप से सटीक नहीं है, क्योंकि ये अभी भ्रूण हैं, न कि भ्रूणीय अवस्था से आगे विकसित हुए हैं। इसके अलावा, भ्रूण गोद लेने की प्रक्रिया में दानदाताओं द्वारा धर्म, नस्ल और राष्ट्रीयता जैसे मानदंड तय करने पर भी सवाल उठे हैं।
- पहले के रिकॉर्ड
थैडियस से पहले, 2022 में रेचल और फिलिप रिजवे के जुड़वां बच्चे लिडिया और टिमोथी ने 30 साल पुराने भ्रूण से जन्म लेकर रिकॉर्ड बनाया था। उससे पहले, 2017 में एम्मा गिब्सन और 2020 में उनकी बहन मौली ने क्रमशः 25 और 27 साल पुराने भ्रूणों से जन्म लेकर सुर्खियां बटोरी थीं। थैडियस का जन्म 30 साल और दो महीने पुराने भ्रूण से हुआ, जो अब तक का सबसे लंबा समय है।
थैडियस का जन्म दर्शाता है कि उचित संरक्षण के साथ भ्रूण दशकों तक व्यवहार्य रह सकते हैं। यह उन लाखों जोड़ों के लिए आशा की किरण है, जो गर्भधारण में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका में अनुमानित 4 से 15 लाख जमे हुए भ्रूण हैं, और भ्रूण गोद लेने की प्रक्रिया उन्हें नया जीवन देने का एक रास्ता हो सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया महंगी और जटिल है, और सभी क्लिनिक पुराने भ्रूणों को स्वीकार नहीं करते।
थैडियस डैनियल पियर्स का जन्म चिकित्सा विज्ञान की प्रगति और मानव जीवन की संभावनाओं का प्रतीक है। 30 साल पुराने भ्रूण से एक स्वस्थ बच्चे का जन्म न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो माता-पिता बनने का सपना देख रहे हैं।
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