Trending: हरियाणा में ISI जासूसी कांड: पाकिस्तानी लड़की के हनीट्रैप में फंसा देवेंद्र सिंह, फेसबुक पोस्ट से खुला देशद्रोह का राज
कैथल के मस्तगढ़ चीका गांव का रहने वाला देवेंद्र सिंह धिल्लों पहली बार पुलिस के रडार पर तब आया, जब उसने 12 मई 2025 को फेसबुक पर पिस्तौल और बंदूकों की तस्वीरें अपलोड कीं। इ....
हरियाणा के कैथल जिले में एक सनसनीखेज जासूसी कांड ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 25 वर्षीय देवेंद्र सिंह धिल्लों, जो पंजाब के पटियाला में खालसा कॉलेज का राजनीति विज्ञान का मास्टर्स छात्र है, को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, देवेंद्र को एक पाकिस्तानी लड़की ने हनीट्रैप में फंसाकर ISI के लिए काम करने को मजबूर किया। उसकी गिरफ्तारी की शुरुआत 13 मई 2025 को फेसबुक पर अवैध हथियारों की तस्वीरें पोस्ट करने के कारण हुई, जिसके बाद पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। यह मामला न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह भारत-पाकिस्तान सीमा पर हाल के तनावों और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दूसरा ऐसा मामला है।
मामले की शुरुआत: फेसबुक पोस्ट ने खोला राज
कैथल के मस्तगढ़ चीका गांव का रहने वाला देवेंद्र सिंह धिल्लों पहली बार पुलिस के रडार पर तब आया, जब उसने 12 मई 2025 को फेसबुक पर पिस्तौल और बंदूकों की तस्वीरें अपलोड कीं। इन तस्वीरों को देखकर स्थानीय पुलिस को शक हुआ, और उसे 13 मई को हिरासत में लिया गया। शुरू में यह मामला अवैध हथियारों से जुड़ा प्रतीत हुआ, लेकिन जब पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, तो एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। पूछताछ में देवेंद्र ने स्वीकार किया कि वह पाकिस्तान की ISI के लिए संवेदनशील जानकारी लीक कर रहा था, जिसमें पटियाला सैन्य छावनी की तस्वीरें और भारत-पाकिस्तान संघर्ष से जुड़ी गोपनीय जानकारी शामिल थी।
हनीट्रैप का जाल: पाकिस्तानी लड़की की भूमिका
पुलिस जांच में सामने आया कि देवेंद्र को एक पाकिस्तानी लड़की ने हनीट्रैप में फंसाया था। यह लड़की, जिसका नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, ने सोशल मीडिया के जरिए देवेंद्र से संपर्क स्थापित किया। सूत्रों के अनुसार, यह संपर्क नवंबर 2024 में तब शुरू हुआ, जब देवेंद्र ने करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते पाकिस्तान का दौरा किया था। इस धार्मिक यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात ISI एजेंट्स से हुई, जिन्होंने उसे लालच और हनीट्रैप के जरिए अपने जाल में फंसा लिया।
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंट्स ने देवेंद्र को न केवल पैसे का लालच दिया, बल्कि एक लड़की के साथ भावनात्मक और अंतरंग रिश्ते का झांसा देकर उसे जासूसी के लिए उकसाया। X पर एक पोस्ट में दावा किया गया कि देवेंद्र इस लड़की के साथ सात दिन तक रहा और भारत लौटने के बाद जासूसी शुरू कर दी। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए ISI एजेंट्स से संपर्क बनाए रखा और संवेदनशील जानकारी साझा की।
करतारपुर कॉरिडोर और ISI का नेटवर्क
देवेंद्र का पाकिस्तान दौरा करतारपुर कॉरिडोर के माध्यम से हुआ, जो सिख तीर्थयात्रियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण गलियारा है। पुलिस का मानना है कि ISI इस कॉरिडोर का दुरुपयोग भारतीय नागरिकों को भर्ती करने के लिए कर रही है। नवंबर 2024 में अपनी यात्रा के दौरान, देवेंद्र ने ननकाना साहिब का दौरा किया, जहां उसे ISI के अधिकारियों ने टारगेट किया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसे भारतीय सेना की गतिविधियों, खासकर पटियाला छावनी की तस्वीरें और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी जानकारी भेजने का काम सौंपा गया था।
कैथल की पुलिस अधीक्षक आस्था मोदी ने बताया कि देवेंद्र ने ISI के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा और उसे इसके बदले में काफी धनराशि दी गई। उसका फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, और बैंक खातों की जांच की जा रही है ताकि पाकिस्तानी एजेंट्स से हुए लेनदेन का पता लगाया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर और बढ़ती जासूसी गतिविधियां
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में तनाव बढ़ा था। अप्रैल 2022 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बाद 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम हुआ। हालांकि, सीमा पर शांति के बावजूद, जासूसी गतिविधियां तेज हो गई हैं। देवेंद्र की गिरफ्तारी हरियाणा में एक सप्ताह के भीतर दूसरा ऐसा मामला है। इससे पहले, 10 मई को पानीपत में 24 वर्षीय नौमान इलाही को इसी तरह की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
X पर कई यूजर्स ने इस मामले को देशद्रोह करार देते हुए कड़ी सजा की मांग की है। एक पोस्ट में लिखा गया, “25 वर्षीय देवेंद्र सिंह को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है - यह सर्वोच्च स्तर का विश्वासघात है। उनके जैसे देशद्रोही को मृत्युदंड से कम कुछ नहीं मिलना चाहिए।”
कानूनी कार्रवाई और आरोप
देवेंद्र सिंह के खिलाफ कैथल के साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3, 4, और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने, विदेशी एजेंट्स के साथ संचार, और गोपनीय जानकारी के अनधिकृत उपयोग से संबंधित अपराध शामिल हैं। उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, और जांच जारी है।
पुलिस को शक है कि देवेंद्र एक बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें हरियाणा और पंजाब में कई अन्य लोग शामिल हैं। हाल ही में हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा और पांच अन्य लोगों को भी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिससे इस नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगता है।
सामाजिक और सुरक्षा निहितार्थ
इस मामले ने सोशल मीडिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ISI भारतीय युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए टारगेट कर रही है, खासकर उन लोगों को जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या भावनात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। रिटायर्ड मेजर एस.पी. शर्मा ने कहा, “यह चिंताजनक है कि दुश्मन एजेंसियां सामान्य नागरिकों और सोशल मीडिया प्रभावितों को खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।”
देवेंद्र सिंह का मामला भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे को उजागर करता है। यह घटना सोशल मीडिया के दुरुपयोग, हनीट्रैप की रणनीति, और सीमा पार से जासूसी नेटवर्क की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है। सरकार और खुफिया एजेंसियों के लिए यह एक चेतावनी है कि करतारपुर कॉरिडोर जैसे माध्यमों का दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर निगरानी को और सख्त करना होगा। देवेंद्र की गिरफ्तारी के बाद जांच जारी है, और आने वाले दिनों में इस जासूसी नेटवर्क के और खुलासे होने की संभावना है। यह मामला न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति हर नागरिक को सतर्क रहने की जरूरत है।
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