UPI ट्रांजेक्शन में समस्या आने पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया, पैसा वापस पाने का तरीका समझें।
UPI से जुड़ी शिकायतें जैसे गलत अकाउंट में पैसे भेजना, ट्रांजेक्शन फेल होना या फ्रॉड के मामले में उपयोगकर्ता ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर
- गलत UPI ट्रांजेक्शन या फ्रॉड पर NPCI पोर्टल से शिकायत कैसे करें, स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
- NPCI पोर्टल पर UPI शिकायत दर्ज करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया और रिफंड की संभावना
- UPI शिकायत का पहला स्तर UPI ऐप या बैंक, उसके बाद NPCI एस्केलेशन
UPI से जुड़ी शिकायतें जैसे गलत अकाउंट में पैसे भेजना, ट्रांजेक्शन फेल होना या फ्रॉड के मामले में उपयोगकर्ता ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। मुख्य रूप से नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म के माध्यम से प्रक्रिया चलती है। सबसे पहले UPI ऐप या बैंक से शिकायत करें, यदि समाधान न मिले तो NPCI पोर्टल पर जाएं। शिकायत दर्ज करने पर एक रेफरेंस नंबर मिलता है जिससे स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। पैसा वापस मिलने की संभावना ट्रांजेक्शन के प्रकार और समय पर निर्भर करती है।
शिकायत की शुरुआत UPI ऐप जैसे गूगल पे, फोनपे, पेटीएम या BHIM से होती है जहां ट्रांजेक्शन हिस्ट्री में जाकर समस्या रिपोर्ट की जा सकती है। ऐप में ट्रांजेक्शन चुनकर रिपोर्ट ए प्रॉब्लम या हेल्प ऑप्शन चुनें। यदि ऐप स्तर पर हल न हो तो PSP बैंक (जिस बैंक से UPI लिंक है) से संपर्क करें। बैंक को जांच के लिए कुछ दिन लगते हैं। यदि बैंक से भी समाधान न मिले तो NPCI के डिस्प्यूट रिड्रेसल पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। NPCI शिकायत को संबंधित बैंक को फॉरवर्ड करता है और रिजॉल्यूशन के लिए समय सीमा निर्धारित करता है।
NPCI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म सेक्शन में ट्रांजेक्शन प्रकार चुनें। ट्रांजेक्शन आईडी, अमाउंट, डेट, UPI आईडी, बैंक डिटेल्स और समस्या का विवरण भरें। आवश्यक दस्तावेज जैसे स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें। सबमिट करने पर कंप्लेंट रेफरेंस नंबर मिलता है। NPCI जांच के बाद बैंक को निर्देश देता है। रिफंड के लिए यदि ट्रांजेक्शन गलत अकाउंट में गया है तो रिसीवर से संपर्क या चार्जबैक प्रक्रिया अपनाई जाती है। समय सीमा के भीतर शिकायत दर्ज करने पर रिफंड की संभावना बढ़ जाती है, आमतौर पर 3 से 30 दिनों में रिजॉल्यूशन होता है।
UPI ट्रांजेक्शन में समस्या आने पर तुरंत कार्रवाई जरूरी है। यदि गलत UPI आईडी पर पैसे भेज दिए गए हैं तो सबसे पहले रिसीवर से संपर्क कर पैसे वापस मांगें। यदि रिसीवर सहमत न हो तो UPI ऐप में ट्रांजेक्शन चुनकर रिपोर्ट इश्यू ऑप्शन से शिकायत दर्ज करें। ऐप में समस्या का प्रकार चुनें जैसे इनकरेक्ट ट्रांसफर टू अनदर अकाउंट। ऐप सपोर्ट टीम जांच शुरू करती है और बैंक से संपर्क करती है।
यदि ऐप से समाधान न मिले तो PSP बैंक (जिस बैंक का UPI हैंडल है) से संपर्क करें। बैंक को ट्रांजेक्शन डिटेल्स और प्रूफ दें। बैंक जांच करता है और रिजॉल्यूशन के लिए समय लेता है। कई मामलों में बैंक रिफंड प्रोसेस करता है यदि ट्रांजेक्शन हाल का है।
यदि बैंक स्तर पर भी समस्या हल न हो तो NPCI के डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म पर जाएं। वेबसाइट पर व्हाट वी डू टैब से UPI चुनें और डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म क्लिक करें। कंप्लेंट सेक्शन में ट्रांजेक्शन चुनें। नेचर ऑफ ट्रांजेक्शन जैसे P2P या P2M चुनें। इश्यू कैटेगरी जैसे इनकरेक्टली ट्रांसफर्ड टू अनदर अकाउंट चुनें। फॉर्म में ट्रांजेक्शन आईडी या UTR नंबर, अमाउंट, डेट, समय, सेंडर और रिसीवर UPI आईडी, बैंक नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल भरें। समस्या का संक्षिप्त विवरण लिखें। स्क्रीनशॉट, बैंक स्टेटमेंट या अन्य प्रूफ अपलोड करें। सबमिट करने पर एक कंप्लेंट रेफरेंस नंबर या टिकट नंबर मिलता है जिससे स्टेटस चेक किया जा सकता है।
NPCI शिकायत को संबंधित बैंक या TPAP को रूट करता है। बैंक को जांच पूरी कर रिजॉल्यूशन रिपोर्ट देनी होती है। RBI गाइडलाइंस के अनुसार UPI कंप्लेंट्स का रिजॉल्यूशन 30 दिनों के अंदर होना चाहिए। यदि फ्रॉड है तो जल्दी रिपोर्ट करने पर रिफंड की संभावना अधिक होती है, कभी-कभी 1 घंटे के अंदर भी रिकवर हो सकता है। अन्य तरीके में NPCI हेल्पलाइन 1800-120-1740 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह 24x7 उपलब्ध है। कॉल पर ट्रांजेक्शन डिटेल्स दें और कंप्लेंट रजिस्टर करें।
BHIM ऐप में भी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री से कंप्लेंट रेज करें। ऐप में हेल्प एंड सपोर्ट सेक्शन से फॉर्म भरें या फीडबैक दें। शिकायत दर्ज करने के बाद स्टेटस ट्रैक करें। NPCI पोर्टल पर रेफरेंस नंबर से चेक करें या बैंक से अपडेट लें। यदि रिजॉल्यूशन न मिले तो बैंकिंग ओम्बड्समैन से संपर्क करें। यह प्रक्रिया UPI यूजर्स को सुरक्षा प्रदान करती है और गलत ट्रांजेक्शन में रिफंड का रास्ता खोलती है। तुरंत शिकायत दर्ज करने से सफलता की संभावना बढ़ती है।
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