शामली में यूपी एटीएस का बड़ा ऑपरेशन: कैराना से 5 संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार।

उत्तर प्रदेश एटीएस को पिछले काफी समय से खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, जो

Apr 8, 2026 - 13:55
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शामली में यूपी एटीएस का बड़ा ऑपरेशन: कैराना से 5 संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार।
  • देश की सुरक्षा से खिलवाड़ की साजिश नाकाम: सीमा पार सूचनाएं भेजने वाले नेटवर्क पर एटीएस का प्रहार
  • इंतजार उर्फ टार्जन और साजिद समेत 5 हिरासत में: कैराना में छापेमारी के बाद गहन पूछताछ जारी

उत्तर प्रदेश एटीएस को पिछले काफी समय से खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, जो विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में हैं। इन सूचनाओं की पुष्टि होने के बाद, एटीएस की देवबंद यूनिट ने एक विशेष टीम का गठन किया और मंगलवार की शाम शामली जिले के कैराना कस्बे में सुनियोजित तरीके से दबिश दी। पुलिस और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में कैराना के अलग-अलग मोहल्लों से पांच संदिग्धों को उठाया गया। जैसे ही एटीएस की गाड़ियां कस्बे में दाखिल हुईं और छापेमारी शुरू हुई, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों को शुरुआत में इसकी भनक तक नहीं लगी, लेकिन हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान सामने आने के बाद स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हुई।

हिरासत में लिए गए संदिग्धों की पहचान इंतजार उर्फ टार्जन, साजिद और उनके तीन अन्य साथियों के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ये सभी आरोपी पिछले काफी समय से संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे। एटीएस की जांच टीम को शक है कि ये लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के सीधे संपर्क में थे। इन पर आरोप है कि ये भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों की आवाजाही से संबंधित नक्शे, तस्वीरें और अन्य गोपनीय दस्तावेज डिजिटल माध्यमों से पाकिस्तान भेज रहे थे। एटीएस ने इन सभी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि इनके नेटवर्क की गहराई का पता लगाया जा सके। पकड़े गए संदिग्धों में से एक 'टार्जन' का नाम पहले भी कुछ संदिग्ध गतिविधियों में चर्चा में रहा था। एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन लोगों को सीमा पार से कोई फंडिंग (पैसा) भी मिल रही थी या ये किसी बड़े स्लीपर सेल का हिस्सा हैं जो आने वाले समय में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

गिरफ्तारी के बाद एटीएस की टीम इन सभी पांचों संदिग्धों को किसी अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर ले गई है, जहाँ उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यह जानना है कि इस जासूसी नेटवर्क के तार और कहाँ-कहाँ तक फैले हुए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ ऐसे चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स मिले हैं जो सीधे तौर पर विदेशी नंबरों से जुड़े हुए हैं। इन डेटा को रिकवर करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कैराना और शामली के आसपास के जिलों में इनके और कौन से मददगार छिपे हुए हैं जो इन्हें रसद या सूचनाएं जुटाने में सहायता प्रदान कर रहे थे।

कैराना में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में विदेशी खुफिया एजेंसियों की पैठ बनाने की कोशिशें जारी हैं। एटीएस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि पकड़े गए आरोपी कितने समय से पाकिस्तान के संपर्क में थे और उन्होंने अब तक कितनी महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा की हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि इन संदिग्धों को सोशल मीडिया के जरिए हनीट्रैप या पैसों का लालच देकर इस जाल में फंसाया गया था। यह जासूसी का एक ऐसा मॉड्यूल नजर आ रहा है जो बेहद गुपचुप तरीके से केवल इंटरनेट और सोशल मीडिया एप्स का उपयोग कर देश की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास कर रहा था।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति और दिल्ली से नजदीकी के कारण हमेशा से ही सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है। एटीएस की देवबंद यूनिट इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभाले हुए है और उच्चाधिकारियों को पल-पल की रिपोर्ट भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि पकड़े गए संदिग्धों में से कुछ स्थानीय स्तर पर व्यापार या अन्य सामान्य कार्यों से जुड़े हुए थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। अपनी सामान्य पहचान की आड़ में वे इस खतरनाक खेल को अंजाम दे रहे थे। एटीएस अब इनके बैंक खातों और पिछले कुछ महीनों में हुए लेनदेन की भी बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि जासूसी के बदले इन्हें कितना भुगतान किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शामली और आसपास के जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर नजर रखें और किराएदारों के सत्यापन की प्रक्रिया को और तेज करें। एटीएस की टीम ने आरोपियों के घर से कुछ डायरियां और लिखित दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनका मिलान उनके बयानों से किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे प्रदेश में सक्रिय जासूसी के अन्य नेटवर्कों का भी अंत किया जा सकेगा। यह कार्रवाई देश के भीतर छिपे गद्दारों को एक कड़ा संदेश है कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

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