Hardoi: रेडक्रॉस की कार्यशैली पर बवाल- ठंड में सोई संस्था, राहत बाँटी नजदीकियों और चमचों को।
जिले में इस वर्ष भीषण ठंड ने गरीब,असहाय और बेसहारा लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त
हरदोई। जिले में इस वर्ष भीषण ठंड ने गरीब,असहाय और बेसहारा लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रेडक्रॉस सोसायटी हरदोई की भूमिका पूरे शीतकाल में लगभग नदारद रही। दिसंबर–जनवरी के दौरान जब तापमान लगातार गिरता रहा, तब जिले की अनेक सामाजिक, धार्मिक व स्वयंसेवी संस्थाओं ने कंबल वितरण,अलाव और राहत सामग्री बांटकर मानवीय जिम्मेदारी निभाई, वहीं रेडक्रॉस सोसायटी की चुप्पी अब भी सवालों के घेरे में है।
पूरे जाड़े के मौसम में रेडक्रॉस द्वारा किसी भी बड़े या संगठित राहत कार्यक्रम की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। न गरीबों के लिए कंबल वितरण हुआ,न बेसहारा लोगों के लिए कोई विशेष अभियान। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस संस्था का उद्देश्य ही आपदा और संकट के समय मानव सेवा करना है,उसकी यह निष्क्रियता बेहद चिंताजनक है। खासकर तब,जब रेडक्रॉस को संसाधनों और प्रशासनिक संरक्षण की कोई कमी नहीं मानी जाती है।
अब ठंड लगभग समाप्त होने के बाद 8 जनवरी को लोनार थाना क्षेत्र अंतर्गत आग लगने की एक घटना में रेडक्रॉस द्वारा कुछ राहत सामग्री बांटे जाने की बात सामने आई है लेकिन यह राहत कार्य भी विवादों में घिर गया है। बताया जा रहा है कि यह वितरण बेहद चुपचाप किया गया,न तो इसकी कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही सोसायटी की प्रबंध कमेटी को विधिवत अवगत कराया गया।केवल सभापति एवं एक दो सदस्यों द्वारा अपनी व्यक्तिगत वाहवाही के लिए ये वितरण किया गया। सूत्रों द्वारा ये भी खबर है कि वितरण के लिए ले जाई गई सामग्री लाभार्थियों को गिनी चुनी बांटी जाती है बल्कि पदाधिकारियों द्वारा राहत सामग्री का अपने नजदीकियों और नौकर चाकरों को बाँट कर बंदरबाँट कर लिया जाता है।
- ज्वलंत सवाल ? राहत सामग्री का वितरण गुपचुप क्यों ?
रेडक्रॉस सोसायटी के ही कई पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस राहत वितरण के तरीके पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि बिना कमेटी को जानकारी दिए,बिना किसी ठोस निर्णय या प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के राहत सामग्री बांटना न केवल असंवैधानिक है,बल्कि संस्था के नियमों के भी खिलाफ है। आरोप है कि यह पहली बार नहीं हुआ है,पूर्व में भी जब कभी राहत सामग्री बांटी गई, तब उसकी जानकारी प्रबंध कमेटी के अधिकांश सदस्यों को नहीं दी गई। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब संस्था के अध्यक्ष जिलाधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष स्वयं राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन हैं, तब भी रेडक्रॉस की कार्यप्रणाली इतनी अपारदर्शी क्यों है? क्या पूरी प्रबंध कमेटी के होते हुए भी निर्णय केवल संस्था के सभापति स्तर पर ही लिए जाते हैं और बाकी सदस्य मूक दर्शक बने रहते हैं? क्या चुपचाप सामग्री का बंदरबाँट करने के लिए ही प्रबंध कमेटी एवं अन्य सदस्यों को सूचना नहीं दी जाती है ?
अब जिले में यह मांग तेज हो रही है कि रेडक्रॉस सोसायटी की कार्यशैली, निर्णय प्रक्रिया और राहत सामग्री के वितरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि ठंड के मौसम में राहत के लिए मिले संसाधनों का उपयोग आखिर कहां किया गया और यदि संस्था निष्क्रिय रही है तो जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो मानव सेवा के नाम पर चल रही यह प्रतिष्ठित संस्था अपनी विश्वसनीयता खोने की कगार पर खड़ी नजर आएगी।
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