Uttrakhand : बाज़पुर के डॉ. यासिर बने कुमाऊँ के पहले एम.सी.एच. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट

डॉ. यासिर बेग का शिक्षा-सफ़र बाज़पुर से ही शुरू हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट मैरीज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बाज़पुर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीपीएस आर. के.

Jan 9, 2026 - 22:10
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Uttrakhand : बाज़पुर के डॉ. यासिर बने कुमाऊँ के पहले एम.सी.एच. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट
Uttrakhand : बाज़पुर के डॉ. यासिर बने कुमाऊँ के पहले एम.सी.एच. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट

ब्यूरो चीफ :आमिर हुसैन 

बाज़पुर के लिए यह एक अत्यंत गौरव का क्षण है। बाज़पुर से ताल्लुक रखने वाले डॉ. मोहद यासिर बेग ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में एम.सी.एच. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी का परिणाम घोषित हुआ, जिसमें डॉ. यासिर बेग सफल घोषित हुए और उन्होंने एम.सी.एच. (मास्टर ऑफ़ किरुर्जिये) की डिग्री प्राप्त की। इसके साथ ही डॉ. यासिर बेग पूरे कुमाऊँ क्षेत्र के पहले ऐसे चिकित्सक बन गए हैं, जिन्होंने इस सुपर-स्पेशियलिटी को पूर्ण किया है।

डॉ. यासिर बेग का शिक्षा-सफ़र बाज़पुर से ही शुरू हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट मैरीज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बाज़पुर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने डीपीएस आर. के. पुरम, नई दिल्ली से आगे की स्कूली शिक्षा पूरी की, जिसे देश के सबसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में गिना जाता है। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे डॉ. यासिर बेग ने डॉक्टर बनने का सपना देखा और उसे कठिन परिश्रम, लगन और अनुशासन के साथ साकार किया।

चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने यूसीएमएस (यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़), नई दिल्ली से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी), नई दिल्ली से एम.एस. (जनरल सर्जरी) की पढ़ाई पूरी की, जहाँ उन्होंने अपनी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) भी प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने डीएनबी (जनरल सर्जरी) भी सफलतापूर्वक पूर्ण की।

साथ ही, डॉ. यासिर बेग ने नीट-एसएस 2022 जैसी अत्यंत कठिन और प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 14 प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का देशभर में प्रमाण दिया। इस रैंक के माध्यम से उनका चयन देश की शीर्ष सुपर-स्पेशियलिटी संस्थानों में से एक एसजीपीजीआई (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान), लखनऊ में एम.सी.एच. सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के लिए हुआ, जहाँ उन्हें पेट के सभी जटिल और उन्नत ऑपरेशनों में व्यापक एवं गहन प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।

एसजीपीजीआई जैसे उच्च स्तरीय संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान डॉ. यासिर बेग को लिवर, पैंक्रियास, पित्त नलिका, आंतों और पेट से संबंधित जटिल बीमारियों की सर्जरी में दक्षता हासिल हुई है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों और प्रोटोकॉल्स के तहत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है, जिससे वे अब एब्डोमेन की सभी जटिल सर्जरी विशेषज्ञता के साथ करने में सक्षम हैं।

यह उल्लेखनीय है कि डॉ. यासिर बेग ने अपनी समस्त शिक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और विश्वसनीय संस्थाओं से प्राप्त की है, जो उनकी शैक्षणिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद वे अपनी मिट्टी और अपने शहर बाज़पुर से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।डॉ. यासिर बेग के पिता श्री मोहद इदरीस बेग, उत्तराखंड सरकार के राजकीय इंटर कॉलेज, हरिपुरा हरसन, बाज़पुर से प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके परिवार में शिक्षा, ईमानदारी और समाज-सेवा को सदैव विशेष महत्व दिया गया है, जिसका प्रभाव डॉ. यासिर बेग के जीवन और करियर में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

अपनी इस उपलब्धि पर डॉ. यासिर बेग ने कहा, "मैं हमेशा से चाहता रहा हूँ कि जो ज्ञान और प्रशिक्षण मुझे मिला है, उसका लाभ अपने शहर और आसपास के लोगों तक पहुँचा सकूँ। बाज़पुर और पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में आज भी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं की भारी कमी है। पेट, लिवर, पैंक्रियास और आँतों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है। मेरा उद्देश्य है कि मैं बाज़पुर में रहकर ही लोगों को अच्छी, आधुनिक और सुलभ चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा सकूँ।"

उन्होंने यह भी कहा कि उनका सपना है कि बाज़पुर जैसे छोटे शहर में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, नैतिक चिकित्सा पद्धति और आधुनिक उपचार सुविधाएँ उपलब्ध हों, ताकि आम नागरिकों को इलाज के लिए दूर-दराज़ भटकना न पड़े।

डॉ. यासिर बेग की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बाज़पुर के नागरिकों, शिक्षकों, चिकित्सकों और युवाओं में विशेष उत्साह और गर्व का वातावरण है। लोगों का कहना है कि डॉ. यासिर बेग की सफलता बाज़पुर और कुमाऊँ के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत है, जो यह सिद्ध करती है कि छोटे शहरों से निकलकर भी मेहनत और जुनून के बल पर देश के शीर्ष संस्थानों तक पहुँचना संभव है।

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