Hardoi News: जनपद मे 3280 मी०टन डी०ए०पी० तथा 5589 मी०टन एन०पी०के० उपलब्ध है -जिलाधिकारी
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया है कि जनपद मे समस्त खुदरा उर्वरक विक्रेताओं द्वारा माह अक्टूबर 2024 से अब तक डी०ए०पी० ....
हरदोई। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया है कि जनपद मे समस्त खुदरा उर्वरक विक्रेताओं द्वारा माह अक्टूबर 2024 से अब तक डी०ए०पी० उर्वरक के अन्तर्गत प्रत्येक खुदरा उर्वरक विक्रेता द्वारा बिकी किये गये/सर्वाधिक मात्रा मे डी०ए०पी० क्रय करने वाले 5 पाँच क्रेताओं तथा विकास खण्ड के राजकीय कृषि बीज भण्डारो से बिक्री किये गये गेहूँ बीजों के सर्वाधिक पाँच खरीददारों की जाँच जिला स्तरीय एवं विकास खण्ड स्तरीय अधिकारियों द्वारा कराई जायेगी।
इस सन्दर्भ में डी०ए० पी० विक्रय करने वाले विक्रेताओं की सूची से क्रय करने वाले किसानों की सूची आनलाइन तैयार कर ली गयी है। फर्टिलाइजर मानीटरिंग सिस्टम पूर्णतया आनलाइन होने के कारण किसी भी क्रेताओं द्वारा उर्वरक क्रय करने पर उसका पी०ओ०एस० मशीन पर अंगूठा लगते ही विवरण फर्टिलाइजर मानीटरिंग सिस्टम पर आ जाता है। इसी विवरण को निकालकर जॉच करने का निर्णय लिया गया है जिससे एक क्रेता द्वारा कई जगहों पर उर्वरक खरीदने पर उसे उसके गाँव में जाकर जोत के आधार पर उर्वरक क्रय का सत्यापन किया जा सके।
इसी प्रकार बीज भण्डारों से बेचे जाने वाले अनुदानित बीज के केताओं की जाँच इस लिये की जायेगी कि दिये गये अनुदानित बीज कृषकों के जोत के आधार पर दिये गये है अथवा नहीं। जनपद में डी०ए०पी० की लगातार मॉग के कारण आगामी सात दिनों में निजी एवं सहकारिता क्षेत्र की रैंक लगातार लगेगी। शासन द्वारा यह भी निर्णय हुआ कि निजी क्षेत्र को प्राप्त होने वाली डी०ए०पी० उर्वरक का 30 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र मे जायेगा, जिससे सहकारी क्षेत्र में भी लगातार उर्वरक की उपलब्धता बनी रहे।
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वर्तमान डी०ए०पी० उर्वरक जनपद में 3280 मी०टन तथा एन०पी०के० 5589 मी०टन उपलब्ध है। जिसे विक्रेताओं के यहाँ स्टेटिक अधिकारियों एवं पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर वितरण कराया जा रहा है। कृषकों को डी०ए०पी० के साथ साथ एन०पी० के० के प्रयोग की सलाह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दी गई है इसलिये कृषक भाइयों से अपील है कि डी०ए०पी० उर्वरक के साथ साथ एन०पी०के० उर्वरक का भी प्रयोग करे। कृषक भाई अपनी जोत एवं फसल की संस्तुत मात्रा के अनुसार ही उर्वरक का प्रयोग करे। कृषकों को उनकी माँग एवं आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध होता रहेगा।
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