1 अप्रैल से लागू हुए वित्तीय जगत के 7 बड़े बदलाव: नए इनकम टैक्स एक्ट से लेकर एलपीजी की कीमतों तक, आज से बदल गई आपकी दुनिया।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही आज यानी 1 अप्रैल से देश में कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं, जिनका सीधा प्रभाव हर नागरिक की
- सैलरी स्ट्रक्चर और पीएफ नियमों में ऐतिहासिक संशोधन: इन-हैंड सैलरी में आ सकती है कमी, लेकिन भविष्य की बचत होगी और भी ज्यादा सुरक्षित
- महंगी हुई सड़क यात्रा और व्यावसायिक गैस: फास्टैग पास की दरों में वृद्धि और कमर्शियल सिलेंडर के दामों में उछाल से आम आदमी के बजट पर पड़ेगा सीधा असर
वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही आज यानी 1 अप्रैल से देश में कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं, जिनका सीधा प्रभाव हर नागरिक की जेब और दैनिक जीवन पर पड़ने वाला है। केंद्र सरकार और विभिन्न नियामक संस्थाओं ने बैंकिंग, टैक्सेशन, और घरेलू खर्चों से जुड़े नियमों में व्यापक संशोधन किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव 'आयकर अधिनियम 1961' की जगह 'नया आयकर अधिनियम 2025' और 'आयकर नियम 2026' के लागू होने के रूप में सामने आया है। इसके साथ ही, अब कर निर्धारण के लिए 'असेसमेंट ईयर' की पुरानी अवधारणा को समाप्त कर 'टैक्स ईयर' की नई व्यवस्था शुरू की गई है। ये बदलाव केवल कागजी नहीं हैं, बल्कि इनसे आपकी बचत, निवेश और खर्च करने के तरीके में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।
आयकर के क्षेत्र में हुए सुधारों ने वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भत्तों की सीमा को काफी विस्तार दिया है, जिससे पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में लाभ मिलने की संभावना है। नए नियमों के तहत बच्चों की शिक्षा के लिए मिलने वाला भत्ता, जो पहले केवल 100 रुपये प्रति माह था, उसे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसी तरह हॉस्टल भत्ते को 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह किया गया है। इसके अलावा, कार्यालय द्वारा दिए जाने वाले भोजन कूपन और उपहारों की कर-मुक्त सीमा में भी तीन गुना तक की वृद्धि की गई है। हालांकि, जो कर्मचारी कंपनी की कार का उपयोग व्यक्तिगत और आधिकारिक दोनों कार्यों के लिए करते हैं, उनके लिए टैक्स की देनदारी बढ़ गई है। छोटे इंजन वाली कारों के लिए प्रति माह 8,000 रुपये और बड़ी कारों के लिए 10,000 रुपये का टैक्स मूल्य निर्धारित किया गया है, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भी अपने नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, जिससे अब भविष्य निधि (PF) का पैसा निकालना बैंक से पैसे निकालने जितना आसान हो जाएगा। 1 अप्रैल से ईपीएफओ के सदस्य एटीएम और यूपीआई के माध्यम से भी अपने पीएफ खाते से पैसे निकाल सकेंगे, बशर्ते वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हों। इसके साथ ही, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है, जिससे बीमारी, शिक्षा या विवाह जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए क्लेम केवल 3 दिनों के भीतर सेटल हो जाएंगे। एक और बड़ा बदलाव नई श्रम संहिता (Labour Codes) के संभावित क्रियान्वयन से जुड़ा है, जिसके तहत मूल वेतन (Basic Pay) कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य होगा। इससे कर्मचारियों का पीएफ योगदान बढ़ेगा, जिससे भविष्य की निधि तो मजबूत होगी, लेकिन हर महीने घर आने वाली 'इन-हैंड' सैलरी में कुछ कटौती देखी जा सकती है।
व्यावसायिक एलपीजी और विमान ईंधन की कीमतों में उछाल
तेल विपणन कंपनियों ने आज सुबह कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलोग्राम) की कीमतों में 195.50 रुपये की भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर 2,078.50 रुपये का हो गया है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी इजाफा किया गया है, जिससे आने वाले दिनों में हवाई सफर और बाहर खाना खाना महंगा हो सकता है। राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पुरानी दरों पर ही उपलब्ध रहेगी।
बैंकिंग सेवाओं की बात करें तो कई प्रमुख बैंकों ने अपने एटीएम ट्रांजैक्शन और न्यूनतम बैलेंस के नियमों को आज से सख्त कर दिया है। अब यूपीआई के माध्यम से एटीएम से कैश निकालने की सुविधा को भी मुफ्त ट्रांजैक्शन की मासिक सीमा में गिना जाएगा। यदि कोई ग्राहक निर्धारित सीमा से अधिक बार एटीएम या यूपीआई कैश का उपयोग करता है, तो उसे प्रति ट्रांजैक्शन अतिरिक्त शुल्क देना होगा। कुछ बैंकों ने अपने चुनिंदा डेबिट कार्डों पर दैनिक नकद निकासी की सीमा को भी 1 लाख रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया है। इसके अलावा, खाते में न्यूनतम बैलेंस न होने पर लगने वाले जुर्माने की दरों में भी संशोधन किया गया है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक की नई शुल्क संरचना को ध्यान से देख लें ताकि अनचाहे शुल्कों से बचा जा सके।
सड़क परिवहन के क्षेत्र में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने फास्टैग के सालाना पास की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। 1 अप्रैल से फास्टैग का वार्षिक पास 3,000 रुपये के बजाय 3,075 रुपये में मिलेगा। यह पास निजी वाहनों के लिए है और इसे साल भर में अधिकतम 200 बार टोल पार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों ने अभी तक अपने फास्टैग का केवाईसी (KYC) अपडेट नहीं किया है, उन्हें टोल प्लाजा पर दोगुना शुल्क देना पड़ सकता है। सरकार ने 'वन व्हीकल, वन फास्टैग' नीति को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है, जिसका अर्थ है कि एक ही फास्टैग को एक से अधिक वाहनों पर इस्तेमाल करना अब संभव नहीं होगा और ऐसा करने पर टैग को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
निवेश और शेयर बाजार के क्षेत्र में भी आज से नए कर नियम प्रभावी हो गए हैं। इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O) पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ा दिया गया है। फ्यूचर्स ट्रांजैक्शन पर टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर इसे 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। साथ ही, अब कंपनियों द्वारा शेयरों के बायबैक से प्राप्त होने वाली राशि पर शेयरधारकों को कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा, जो पहले कंपनियों द्वारा चुकाया जाता था। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के निवेशकों के लिए भी नियम बदले हैं; अब मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने सीधे आरबीआई से बॉन्ड खरीदे थे, सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर अब टैक्स देना होगा। ये सभी बदलाव निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर करेंगे।
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