सम्भल न्यूज़: शरीयत में किसी तरह का हस्तक्षेप संविधान के साथ छेड़खानी: मौलाना मौहम्मद मियाँ
रिपोर्ट- उवैस दानिश,
सम्भल। सुप्रीम कोर्ट के तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के फैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ की आपत्ति के बाद सम्भल से धर्मगुरु मौलाना मोहम्मद मियां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति तो नहीं होनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को यह बात सोचनी चाहिए उसके किसी फैसले से शरीयत में हस्तक्षेप न हो शरीयत में किसी तरह का हस्तक्षेप यह संविधान के साथ छेड़खानी है।
सम्भल से धर्मगुरु मौलाना मौहम्मद मियाँ ने तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ द्वारा आपत्ति जताने के बाद कहा कि हिंदुस्तान के अंदर संविधान में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत घरेलू मामलात है संविधान हमें इजाजत देता है कि हम इस्लामी शरीया के अनुसार अपने घरों के अंदर तलाक, निकाह आदि में शरीयत के अनुसार ही कम करें।
इस सिलसिले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो बात कही है वह किसी हद तक ठीक है शरीयत में किसी तरह का हस्तक्षेप यह संविधान के साथ छेड़खानी है यह सारे फैसले राजनीति की वजह से किए जा रहे हैं हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति तो नहीं होनी चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट को यह बात सोचनी चाहिए उसके किसी फैसले से शरीयत में हस्तक्षेप न हो।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ ने तलाकशुदा महिलाओं के लिए जो कानून दिया है इसके ऊपर शाहबानो केस के सिलसिले में काफी बहस हो चुकी है हिंदुस्तान के अंदर तहरीक चल भी चुकी है हमें वो सारी बातों को ध्यान में रखते हुए यहां पर इन मसाईल के साथ छेड़खानी उचित नहीं है मुसलमानो को शरीयत के ऊपर अमल करने की इजाजत होनी चाहिए।
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