डीएम दुर्गा ने बच्चों को बताई 'शिक्षा' की 'शक्ति', नाम रोशन करने की दी प्रेरणा
डीएम दुर्गा बनी शिक्षक, बच्चों से सुने पहाड़े, नेत्ररोग से ग्रसित छात्रा के इलाज को किया निर्देशित
लखीमपुर-खीरी।
आमतौर पर अधिकारी सरकारी स्कूलों में औचक निरीक्षण कर वहां की अच्छाई और कमियों को जांचते हैं और शिक्षकों को आवश्यक सुधार करने के लिए प्रेरित करते हैं लेकिन बच्चों को मिल रही शिक्षा का स्वयं ही अच्छे से आंकलन कर उन्हें नई-नई चीजें सिखाना और उनकी दैनिक दिनचर्या कैसी हो, इस बारे में भी बात करना बड़ा ही दिलचस्प कहा जाएगा। जिलाधिकारी के स्तर पर पहुंचकर भी बच्चों को एक शिक्षक की तरह ट्रीट करना एक विशेष बात है। कुछ ऐसा ही हुआ जिले के संविलियन स्कूलों आधाचाट, पीएस चिमनी और यूपीएस पिपरिया में, जब डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने निरीक्षण कर बच्चों के शिक्षा-स्तर को अच्छे से परखा और उन्हें जीवन मे आगे बढ़ने के तौर-तरीके भी बताए। उन्होंने शिक्षक बनकर बच्चों को कई नई चीजों से लेकर दैनिक दिनचर्या के बारे में भी बताया। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ने और अपने परिवार व जिले का नाम रोशन करने की बात से उन्हें प्रोत्साहित भी किया। डीएम दुर्गा ने आधाचाट स्कूल में क्लास 5 के बच्चों के शिक्षा-स्तर को जांचा और बच्चों से जोड़-घटाव के सवालों को ब्लैक बोर्ड पर हल करवाया। सही जबाव देने वाले बच्चों की उन्होंने हौसलाफजाई की। इस बीच डीएम ने सोनिका, अंजू, रूपा आदि छात्राओं से बुक रीडिंग करवाई। उन्होंने शिक्षकों को कहा कि शिक्षा ग्रहण करने में कमजोर बच्चों को क्लास में आगे बिठाकर उनके बौद्धिक विकास पर ज्यादा ध्यान दें।
प्राइमरी स्कूल चिमनी में डीएम दुर्गा ने पहले बच्चों की उपस्थिति जांची और फिर रूबी, अंशू छात्राओं से क्लास में उपस्थित बच्चों की संख्या गिनवाई। उन्होंने बच्चों से पहाड़े भी सुनें, जिसके बाद तालियां बजवाकर उनका हौसला बढ़ाया। दैनिक दिनचर्या के बारे में बच्चों को विस्तार से जानकारी उन्होंने दी। भोजन करने से पहले हाथ धोने, रोजाना सुबह-शाम अच्छे से ब्रश करने आदि के बारे में बताते हुए इन सभी कामों को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की बात कही। इस बीच उन्होंने संबंधित बीडीओ को एक माह के भीतर स्कूल-भवन निर्माण कार्य को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने मिड-डे मील व शौंचालय आदि का भी निरीक्षण किया।
पिपरिया स्कूल पहुंचकर डीएम ने बच्चों के शिक्षा-स्तर को परखा। जब उनकी नजर नेत्र रोग से ग्रसित सातवीं कक्षा की छात्रा रागिनी पर पड़ी तो उन्होंने सीएमओ को निर्देशित किया कि चिकित्सा टीम की सहायता से रागिनी के नेत्रों का परीक्षण कर उन्हें अवगत कराया जाए। बच्चों से उन्होंने बुक रीडिंग भी करवाई। स्कूल में लगे हैंडपम्प से गंदा पानी आता देख उन्होंने प्रधान से नाराजगी जताई और इसे शीघ्र ही रिबोर कराने के निर्देश दिए।
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जिलाधिकारी ने निरीक्षण के समय विभिन्न शिक्षकों से शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक, खेल व बच्चों की रुचि के हिसाब से शिक्षा देने की बात भी कही। बच्चों को प्रेरित करते हुए मन लगाकर पढ़ने, माता-पिता व शिक्षकों का आदर करने और सभी का नाम रोशन करने के लिए प्रेरणा दी।
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