अयोध्या न्यूज़: मिल्कीपुर में तीसरी बार होने जा रहे उपचुनाव की तैयारी में जुटे सियासी दल।
- मिल्कीपुर सीट जीतकर बीजेपी करना चाहती है हार का हिसाब बराबर!
- मिल्कीपुर उप चुनाव में यादव, पासी और ब्राह्मण होंगे निर्णायक,उपचुनाव के ट्रेंड ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें।
अयोध्या। समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद के लोकसभा सांसद बनने के बाद अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई है, जहां उपचुनाव होने हैं। अवधेश प्रसाद 2022 में मिल्कीपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे।आजादी के बाद से अब तक का यह तीसरा उपचुनाव होगा। जिसके लिए सभी राजनैतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दिया है। अब जिस के बाद यह कहा जा रहा है कि अयोध्या लोकसभा सीट की हार का हिसाब बीजेपी मिल्कीपुर सीट से बराबर करना चाहती है।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद पहला लोकसभा चुनाव था। पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता राम मंदिर का जिक्र करते नजर आए थे, लेकिन सपा ने फैजाबाद (अयोध्या) सीट जीतकर राम मंदिर मुद्दे को फेल कर दिया है। अयोध्या संसदीय सीट पर मिली हार ने बीजेपी को बहुत गहरी चोट दी है। बीजेपी अब इस हार का हिसाब अयोध्या से सांसद बने अवधेश प्रसाद के विधायकी से इस्तीफा देने से खाली हुई मिल्कीपुर विधानसभा सीट से करना चाहती है, लेकिन इस सीट के उपचुनाव के ट्रेंड बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा रहे हैं तो सपा के हौसले बुलंद कर रहे हैं।
फैज़ाबाद लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर सपा के अवधेश प्रसाद को बढ़त मिली थी जबकि लल्लू सिंह को केवल एक विधानसभा सीट पर बढ़त मिली थी।
मिल्कीपुर सीट पर बीजेपी की नजर
अवधेश प्रसाद के लोकसभा सांसद बनने के बाद अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई है, जहां उपचुनाव होने हैं। अवधेश प्रसाद 2022 में मिल्कीपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। अयोध्या लोकसभा सीट की हार का हिसाब बीजेपी मिल्कीपुर सीट से बराबर करना चाहती है। इसके लिए बीजेपी यह विधानसभा सीट किसी भी कीमत पर जीतना चाहती है, जिसके लिए मजबूत उम्मीदवार की तलाश भी शुरू कर दी गई है। पार्टी ऐसे उम्मीदवार को उतारने की फिराक में है, जो मिल्कीपुर सीट के सियासी समीकरण में फिट बैठता हो और जीतकर हार का हिसाब बराबर कर सके।
मिल्कीपुर विधानसभा सीट का इतिहास
आजादी से अब तक के इतिहास में मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर में यह तीसरा उपचुनाव होगा। मिल्कीपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद ही अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हुई है, उससे पहले तक यह सामान्य सीट हुआ करती थी। मिल्कीपुर विधानसभा सीट 1967 में वजूद में आई, जिसके बाद कांग्रेस, जनसंघ और सीपीआई, बीजेपी, बसपा और सपा यहां जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। इस सीट पर सबसे ज्यादा सपा-लेफ्ट 4-4 बार जीतने में सफल रही। कांग्रेस तीन बार, बीजेपी दो बार, जनसंघ और बसपा एक-एक बार जीतने में सफल रही हैं।
मिल्कीपुर में कब-कब हुए उपचुनाव
मिल्कीपुर विधानसभा सीट 1967 में बनने के बाद से लेकर अभी तक दो बार उपचुनाव हुए हैं और अब तीसरी बार चुनाव होने जा रहा है। यहां से कभी कद्दावर नेता मित्रसेन यादव विधायक हुआ करते थे,वो लेफ्ट से लेकर सपा तक के टिकट पर विधायक बने। मित्रसेन यादव वर्ष 1989 में सीपीआई से पहली बार लोकसभा पहुंचे थे और दूसरी बार 1998 में सपा से विधायक रहते हुए उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता था। इस तरह से मित्रसेन यादव के सांसद चुने जाने के बाद उपचुनाव हुए थे तो दूसरी बार उनके बेटे आनंद सेन के विधायकी से इस्तीफा देने के बाद साल 2004 में उपचुनाव हुए थे।
मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर दूसरी बार उपचुनाव 2004 में हुआ, जब सपा के तत्कालीन विधायक आनंदसेन यादव विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर बीएसपी में शामिल हो गए थे। इसके बाद उपचुनाव हुए तो सपा के रामचंद्र यादव फिर से विधायक बने, उस बार उन्होंने बसपा प्रत्याशी आनंदसेन यादव को करीब 35 हजार वोटों से मात दी थी। अब तीसरी बार मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं, लेकिन पिछले दो उपचुनाव के ट्रेंड सपा के हौसले को बुलंद करने वाले हैं तो बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा रहे।
मिल्कीपुर का सियासी समीकरण
मिल्कीपुर विधानसभा सीट के जातीय समीकरण को देखें तो सबसे ज्यादा 65 हजार यादव मतदाता है। इसके बाद पासी 60 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, मुस्लिम 35 हजार, ठाकुर 25 हजार, गैर-पासी दलित 50 हजार, मौर्य 8 हजार, चौरासिया 15 हजार, पाल 8 हजार, वैश्य 12 हजार के करीब है। इसके अलावा 30 हजार अन्य जातियों के वोट हैं। इस तरह मिल्कीपुर विधानसभा सीट के सियासी समीकरण को देखें तो यादव, पासी और ब्राह्मण तीन जातियों के वोटर अहम भूमिका में है।
सपा- बीजेपी के बीच सियासी टक्कर
पासी समाज से आने वाले अवधेश प्रसाद अब अयोध्या के सांसद बन गए हैं और उन्होंने मिल्कीपुर सीट छोड़ दी है। उपचुनाव में यहां एक बार फिर सपा और बीजेपी के बीच सियासी टक्कर देखने को मिलेगी, लेकिन लोकसभा चुनाव में जिस तरह से मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर सपा को बढ़त मिली थी, उसके चलते बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ गई। मिल्कीपुर में बीजेपी को 87879 वोट मिले जबकि सपा को 95612 वोट मिले थे। इस तरह करीब 8 हजार वोटों की बढ़त सपा को थी। इसके अलावा उपचुनाव में जिस तरह से सपा को जीत मिलती रही है, उसके चलते भी बीजेपी के लिए अयोध्या की हार का हिसाब बराबर करना आसान नहीं?
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