Hardoi News: रामलीला मेला समिति ने किया राम का राजतिलक- सीता वनवास देख दर्शकों के नयन अश्रुपूरित हुए।  

ऐतिहासिक रामलीला मेला पठकाना के 88 वें बर्ष का अंतिम मंचन राजगद्दी नाटक स्थानीय कलाकारों ने परंपरानुसार....

Oct 15, 2024 - 17:08
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Hardoi News: रामलीला मेला समिति ने किया राम का राजतिलक- सीता वनवास देख दर्शकों के नयन अश्रुपूरित हुए।  

शाहाबाद \ हरदोई। श्री रामलीला मेला पठकाना में स्थानीय कलाकारों द्वारा राम का राजतिलक कर सीता बनवास नाटक का मंचन सफलतापूर्वक किया गया। जिसे देख कर दर्शकों की ऑंखें भर आईं।

बताते चलें कि ब्रिटिश हुकूमत से चालू ऐतिहासिक रामलीला मेला पठकाना के 88 वें बर्ष का अंतिम मंचन राजगद्दी नाटक स्थानीय कलाकारों ने परंपरानुसार किया। जिसकी सभी ने भूरि भूरि प्रसंशा की। सोमवार की रात को क्षेत्रवासियों ने अपने पसंदीदा स्थानीय कलाकारों का अविस्मरणीय अभिनय देखा। पात्रों में लालू राय साहब समेत अभय खत्री, शिवकांत गुप्ता, पारस गुप्ता धोबी बने और ललित मोहन मिश्रा ने बाल्मीकि की भूमिका निभाई, इसी क्रम में अरुण अग्निहोत्री राम, मधुप मिश्रा नारद, मनोज मिश्रा लक्ष्मण, राजीव अग्निहोत्री भरत, मुनीश कुमार शुक्ला शत्रुघ्न, प्रियंका रंजन सीता, सृष्टि राठौर कौशल्या, आशी मिश्रा पृथ्वी, मयंक मिश्रा दुर्मूख, अरुण श्रीवास्तव ने हनुमान का अभिनय कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।

इसी तरह सीता वनवास की भूमिका में भी जय मित्र, देवांश शुक्ला, दिनेश मिस्त्री, दीपांशु शुक्ला समेत उपरोक्त पात्रों ने ही अपनी कुशल कलाकारी की छाप दर्शकों के मन मस्तिष्क पर छोड़ दी। नाटक का शुभारंभ मेला अध्यक्ष संजय मिश्रा बबलू, ऋषि कुमार मिश्र, आशीष मोहन तिवारी राजू समेत समिति सहयोगियों ने राम का राजतिलक करने के उपरांत आरती पूजन प्रसाद वितरण से किया। राजगद्दी नाटक पर्दा गिरते ही सीता वनवास नाटक का मर्मभेदी मंचन किया गया तो दर्शक गण जहाँ भावविभोर हो गए, वहीं महिलाओं के नेत्र सजल मालुम हुए।

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सम्पूर्ण रामलीला से इतना तो एक बार फिर साफ हो गया कि सीता से अधिक अथाह दुख किसी अन्य ने सहन नहीं किए। अंततः लव कुश द्वारा राम के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा पकड़े जाने के बाद जब राम लक्ष्मण युद्ध में उनसे हार गए और फिर संयोगवश सीता से उनका सामना हुआ तो सीता ने अंतिम बार उनसे यही प्रश्न किया कि क्या अब भी मेरी परीक्षा पूर्ण नहीं हुई।

इतना कहते हुए उन्होंने माँ वसुन्धरा का आवाहन किया। जिससे पृथ्वी फट गई और देखते ही देखते सीता सदेह उसमें अदृश्य होती आँखों से ओझल हो गईं। दर्शकों के नयनों से नीर छलक आया। अंततः मेला अध्यक्ष उपरोक्त ने सम्पूर्ण समिति के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों, सहयोगियों सहित विशेष रूप से चंदा दाताओं की सराहना के साथ ही कवि सम्मेलन के संयोजक एवं मेला समिति के मीडिया प्रभारी ओमदेव दीक्षित एवं अन्य सभी सहयोगी पत्रकार बंधुओं की भूरि भूरि प्रशंसा। तथा सभी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने अपनी शुभकामनाएं अर्पित कीं।

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